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Category: साहित्य

साहित्य
कलरव (अक्टूबर, 2006)

कलरव (अक्टूबर, 2006)

kalrav october 2006   मासिक पत्रिका कलरव का वर्ष 2006, अक्टूबर माह का अंक।  

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मासिक पत्रिका कलरव

मासिक पत्रिका कलरव

कलरव पत्रिका का सितंबर 2006 का अंक।   https://drive.google.com/file/d/1ygI99xIAEZFlWuw5VLzcaWFnwtqUfsIJ/view?usp=drivesdk कलरव सितंबर 2006

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मां को गुजरे हुए एक साल (कविता)

मां को गुजरे हुए एक साल (कविता)

दिन-दिन बीतते हफ्ता बन गया, हफ्ता बन गया माह। गुजर गए बारह महीने, हो गया एक साल। मां को गुजरे हुए एक साल।। चिंता गुजरी आशा गुजरी, गुजर गया तेरा प्यार। गुजरे तेरे सुखभावों को,

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हड़ताल (बाल कहानी)

हड़ताल (बाल कहानी)

गौरी तिवारी   रुद्र ने अपने घर की बालकनी से चौराहे पर मुड़ती एक नीले रंग की गाड़ी देखी, वह बहुत खुश हो गया और हो भी क्यों ना? आखिर इतने समय बाद जो मिल

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आखिरी कलाम

आखिरी कलाम

खुदगर्ज़ राजनीति, जुमलोंमें तब्दील होती भाषा और उनका सामना करता आख्यान नित्यानंद तिवारी जिस घटना पर आखिरी कलाम नामक उपन्यास लिखा गया है, उस घटना के समय बीजेपी की सरकार थी। जिस समयः यानी 2003

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महंगाई डायन, प्रायोजित लेखक और भारतीय मीडिया

महंगाई डायन, प्रायोजित लेखक और भारतीय मीडिया

"जिसके मुंह से सुनो, चारों तरफ यही हवा है, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा!, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा!, लोगों का यह दावा है।, महंगाई छेड़ रही है तान,, आम आदमी है परेशान।, रुपया गर्त

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साहित्य की आवश्यकता

साहित्य की आवश्यकता

साहित्य शब्द का यदि शाब्दिक अर्थ देखा जाए तो यह स+हित के योग से बनता है अर्थात हित के साथ, सबके हित के लिए। हिंदी साहित्य के विभिन्न आचार्यों ने साहित्य को लेकर अपने अपने

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पढ़ने की ललक (कहानी)

पढ़ने की ललक (कहानी)

गौरी तिवारी   जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, और इस देश के गांव ही वह जड़ें हैं जिनसे शहर विकसित होते हैं। यहां का एक बहुत

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मां की ममता (कहानी)

मां की ममता (कहानी)

गौरी तिवारी   पुराना जख्म अभी भरा भी नहीं था कि फिर किसी के चीखने की आवाज आती है, बेल्ट कि वह धारियां जब शरीर पर लगती है तो ममता अपनी पूरी कोशिश करती है

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व्यथा (कविता)

व्यथा (कविता)

अब यह मात्र कोई व्यथा नहीं, यह भीतर उठता प्रलय निनाद है मन रूपी ज्वालामुखी के गर्भ में सदियों से पलता हुआ यह प्रतिशोध अगाध है इस विश्व में रेखाएँ नहीं, जंजीरें खिंची हैं जहां