भूत की याद में
भविष्य के इंतजार में
वर्तमान को भूल मत
वर्तमान को भूल मत
समय ना कभी रुका है
और ना कभी रुकेगा
तू खुद पर हौसला रख
तभी तो आगे बढ़ेगा
समय बीत जाने के बाद
तू बहुत पछताएगा
व्यर्थ चला गया समय
भला तू कहां से पाएगा
भूत की याद में
भविष्य के इंतजार में
वर्तमान को भूल मत
वर्तमान को भूल मत

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IS KAVITA KA KAVI KAUN HAI
यह कविता सुश्री गौरी तिवारी द्वारा लिखी गई है।