पर्यावरण (कविता)
गौरी तिवारी ममता के दामन में धरा ने हमें समाया है पेड़ पौधों और जल के सागर से हमारा ये जीवन सजाया है। ये ऋण है हमारी धरा का जो हमे चुकाना है स्वच्छ,शीतल वायु
गौरी तिवारी ममता के दामन में धरा ने हमें समाया है पेड़ पौधों और जल के सागर से हमारा ये जीवन सजाया है। ये ऋण है हमारी धरा का जो हमे चुकाना है स्वच्छ,शीतल वायु
गौरी तिवारी एक कली थी जन्मी फाल्गुन में मुख पर तेज, अधरों पर मुस्कान लिए, दुखों की थी घोर घटा, उन कष्टों में, आई सम्पन्नता, घर में खुशियाँ जहान लिए। पर घर की चौखट ने
गौरी तिवारी अचानक दोपहर में लाउडस्पीकर के शोर के कारण घर की खिड़कियों में कम्पन होने लगा, मानो भूकंप आया हो और खिड़कियां आपस में ज़ोर-जोर से टकराने लगी। तभी सीमा बालकनी में जाकर जाकर
गौरी तिवारी ऐसा क्यों होता है हर सपना पूरा होने से पहले ही टूट कर बिखर जाता है ऐसा क्यों होता है हर सच वास्तविक होने से पहले ही एक दिन सबसे बड़ा झूठ बन
गौरी तिवारी आज भी हिंदी साहित्य के विद्वान तथा प्रमुख आचार्य, महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की रचनाओं को पढ़ते ही उन रचनाओं की प्रासंगिकता भली भांति सिद्ध होती है। हिंदी साहित्य के इतिहास में 'द्विवेदी
गौरी तिवारी बेटी मेरी तुझे लोरी सुनाऊँ लोरी में कहानी मैं अपनी बतलाऊँ कहानी में दुनिया की रीत से मिलवाऊँ आ बेटी तुझे अपनी गोद में सुलाऊँ सावित्री अपनी सहमी हुई 12 वर्षीय बेटी नैना
गौरी तिवारी तुम वह मधुर गीत हो मेरे अंतर्मन की भावनाओं की तुम वह पहली मंज़िल हो मेरे इस कठिन जीवन सफर की तुम वह शब्दों से परे भाव हो मेरे हर प्रिय काव्य