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Category: धर्म-कर्म

धर्म-कर्म
धर्मचारिणी, तपोधना शबरी

धर्मचारिणी, तपोधना शबरी

 डा. जयशंकर शेरपुरवासी शबरी का जन्म भीलों की उपजाति शाबर समुदाय में श्रीराम से बहुत पहले हुआ था। इनका असली और मूल नाम श्रमणा था। शाबर समुदाय में उत्पन्न होने के कारण इनको शबरी के

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भाव, कुभाव, अनख, आलसहूं

भाव, कुभाव, अनख, आलसहूं

अनिल तिवारी   ऋषि मार्कंडेय ने दुर्गा सप्तशती के पांचवें अध्याय में कहा है, 'या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता'। और अगली पंक्ति में नमस्तस्यै,नमस्तस्यै,नमस्तस्यै नमो नमः कहकर मां को बार-बार प्रणाम किया है। मां सभी

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संवत्सरफल और समय की दिशा का संकेत

संवत्सरफल और समय की दिशा का संकेत

   ज्योतिषाचार्य अरुण कुमार मिश्र   मानव जीवन केवल वर्तमान घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि समय, प्रकृति और चेतना के गहरे संबंधों का परिणाम है। भारतीय ज्योतिष परंपरा में संवत्सरफल इसी गूढ़ संबंध का सूक्ष्म