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गांवों में भी बढ़ी फोटो एल्बम की जगह रील्स की मांग

डिजिटल कंटेंट क्रिएशन

 

शिवनंदन लाल 

 

ग्रामीण युवाओं के लिए डिजिटल कंटेंट क्रिएशन रोजगार और स्वरोजगार का एक बेहतरीन माध्यम बन रहा है। ग्रामीण युवा अपने स्मार्टफोन और इंटरनेट का उपयोग करके कृषि, बागवानी, स्थानीय संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन, खान-पान, वेशभूषा, रहन-सहन जैसे विषयों पर वीडियो रील्स और ब्लॉग बनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। आज ढेर सारे युवा डिजिटल क्रिएशन के जरिए अपनी पहचान बन चुके हैं और स्वरोजगार के मार्फत आय बढ़ाने में सक्षम हुए हैं तथा अन्य युवाओं को भी प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के अनेक युवा अपनी रुचि के हिसाब से कृषि बागवानी स्थानीय कला और संस्कृति शिक्षा गांव का जीवन प्राकृतिक सौंदर्य जैसे विषय पर रोचक कंटेंट तैयार कर लोगों में जागरूकता तो ला ही रहे हैं, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी प्रतिभा पूरी दुनिया तक पहुंचा रहे हैं तथा इस काम से खुद की आय बढ़ा कर अपना जीवन स्तर में भी सुधार कर रहे हैं।
आज से ठीक 11 साल पहले वर्ष 2015 में भारत ने डिजिटल इंडिया मिशन की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाना था। इस मिशन ने अद्वितीय सफलता प्राप्त की है। इंटरनेट कनेक्शन की संख्या 250 मिलियन से बढ़कर एक 1050 मिलियन हो गई है। डिजिटल इंडिया एक सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़कर एक जन आंदोलन में बदल गया है जिसने पूरे देश में शासन, वाणिज्य, दैनिक जीवन तथा रोजगार प्राप्त करने के अवसरों को मौलिक रूप से बदल दिया है।
ग्रामीण युवाओं के बीच डिजिटल कंटेंट क्रिएटिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इंडिया एआई मिशन के तहत मुफ्त में कई प्रोग्राम शुरू किया है। इसके अतिरिक्त युवाओं को एआई और आधुनिक तकनीकी स्किल में प्रशिक्षित करने के लिए कई राष्ट्रीय कौशल पहलों और डिजिटल कैंपेन की भी शुरुआत की गई है।
डिजिटलीकरण से ग्रामीण भारत में जबरदस्त बदलाव हो रहा है। अधिक से अधिक युवा प्रौद्योगिकी को अपना रहे हैं और डिजिटल दुनिया से जुड़ रहे हैं। मोबाइल प्रौद्योगिकी अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है और अधिक से अधिक ग्रामीण युवा अपने दिनचर्या में डिजिटल उपकरणों को अपना रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 24 वर्ष के 94% युवाओं के पास मोबाइल फोन की सुविधा है हालांकि शहरी क्षेत्र में यह सुविधा 97% है। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 24 वर्ष के 90% युवाओं के पास अब इंटरनेट कनेक्शन है जो दर्शाता है कि यह पीढ़ी तेजी से जुड़ रही है। ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं में ईमेल और इंटरनेट बैंकिंग की भी लोकप्रियता बढ़ी है। डिजिटल कौशल को लगातार अपनाने से ग्रामीण भारत और अधिक सशक्त हो रहा है तथा प्रौद्योगिकी के नए-नए अवसर विकसित होने की संभावना बढ़ी है। सरकार ने भी डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए नीतियों का निर्माण किया है। डिजिटल इंडिया पहल ने प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप और नवाचार योजनाओं को लागू किया है जिसमें टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन एंड डेवलपमेंट आफ एंटरपेन्योर्स, जेन नेक्स्ट, सपोर्ट फॉर इन्नोवेटिव स्टार्टअप डोमेन, स्पेसिफिक सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस और नेक्स्ट जेनरेशन इनक्यूबेशन स्कीम जैसी योजनाएं शामिल है। इसके अलावा भारत नेट परियोजना भी महत्वपूर्ण है जो ग्रामीण क्षेत्रों को ऑप्टिकल फाइबर लाइनों से जोड़ती है। यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड योजना दूर दराज के समुदायों को 4G सेवाएं प्रदान करती हैं। इसे इंटरनेट उपलब्धता बढ़ाने के लिए अपनाया गया है। भारत बीपीओ प्रमोशन स्कीम और नार्थ ईस्ट बीपीओ प्रमोशन स्कीम कम सेवा वाले क्षेत्रों में आईटी और आईटीइएस विकास को प्रोत्साहित करती है जिसके परिणाम स्वरुप नौकरी की संभावनाएं बढी है। पीएम वाणी कार्यक्रम भी चल रहा है जिसका उद्देश्य से पूरे देश में सार्वजनिक वाईफाई हॉटस्पॉट प्रदान करना है। इन सभी परियोजनाओं ने मिलकर डिजिटल संभावनाओं को बढ़ाया है तथा भारत की डिजिटल क्रांति को जमीन पर उतारने में अपेक्षित मदद की है।
आज आए दिन अनेक ऐसे युवाओं की कहानी सामने आती है जो केवल एक मोबाइल फोन से वीडियो बनाकर यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक पर व्यापक पहुंच के जरिए हर महीने लाखों रुपए कमा रहे हैं।

