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Category: धर्म-कर्म

धर्म-कर्म
बलदाऊ से पुत्र की दीर्घायु मांगती माताएं

बलदाऊ से पुत्र की दीर्घायु मांगती माताएं

पं. आर.एस. द्विवेदी   पौराणिक मान्यता है कि भादों के कृष्णपक्ष की अष्टमी को भगवान कृष्ण प्रकट हुए थे। इससे दो दिन पहले ही उनके बड़े भाई बलदाऊ अर्थात् बलरामजी का जन्म हुआ था। उनके

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बुद्धि का तात्पर्य है विचार

बुद्धि का तात्पर्य है विचार

यदि विरासत और परिस्थिति ही सबकुछ होते तो संसार में हमें इतनी भिन्नता नजर नहीं आती। एक ही माता-पिता के दो लड़के एक जैसी अवस्थाओं के अंदर उत्पन्न होते हैं परंतु वे रंग, रूप और

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धीर – धर्मपरायणा, मुदुभाषिणी कौशल्या

धीर – धर्मपरायणा, मुदुभाषिणी कौशल्या

 डॉ. जयशंकर   कौशल्या रामकथा की ऐसी धीर गंभीर, धर्मकर्म का सिद्दत के साथ बिना किसी कोलाहल के अनुपालन करने वाली पात्र हैं जिनके अनुपस्थित में राम लीला की परिकल्पना भी संभव नही थी। क्योंकि

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क्यों मनाते हैं नागपंचमी और गुड़िया

क्यों मनाते हैं नागपंचमी और गुड़िया

कुमकुम शर्मा   प्रकृति से प्रेम की परम्परा नाग पंचमी सावन के महीने का एक प्रमुख त्यौहार है। यह प्रत्येक वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। हमारी हिन्दू संस्कृति

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कांवड़ यात्रा

कांवड़ यात्रा

भारतीय संस्कृति की अनुपम झांकी   आशीष कुमार    सावन मास की शुरुआत होते ही हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक, गंगा गंगोत्री से लेकर रामेश्वरम तक सम्पूर्ण भारत शिवमय हो उठता है। सावन मास में

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बल, बुद्धि, विद्या के सागर हनुमान

बल, बुद्धि, विद्या के सागर हनुमान

अतुलित विद्या के सागर, अष्ट सिद्धि नवनिधियों के दाता हनुमान वनवासी आदिम कपीस जनजाति में पैदा हुए थे। इनके पिता का नाम केसरी और माता का नाम अंजना था। ये अपने माता पिता के छ

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अति विचित्र रघुपति चरित

अति विचित्र रघुपति चरित

श्रीराम का नाम स्मरण आते ही आजीवन उनके द्वारा अपने महत और आदर्श कर्मों के द्वारा स्थापित एक ऐसी आदर्श छवि मनोमस्तिष्क के समक्ष उपस्थित हो जाती है जो हिमालय से भी अनगिनत गुना गर्वोन्नत,

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सुलझे हुए व्यक्तित्व से संपन्न श्रीयुक्त सुमित्रा

सुलझे हुए व्यक्तित्व से संपन्न श्रीयुक्त सुमित्रा

डॉ. जयशंकर   अद्भुत व्यक्तित्व की धनी सुमित्रा अयोध्या के चक्रवर्ती महाराजा दशरथ की तीसरी महिषी थी। सबसे बडी कौशल्या, उसके बाद कैकेयी और तीसरी पत्नी भगवत प्रेमी, नि:स्वार्थी, सभी परिस्थितियों में प्रसन्न रहने वाली सुमित्रा

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अनुपम गुणों से संपन्न रामकथा की अनसुनी नायिका उर्मिला

अनुपम गुणों से संपन्न रामकथा की अनसुनी नायिका उर्मिला

डा. जयशंकर   रामायण कालीन श्रेष्ठ चरित्रों में से एक चरित्र हैं उर्मिला जो विदेहराज राजा जनक और सुनयना की छोटी पुत्री और सीता की अनुजा थी। उनको पुराणों में शेषनाग की पत्नी नागलक्ष्मी तथा

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धर्मचारिणी, तपोधना शबरी

धर्मचारिणी, तपोधना शबरी

 डा. जयशंकर शेरपुरवासी शबरी का जन्म भीलों की उपजाति शाबर समुदाय में श्रीराम से बहुत पहले हुआ था। इनका असली और मूल नाम श्रमणा था। शाबर समुदाय में उत्पन्न होने के कारण इनको शबरी के