गिरिजाकुमार माथुर की जयंती पर विशेष
होंगे कामयाब, होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन यह पंक्तियाँ जो मनुष्य को कठिन परिस्थितियों के बीच भी निराश होने के
होंगे कामयाब, होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन यह पंक्तियाँ जो मनुष्य को कठिन परिस्थितियों के बीच भी निराश होने के
गौरी तिवारी क्रांति एकटक अनंत क्षितिज को नापती पतंगों को देख रहा था मानो वह भी उन्हीं रंग-बिरंगी पतंगों की दुनिया में जा मिला हो और आसमान में सैर करते करते बादलों को छू
गौरी तिवारी कई बार वस्त्र, एक विरासत या धरोहर की भांति अपने भीतर सुख-दुःख के पल तथा अनेक तरह की स्मृतियां संजोए होते हैं। यदि वह वस्त्र साड़ी है तो एक बेटी के लिए
साहित्य का उद्देश्य सिर्फ घटनाओं का वृत्तांत प्रस्तुत कर समाज का चित्रण करना ही नहीं होता, अपितु मनुष्य के भीतर अचेतन संवेदनाओं को जागृत करना भी होता है। जो साहित्य समय के साथ अपना अर्थ
गौरी तिवारी शहर के एक छोटे निजी चिकित्सालय में उस दिन असामान्य भीड़ थी, किसी को बुखार था, कोई खाँसी से परेशान था, कोई पेट दर्द से कराह रहा था। उन्हीं मरीजों के बीच
गौरी तिवारी रोहन सातवीं कक्षा का विद्यार्थी था। उसका स्वभाव अत्यंत चंचल तथा मिलनसार था, उसमें एक अच्छी बात थी कि वह हमेशा दूसरों की मदद करना चाहता था। लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमी
गौरी तिवारी संध्या का अंधेरा धीरे-धीरे घर की खिड़कियों पर उतर रहा था। बैठक में रखे टेलीविज़न की रोशनी कमरे में गंभीरता बिखेर रही थी। सोफ़े पर बैठे विनोद समाचार चैनल पर प्रसारित एक
गौरी तिवारी एक ओर स्वतंत्र, स्वच्छ, सुंदर और विकासशील भारत है और वहीं दूसरी ओर उसी भारत में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आज भी निर्धनता की बेड़ियों में कैद हैं, बुनियादी आवश्यकताओं
गौरी तिवारी "माँ, ये देखिए, मैंने एक कविता लिखी है आपके लिए।" "दिखाई नहीं दे रहा? हम किसी से फोन पर बात कर रहे हैं!" अपनी माँ के इस रूखे व्यवहार से संजना की