Breaking News :

nothing found
  1. Home
  2. काव्य कोना

Category: काव्य कोना

काव्य कोना
मोबाइल : मित्र अथवा शत्रु ?

मोबाइल : मित्र अथवा शत्रु ?

गौरी तिवारी   ज्ञान का दीप लिए जब विज्ञान का युग आया, मानव ने अपनी प्रतिभा से नव इतिहास रचाया अनंत क्षितिज की हर दूरी को पल में लांघा, हथेली पर ही जैसे संपूर्ण जग

काव्य कोना
परिवर्तन

परिवर्तन

गौरी तिवारी    वह ऐसा न था, उसका मन निर्मल निर्झर था, वह निष्कपट और निर्भय था पर छल की धूल निरन्तर पड़ती रही, निर्मल निर्झर भी धीरे-धीरे दूषित हो गया। वह ऐसा न था,

काव्य कोना
मानव और पशु

मानव और पशु

गौरी तिवारी   पशुओं पर दोष मढ़कर मानव बचता आया है, अपने मन का हर अँधियारा उनके सिर पर थोपता आया है। गधा बना आलस्य का प्रतीक, बैल कहा गया जड़ बुद्धि, लोमड़ियों पर छल

काव्य कोना
जंजीरें

जंजीरें

’गौरी तिवारी    लोगों को पसंद आती है आसमान में उड़ती पतंग अपने मुताबिक खींच लें जिसकी उड़ान की बागडोर पर खराब लगते हैं सारे बंधनों को तोड़ बेखौफ उड़ते डेंडेलिया के फूल जो बढ़ते

काव्य कोना
साक्ष्य (कविता)

साक्ष्य (कविता)

गौरी तिवारी    आँखें होती हैं साक्ष्य कभी इतिहास और भूगोल की कभी राजनीति और भ्रष्टाचार की कभी युद्ध और मानवता के पतन की कभी भुखमरी और निर्धनता की कभी क्रांति और संघर्ष की तो

काव्य कोना
कुर्सी की राजनीति

कुर्सी की राजनीति

गौरी तिवारी   कुर्सी के लोभ में राजनीति अक्सर व्यापार बन जाती है स्वार्थ की विषैली धारा लोकतंत्र के निर्झर में घुल जाती है सेवा की पावन चौखट पर सत्ता का व्यापार सजा, जनविश्वासों के

काव्य कोना
निराश आँखें (कविता)

निराश आँखें (कविता)

गौरी तिवारी    भूख ज्वालामुखी का लावा बन, दरिद्र के जीवन को तपाती है सूनी थाली की मौन व्यथा हर संध्या आँसू गाती है नन्हीं आँखें जब रोटी ढूँढ़ें, माँ अश्रुपूर्ण नेत्र झुका लेती खाली

काव्य कोना
प्रकृति

प्रकृति

गौरी तिवारी    भोर क्षितिज की दहलीज़ पर चुपके से दीप जलाती है, नींद भरे वन के आँगन में धीरे-धीरे गीत सुनाती है। किरणें नन्हीं बालिकाएँ बन ओस-मोती चुनती जातीं, सूनी पगडंडी के पर स्वर्णिम

काव्य कोना
मुसाफ़िर

मुसाफ़िर

गौरी तिवारी   इन बेनाम गलियों में, घूमे वह किसी बंजारे-सा, तपती ग्रीष्म की किरणों में, भटके वह किसी प्यासे-सा। है खोज उसे उस मार्ग की, जहाँ सत्य उसे साकार मिले, इस क्षणभंगुर जगत के

काव्य कोना
कलम की ताकत

कलम की ताकत

गौरी तिवारी    आओ मिलकर क्रांति लाएँ, कलम से राष्ट्र का भाग्य रचाएँ। ज्ञान के नव दीप जलाकर, तम की घटाओं को दूर भगाएँ, जन-जन के सुप्त विवेक को सत्य-सुधा का पान कराएँ। आओ मिलकर