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Category: विचार

विचार
शिक्षक की अहमियत

शिक्षक की अहमियत

अनिल तिवारी ------ रूस के महान साहित्यकार मैक्सिम गोर्की अपने देश के एक अन्य बड़े रचनाकार आंतोव चेखव से मिलने उनके घर गए। बातचीत के दौरान गोर्की ने चेखव से पूछा आप समाज के विभिन्न

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नाम : आजाद, पिताः स्वाधीनता, माता : भारत माता

नाम : आजाद, पिताः स्वाधीनता, माता : भारत माता

अनिल तिवारी सन् 1919 में जनरल डायर ने अमृतसर (पंजाब) के जलियांवाला बाग में कहर ढाया और निहत्थे लोगों को गोलियों से भून डाला। 13 वर्ष की अवस्था में चन्द्रशेखर को पूरी तरह झकझोर कर

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धर्म से गिरे, विज्ञान में अटके

धर्म से गिरे, विज्ञान में अटके

अनिल तिवारी धर्म। एक शब्द है, पर मामूली मत समझिएगा इस शब्द को। इस शब्द ने सदियों से मनुष्य के जीवन को दिशा दी है और उसकी गतिविधिओं को नियंत्रित किया है। इस शब्द की

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तकनीक ने हमें दिया है बहुत कुछ, लेकिन धीरे-धीरे छीन रही है सब कुछ

तकनीक ने हमें दिया है बहुत कुछ, लेकिन धीरे-धीरे छीन रही है सब कुछ

(विश्व प्रौद्योगिकी दिवस) अनिल तिवारी नांदिक दूसरा दर्जा पास कर कक्षा तीन में पहुंचे हैं और कुंज अब छठवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। आदर्श विद्यार्थी का लक्षण पूछने पर तोते की तरह सुनाते हैं "काग

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शोषण के लिए धर्म, लोक परलोक, स्वर्ग-नरक की काल्पनिक बातें

शोषण के लिए धर्म, लोक परलोक, स्वर्ग-नरक की काल्पनिक बातें

आलोक जयहिंद   भारत की लगभग 80 प्रतिशत धर्मभीरु जनता इसी बात में बुरी तरह उलझी हुई है कि, 'ऊपरवाला किस्मत लिखता है, वो सब देखता है, वो हमारे पाप-पुण्य का हिसाब रखता है, जीवन-मरण

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भारतीय राजनीतिक आकाश के सूरज हैं गांधी

भारतीय राजनीतिक आकाश के सूरज हैं गांधी

अनिल तिवारी   आज भारतीय समाज के कुछ लोग इस गीत, "दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल" को लेकर गांधी पर निशाना साधते हैं। क्या गांधी

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मजदूर दिवस विशेष

मजदूर दिवस विशेष

फिर गुलामी जैसी स्थिति में फंसता जा रहा मजदूर ----- अनिल तिवारी ------- शोषण के खिलाफ लंबे अरसे से ओढ़ रखी चुप्पी तोड़कर कामगार जब एनसीआर की सड़कों पर बगावत का झंडा लेकर उतरे तो

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जीत का फार्मूला बन गई है मुफ्त की रेवड़ी ?

जीत का फार्मूला बन गई है मुफ्त की रेवड़ी ?

अनिल तिवारी ----------- देश में जब भी कोई चुनाव आता है तो आधी आबादी को और अधिक सशक्त करने का दावा करते हुए तरह-तरह की रेवड़िया बांटने का दौर शुरू हो जाता है। इस रेस

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शेर और शहर 

शेर और शहर 

गौरी तिवारी मानव सभ्यता का निरंतर विकास हुआ है, भले ही उसकी गति धीमी हो किंतु निरंतर विकासशील रही है। लेकिन इसी विकास की चकाचौंध में भागते लोग एक स्वार्थी और हिंसक शेर के समान

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धर्म और स्त्री

धर्म और स्त्री

वर्षा सिंह   धर्म का इस्तेमाल स्त्री के खिलाफ एक हथियार की तरह हुआ। धर्म में स्त्री को एक सामान्य मनुष्य की तरह नहीं बरता गया बल्कि उसके इर्दगिर्द बंधनों के बेड़े खींचे गए। जन्म