कविता (गौरी तिवारी)
ऐसा क्यों होता है
हर सपना पूरा होने से पहले ही
टूट कर बिखर जाता है
ऐसा क्यों होता है
हर सच वास्तविक होने से पहले ही
एक दिन सबसे बड़ा झूठ बन जाता है
ऐसा क्यों होता है
एक झूठी उम्मीद, सच होने से पूर्व ही
आपकी सबसे बड़ी गलती बन जाती है
ऐसा क्यों होता है
पतझड़ के मौसम में, पुष्प खिलने से पहले ही
मुरझाकर पेड़ से गिर जाते हैं
ऐसा क्यों होता है
आकाश में रात्रि के अंधकार से पहले ही
आपके मन में उदासी का एक घोर अवसाद घिर जाता है
ऐसा क्यों होता है
कोई व्यक्ति आपकी हिम्मत बनने से पूर्व ही
आपकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है
ऐसा क्यों होता है
कोई व्यक्ति विश्वास पात्र होने से पहले ही
आपके लिए सबसे बड़ा विश्वास घाती बन जाता है
ऐसा क्यों होता है
कोई उपन्यास पूरा पढ़ने से पूर्व ही
एक नई दुनिया में होने का आभास होता है
ऐसा क्यों होता है
जीवन के अनेक रंगों से परिचित होने के पहले ही
आपका इंद्रधनुषी जीवन बेरंग हो जाता है
ऐसा क्यों होता है
दुखों का सागर, महासागर बनने से पूर्व ही
मुस्कुराहट के नकली मोती दे देता है
ऐसा क्यों होता है
कोई रागिनी दीवानी बनने से पहले ही
अपना जुनून भूल जाती है
ऐसा क्यों होता है
आपका हौसला जीत बनने से पूर्व ही
आपकी सबसे बड़ी हार बन जाता है
ऐसा क्यों होता है
दो प्रेमी मिलने से पहले ही
एक दूसरे से बिछड़ जाते हैं
ऐसा क्यों होता है
किसी व्यक्ति से लगाव होने के पूर्व ही
वह व्यक्ति आपसे बहुत दूर चला जाता है
