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Category: विचार

विचार
अंबेडकर, गांधी, टैगोर और हिंदी

अंबेडकर, गांधी, टैगोर और हिंदी

(अंबेडकर जयंती पर विशेष) "पैरों में जूता भले ही ना हो लेकिन पास में किताब अवश्य होनी चाहिए।"   स्तालिन ने एक बार कहा था, "भाषा एक माध्यम है, औजार है जिसके जरिए एक-दूसरे का

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बुलावा आया तो सब सामान छोड़कर चली गई आशा ताई

बुलावा आया तो सब सामान छोड़कर चली गई आशा ताई

मद्धिम पड़ गई चांदी की चमक गौरी तिवारी -------- महान संगीतकार नौशाद ने एक साक्षात्कार में कहा था कि गायिकी में अगर लता मंगेशकर सोना हैं तो आशा भोसले चांदी। दोनों की अपनी-अपनी अहमियत है।

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देवी और श्रृंखला की कड़ियां

देवी और श्रृंखला की कड़ियां

गौरी तिवारी     मैं एक स्त्री हूं हां, हां , मैं एक साधारण मनुष्य हूं मत कहे ये समाज सम्मानित कर देवी ना ही गिरा दे आसमान से कह कर दानवी क्योंकि मैं भी

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विकास और विडम्बना

विकास और विडम्बना

गौरी तिवारी   बदलाव एक धीमी प्रक्रिया है किन्तु हर बदलाव अपने साथ विकास लेकर आता है। विकास शब्द सुनते ही हमारे मन में एक उजली, प्रगतिशील और उन्नत दुनिया की छवि उभरती है। ऊँची-ऊँची

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साधो, देखो जग बौराना!

साधो, देखो जग बौराना!

गौरी तिवारी   कितनी सुखद अनुभूति होती है , जब रात्रि के दूसरे पहर अपने घर की छत पर बैठकर श्वेत चांदनी की चादर ओढ़े चंद्रमा को देखते हैं या फिर टिमटिमाते सितारों के समूह

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जुर्म जिसकी माफी नहीं

जुर्म जिसकी माफी नहीं

गौरी तिवारी अक्सर हमारे साथ ऐसी घटनाएं घटित होती हैं जिनका महत्व एक सागर में मोती के समान होता है लेकिन फिर भी दिन के 24 घंटों में घटित 5 से 10 मिनट की घटना

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बड़े बेआबरू होकर बिहार से निकले नीतीश कुमार

बड़े बेआबरू होकर बिहार से निकले नीतीश कुमार

अनिल तिवारी -------- नीतीश कुमार के क्रमिक राजनीतिक उत्थान और तेज़ गिरावट को समझाना इतना आसान नहीं है। कुछ वर्ष पहले तक नीतीश को प्रधानमंत्री पद के योग्य “पीएम मैटेरियल” के रूप में देखा जा

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हानि-लाभ से आगे बढ़ मेल- मिलाप का त्यौहार है ‘होली’

हानि-लाभ से आगे बढ़ मेल- मिलाप का त्यौहार है ‘होली’

अनिल तिवारी ------- प्रसिद्ध चिंतक आइजनहावर ने अपने दिल की इच्छा व्यक्त की थी 'हमारी यह दुनिया भय और घृणा का भयानक समुदाय बनने से बचे और यहां विश्वास, सम्मान और सह अस्तित्व कायम हो'

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केवल विधिक शुद्धता ही नहीं नैतिक संवेदनशीलता भी चाहिए

केवल विधिक शुद्धता ही नहीं नैतिक संवेदनशीलता भी चाहिए

अनिल तिवारी     कानून की व्याख्या का एक स्वीकृत सिद्धांत है“उद्देश्यपरक व्याख्या”। इसका वास्तविक अर्थ यह है कि किसी अधिनियम को उस सामाजिक बुराई के आलोक में पढ़ा जाए जिसे समाप्त करने के लिए

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भाषा बोल ना जानहि….

भाषा बोल ना जानहि….

अनिल तिवारी   मेरी मातृभाषा ठेठ भोजपुरी है। हमारा पुश्तैनी इलाका उत्तर प्रदेश का सीमावर्ती जिला है जो के एक तरफ गंगा तो दूसरी तरफ घाघरा नदी से घिरा है। प्रचुर पानी वाली नदियों के