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Category: साहित्य

साहित्य
स्वाभिमान (बाल कहानी)

स्वाभिमान (बाल कहानी)

गौरी तिवारी   चंदन एक अत्यंत निर्धन परिवार से था। उसके माता- पिता का पूरा जीवन एक समय का भोजन इकट्ठा करने में निकल गया, जिसके चलते चंदन की पढ़ाई पूर्ण न हो सकी। उसके

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सपनों की उड़ान (बाल कहानी)

सपनों की उड़ान (बाल कहानी)

गौरी तिवारी सामान्यतः एक प्रतिभाशाली विद्यार्थी विशिष्ट विद्यार्थी होता है, जिन्हें दूसरों के मुकाबले अधिमान्य माना जा सकता है। एक ऐसी ही विद्यार्थी थी प्रतिभा। वह ७वीं कक्षा की छात्रा थी। पढ़ने में तो होशियार

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कलरव फरवरी-मार्च, 2007

कलरव फरवरी-मार्च, 2007

https://drive.google.com/file/d/1IbKCoe8onqD1tQmwjbr-2e3EcMm6rv3A/view?usp=drivesdk मासिक पत्रिका कलरव, वर्ष 2007 के फरवरी-मार्च माह का अंक।

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कलरव नवंबर, 2006

कलरव नवंबर, 2006

https://drive.google.com/file/d/1oszB0WbJQyVAGvrW-SOl1ayPkF7oUkQu/view?usp=drivesdk मासिक पत्रिका कलरव का वर्ष 2006, नवंबर माह का अंक।

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कलरव (अक्टूबर, 2006)

कलरव (अक्टूबर, 2006)

kalrav october 2006   मासिक पत्रिका कलरव का वर्ष 2006, अक्टूबर माह का अंक।  

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मासिक पत्रिका कलरव

मासिक पत्रिका कलरव

कलरव पत्रिका का सितंबर 2006 का अंक।   https://drive.google.com/file/d/1ygI99xIAEZFlWuw5VLzcaWFnwtqUfsIJ/view?usp=drivesdk कलरव सितंबर 2006

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मां को गुजरे हुए एक साल (कविता)

मां को गुजरे हुए एक साल (कविता)

दिन-दिन बीतते हफ्ता बन गया, हफ्ता बन गया माह। गुजर गए बारह महीने, हो गया एक साल। मां को गुजरे हुए एक साल।। चिंता गुजरी आशा गुजरी, गुजर गया तेरा प्यार। गुजरे तेरे सुखभावों को,

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हड़ताल (बाल कहानी)

हड़ताल (बाल कहानी)

गौरी तिवारी   रुद्र ने अपने घर की बालकनी से चौराहे पर मुड़ती एक नीले रंग की गाड़ी देखी, वह बहुत खुश हो गया और हो भी क्यों ना? आखिर इतने समय बाद जो मिल

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आखिरी कलाम

आखिरी कलाम

खुदगर्ज़ राजनीति, जुमलोंमें तब्दील होती भाषा और उनका सामना करता आख्यान नित्यानंद तिवारी जिस घटना पर आखिरी कलाम नामक उपन्यास लिखा गया है, उस घटना के समय बीजेपी की सरकार थी। जिस समयः यानी 2003

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महंगाई डायन, प्रायोजित लेखक और भारतीय मीडिया

महंगाई डायन, प्रायोजित लेखक और भारतीय मीडिया

"जिसके मुंह से सुनो, चारों तरफ यही हवा है, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा!, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा!, लोगों का यह दावा है।, महंगाई छेड़ रही है तान,, आम आदमी है परेशान।, रुपया गर्त