भक्ति और द्वंद्व
गौरी तिवारी ईश्वर की भक्ति में मानव ये लीन है, देह पार्थिव, जगत नश्वर, कुछ नहीं शाश्वत है। है हृदय में सांत्वना, प्रेम सभी के लिए अपार है, पर मन में अहंकार, ईर्ष्या भी सभी
गौरी तिवारी ईश्वर की भक्ति में मानव ये लीन है, देह पार्थिव, जगत नश्वर, कुछ नहीं शाश्वत है। है हृदय में सांत्वना, प्रेम सभी के लिए अपार है, पर मन में अहंकार, ईर्ष्या भी सभी
गौरी तिवारी क्यों व्यर्थ अतीत की स्मृतियों में बंधे रहना वर्तमान के मधुर क्षणों को संजोना तो सीखो आखिर जिंदगी एक ही तो है। जीवन ओस-बिंदु सा क्षणिक है इसे हर्ष के आलोक से भरना
गौरी तिवारी ------------------- आज मुझे अपनी बड़ी बुआ (शोभा तिवारी) के साथ आगाखान महल देखने का अवसर प्राप्त हुआ। मूला नदी के किनारे स्थित पुणे के कल्याणी नगर-यरवड़ा क्षेत्र में सुल्तान मुहम्मद शाह आगाखान तृतीय
हिमांशु जयहिंद बहुत लंबे समय से 'लपूझन्ना' मेरी पुस्तकों के रैक में पड़ी रही। इस मई माह की गर्मी में जब कहीं बाहर जाने का मन नहीं करता तब घर बैठकर खाली समय में उसे
गौरी तिवारी ममता के दामन में धरा ने हमें समाया है पेड़ पौधों और जल के सागर से हमारा ये जीवन सजाया है। ये ऋण है हमारी धरा का जो हमे चुकाना है स्वच्छ,शीतल वायु
गौरी तिवारी एक कली थी जन्मी फाल्गुन में मुख पर तेज, अधरों पर मुस्कान लिए, दुखों की थी घोर घटा, उन कष्टों में, आई सम्पन्नता, घर में खुशियाँ जहान लिए। पर घर की चौखट ने
गौरी तिवारी अचानक दोपहर में लाउडस्पीकर के शोर के कारण घर की खिड़कियों में कम्पन होने लगा, मानो भूकंप आया हो और खिड़कियां आपस में ज़ोर-जोर से टकराने लगी। तभी सीमा बालकनी में जाकर जाकर
गौरी तिवारी ऐसा क्यों होता है हर सपना पूरा होने से पहले ही टूट कर बिखर जाता है ऐसा क्यों होता है हर सच वास्तविक होने से पहले ही एक दिन सबसे बड़ा झूठ बन