अति विचित्र रघुपति चरित
श्रीराम का नाम स्मरण आते ही आजीवन उनके द्वारा अपने महत और आदर्श कर्मों के द्वारा स्थापित एक ऐसी आदर्श छवि मनोमस्तिष्क के समक्ष उपस्थित हो जाती है जो हिमालय से भी अनगिनत गुना गर्वोन्नत,
श्रीराम का नाम स्मरण आते ही आजीवन उनके द्वारा अपने महत और आदर्श कर्मों के द्वारा स्थापित एक ऐसी आदर्श छवि मनोमस्तिष्क के समक्ष उपस्थित हो जाती है जो हिमालय से भी अनगिनत गुना गर्वोन्नत,
डॉ. जयशंकर अद्भुत व्यक्तित्व की धनी सुमित्रा अयोध्या के चक्रवर्ती महाराजा दशरथ की तीसरी महिषी थी। सबसे बडी कौशल्या, उसके बाद कैकेयी और तीसरी पत्नी भगवत प्रेमी, नि:स्वार्थी, सभी परिस्थितियों में प्रसन्न रहने वाली सुमित्रा
डा. जयशंकर रामायण कालीन श्रेष्ठ चरित्रों में से एक चरित्र हैं उर्मिला जो विदेहराज राजा जनक और सुनयना की छोटी पुत्री और सीता की अनुजा थी। उनको पुराणों में शेषनाग की पत्नी नागलक्ष्मी तथा
डा. जयशंकर शेरपुरवासी शबरी का जन्म भीलों की उपजाति शाबर समुदाय में श्रीराम से बहुत पहले हुआ था। इनका असली और मूल नाम श्रमणा था। शाबर समुदाय में उत्पन्न होने के कारण इनको शबरी के
अनिल तिवारी ऋषि मार्कंडेय ने दुर्गा सप्तशती के पांचवें अध्याय में कहा है, 'या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता'। और अगली पंक्ति में नमस्तस्यै,नमस्तस्यै,नमस्तस्यै नमो नमः कहकर मां को बार-बार प्रणाम किया है। मां सभी
ज्योतिषाचार्य अरुण कुमार मिश्र मानव जीवन केवल वर्तमान घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि समय, प्रकृति और चेतना के गहरे संबंधों का परिणाम है। भारतीय ज्योतिष परंपरा में संवत्सरफल इसी गूढ़ संबंध का सूक्ष्म