देश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कंटेंट क्रिएशन के लिए प्रतिक्षण नए-नए आइडिया पर काम हो रहा है। जीवन के छोटे-बड़े हर अवसरों की नवीन प्रस्तुति लोगों को लुभा भी रही है। भारतीय वेडिंग इंडस्ट्री में तकनीक और संवेदनाओं के संगम से एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। अब शादी के रस्मों के साथ-साथ भावनाओं और अनकहे पलों को सहेजने के लिए वेडिंग कंटेंट क्रिएटर की मांग बढ़ी है। यह डिजिटल बदलाव गांव के लिए एक नए अवसर के रूप में आया है, और गांव के युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक नया और मजबूत जरिया बन रहा है।
गांव देहात की शादियों में भी पारंपरिक फोटोग्राफर के साथ-साथ वेडिंग कंटेंट क्रिएटर और वेडिंग सोशल मीडिया मैनेजर की मांग बढ़ रही है। इनका मुख्य काम शादी की रस्मों के साथ-साथ मां की ममता, पिता का मौन और परदे के पीछे के उन कहे जज्बातों को सहेजना है जो अक्सर बड़े कैमरों की नजर से छूट जाते हैं।
इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब सर्च और अन्य वीडियो प्लेटफार्म के तेजी से बिस्तार ने नई पीढ़ी की सोच को बदल दिया है। आज युवा अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत पलों को हफ्तों बाद नहीं बल्कि उसी रियल टाइम में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ साझा करना चाहते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं की हर शादी की अपनी एक अनोखी कहानी होती है, कंटेंट क्रिएटर कैमरे के जरिए सिर्फ चेहरों को नहीं बल्कि रिश्तों की धड़कन और भावनाओं को रिकॉर्ड करते हैं जो लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। आलम यह है कि अब गांव में भी एल्बम कब मिलेगा की जगह पहला सवाल यह होता है की रील कब आएगी?
इस डिजिटल बदलाव के कारण छोटे कस्बों गांवों और ग्रामीण अंचल के रचनात्मक युवाओं के लिए स्वरोजगार और करियर का एक शानदार नया विकल्प बनकर उभरा है।

भारत का ग्रामीण डिजिटल विकास युवाओं को प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए सशक्त बना रहा है, जिससे दैनिक जीवन में बड़े बदलाव आ रहे हैं। डिजिटल क्रांति के कारण गांव और शहर के विभाजन कम हो रहे हैं। कम लागत वाले हाई स्पीड इंटरनेट और विभिन्न सरकारी पहलुओं की उपलब्धता के साथ ग्रामीण युवा संचार, स्टार्टअप, शिक्षा, पर्यटन, कृषि बागवानी और आर्थिक विकास के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने में सक्षम बन रहे हैं। यह प्रवृत्ति विकास और अवसर को बढ़ावा देने में प्रौद्योगिकी की भूमिका की बढ़ती समझ को दर्शाती है। जैसे-जैसे डिजिटल साक्षरता और बुनियादी ढांचा बेहतर हुआ है ग्रामीण युवा देश की भविष्य की कनेक्टिविटी और समावेशिता में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार हो रहे हैं।
कुल मिलाकर डिजिटल कंटेंट क्रिएशन आज युवाओं के लिए तेजी से उभरता हुआ कैरियर बन चुका है। फूड ब्लॉगिंग, ट्रैवल ब्लॉगिंग, म्यूजिक फोटोग्राफी, शिक्षा, खेती बागवानी और वीडियो प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों में युवा अपनी प्रतिभा को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पहचान और रोजगार दोनों में बदल रहे हैं। छोटे-छोटे गांव और पहाड़ी इलाकों के क्रिएटर भी अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर रहे हैं। हाल के दिनों में अनेक युवाओं के सफलता की कहानी यह बताती है कि आज रचनात्मकता सिर्फ शौक नहीं बल्कि मजबूत आर्थिक अवसर बन चुकी है।

 

(लेखक आकाशवाणी दिल्ली केंद्र पर वरिष्ठ अधिकारी हैं।)

 

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