पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी जी की जयंती पर विशेष
साहित्य का उद्देश्य सिर्फ घटनाओं का वृत्तांत प्रस्तुत कर समाज का चित्रण करना ही नहीं होता, अपितु मनुष्य के भीतर अचेतन संवेदनाओं को जागृत करना भी होता है। जो साहित्य समय के साथ अपना अर्थ
साहित्य का उद्देश्य सिर्फ घटनाओं का वृत्तांत प्रस्तुत कर समाज का चित्रण करना ही नहीं होता, अपितु मनुष्य के भीतर अचेतन संवेदनाओं को जागृत करना भी होता है। जो साहित्य समय के साथ अपना अर्थ
गौरी तिवारी शहर के एक छोटे निजी चिकित्सालय में उस दिन असामान्य भीड़ थी, किसी को बुखार था, कोई खाँसी से परेशान था, कोई पेट दर्द से कराह रहा था। उन्हीं मरीजों के बीच
गौरी तिवारी रोहन सातवीं कक्षा का विद्यार्थी था। उसका स्वभाव अत्यंत चंचल तथा मिलनसार था, उसमें एक अच्छी बात थी कि वह हमेशा दूसरों की मदद करना चाहता था। लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमी
गौरी तिवारी संध्या का अंधेरा धीरे-धीरे घर की खिड़कियों पर उतर रहा था। बैठक में रखे टेलीविज़न की रोशनी कमरे में गंभीरता बिखेर रही थी। सोफ़े पर बैठे विनोद समाचार चैनल पर प्रसारित एक
गौरी तिवारी एक ओर स्वतंत्र, स्वच्छ, सुंदर और विकासशील भारत है और वहीं दूसरी ओर उसी भारत में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आज भी निर्धनता की बेड़ियों में कैद हैं, बुनियादी आवश्यकताओं
गौरी तिवारी "माँ, ये देखिए, मैंने एक कविता लिखी है आपके लिए।" "दिखाई नहीं दे रहा? हम किसी से फोन पर बात कर रहे हैं!" अपनी माँ के इस रूखे व्यवहार से संजना की
गौरी तिवारी ईश्वर की भक्ति में मानव ये लीन है, देह पार्थिव, जगत नश्वर, कुछ नहीं शाश्वत है। है हृदय में सांत्वना, प्रेम सभी के लिए अपार है, पर मन में अहंकार, ईर्ष्या भी सभी
गौरी तिवारी क्यों व्यर्थ अतीत की स्मृतियों में बंधे रहना वर्तमान के मधुर क्षणों को संजोना तो सीखो आखिर जिंदगी एक ही तो है। जीवन ओस-बिंदु सा क्षणिक है इसे हर्ष के आलोक से भरना
गौरी तिवारी ------------------- आज मुझे अपनी बड़ी बुआ (शोभा तिवारी) के साथ आगाखान महल देखने का अवसर प्राप्त हुआ। मूला नदी के किनारे स्थित पुणे के कल्याणी नगर-यरवड़ा क्षेत्र में सुल्तान मुहम्मद शाह आगाखान तृतीय
हिमांशु जयहिंद बहुत लंबे समय से 'लपूझन्ना' मेरी पुस्तकों के रैक में पड़ी रही। इस मई माह की गर्मी में जब कहीं बाहर जाने का मन नहीं करता तब घर बैठकर खाली समय में उसे