गौरी तिवारी
रुद्र ने अपने घर की बालकनी से चौराहे पर मुड़ती एक नीले रंग की गाड़ी देखी, वह बहुत खुश हो गया और हो भी क्यों ना? आखिर इतने समय बाद जो मिल रहा है अपनी बुआजी और अपने सबसे अच्छे दोस्त राघव से। 1 साल बाद वे दोनों उससे मिलने के लिए दिल्ली से बनारस आए थे।
जैसे ही गाड़ी उसके घर के पास आई रूद्र भागकर उनकी गाड़ी के पास गया, और अपनी बुआ के चरण स्पर्श कर उन्हें प्रणाम किया। वह राघव को अपने साथ लेकर अन्दर जा ही रहा था कि एक प्यारा और मोटा सा कुत्ता जिसका नाम डमडम था वह अपनी पूंछ हिलाते हुए घर से बाहर निकल कर उनके चारों ओर घूमने लगा। राघव को उस से बहुत लगाव था, वह घुटने टेक कर बैठ गया और प्यार से डमडम की पीठ थपथपाने लगा।
“बेटा रुद्र तुम अपनी छुट्टियों में क्या कर रहे हो?” बुआजी ने स्नेह से रुद्र को पकड़ते हुए पूछा। इसपर रूद्र से कहा “मैं साइकिल चलाना सीख रहा हूं बुआजी। आपको पता है, मैं बहुत सारी कहानियों की किताबें भी पढ़ रहा हूं। हमेशा आप मुझे कहानियां सुनाती हैं ना! आज मैं आपको रोचक कहानियां सुनाऊंगा।”
“यह तो अच्छा है, मतलब तुम अपनी छुट्टियों का पूरा आनंद ले रहे हो। है ना?”
इस पर रूद्र हंस कर कहता है “हां।”
तभी उन तीनों की बातचीत को बाधित कर रूद्र की मां उन्हें बुलाती हैं “आप तीनों बाहर ही बात करते रहेंगे या फिर घर के अंदर भी आएंगे?” फिर वे सब घर के अंदर चले जाते हैं। कुछ समय बाद रूद्र की मां डमडम के लिए खाना लेकर आई, प्लेट की खड़खड़ाहट सुनते ही डमडम खाना खाने की जल्दी में कूदकर भागा। यह देखते ही रूद्र के पिता सबसे कहते हैं “डमडम चाहे जितना खा ले, उसकी भूख कभी नहीं मिटेगी। शायद ही उसने कभी खाने से मना किया होगा।” यह बोलते बोलते वह हंस पड़े।
अचानक से राघव को कुछ याद आया और वह वापस गाड़ी के पास चला गया, गाड़ी से एक वह बड़े कानों वाले एक छोटे से बर्फ की तरह सफेद खरगोश को निकालकर उसे घर के अंदर ले आया। उसने सभी को उससे मिलवाते हुए कहा “इसका नाम कुम्फू है, यह भी डमडम की तरह ही हमारे परिवार का हिस्सा है।” कुम्फू को देखते ही रूद्र उसके पास गया और उसे अपनी गोद में लेते हुए कहा “यह तो बहुत प्यारा है। तुमने इसके बारे में पहले क्यों नहीं बताया?” यह देखते ही डमडम खाना छोड़कर कुम्फू के पास आकर गुर्राने लगा। कुम्फू को डमडम के ताकतवर शरीर को देखकर डर लगता है, इसलिए वह वहां से इधर उधर छिपने के लिए भागने लगता है। डमडम को गुस्से में गुर्राता हुआ देख रूद्र उसे शांत कराने की कोशिश करता है। खाना खाने के बाद राघव और रुद्र कुम्फू को घर दिखाने के लिए अपने साथ लेकर जाते हैं, तभी डमडम घर से बाहर निकलकर आ गया। दिन बीत गया और शाम हो गई किंतु डमडम अभी तक घर के अंदर वापस नहीं आया। यह देखकर रूद्र उससे कहता है कि कुम्फू आज से उसका नया दोस्त है, वह भी जाकर कुम्फू से मिलें। पर शायद पशु होने के बावजूद डमडम यह समझ रहा था की रूद्र उनसे कह रहा की वह कुम्फू से मित्रता कर ले, तभी तो रूद्र की बात सुनकर वह गुस्सा होकर वहां से चला गया। अगले दिन रुद्र के पिता सुबह उठते हैं तो सब से पूछते हैं कि डमडम कहां है क्योंकि हर सुबह वह रूद्र के पिता को उठाने के लिए उनके पास आता था, किंतु आज नहीं आया। रूद्र डमडम को पूरे घर में ढूंढता है पर वह नहीं मिलता, फिर अचानक से रूद्र की नजर घर के मुख्य दरवाजे पर गई, वह खुला हुआ था, वह छत पर गया तो उसने देखा कि डमडम ठंड में सिकुड़ कर छत के कोने में बैठा है। रुद्र उसके पास जाकर उसे कंबल ओढ़ाता है और उसे घर के अंदर ले जाने की कोशिश करता है, लेकिन वह अपनी जगह से हिलने को तैयार ही नहीं था। घर के बाकी सदस्य भी डमडम को ढूंढते हुए छत पर आ गए। रुद्र की बुआ कहती हैं कि शायद डमडम नाराज है क्योंकि उसके रहते हुए उस घर में एक बड़ा खरगोश कुम्फू आ गया है। “बुआजी यदि यह घर के अंदर ही नहीं आएगा तो कुम्फू से दोस्ती कैसे करेगा?” रूद्र ने अपनी बुआ से पूछा। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि सब ठीक हो जाएगा। कुछ समय बाद रुद्र की मां खाने की प्लेट बजाती हैं “टन” “टन” “टन”, प्लेट की खड़खड़ाहट सुनते ही डमडम खाना खाने के लिए जाने लगा, तभी अचानक क्रोध भरी आंखों से कुम्फु को भी वहीं खाता देख रुक जाता है, मानो एक अंतर्द्वंद्व के कारण खुद से कह रहा हो “भुक्कड़, खाने के लिए तू अपनी हड़ताल तोड़ रहा है। तू बहुत लालची है।”
वह खाने की प्लेट के पास जाने की जगह वापस एक कोने में चला जाता है। डमडम को खाना ना खाते देख रूद्र के पिता बहुत चिंतित हो जाते हैं क्योंकि उसने पहले कभी ऐसा नहीं किया। इसलिए रूद्र के पिता स्वयं उसे खाना खिलाने जाते हैं, पर जैसे ही वह उसके के पास गए तभी डमडम वहां से हट जाता है।
यह देखकर सभी समझ जाते हैं कि डमडमनको कुम्फू का आना अच्छा नहीं लगा, वह उससे दोस्ती नहीं करना चाहता। कुछ समय बाद रूद्र की बुआ कहती हैं “आप सभी चिंता मत कीजिए, कल मैं रुद्र और राघव के साथ डमडम को गाड़ी से घुमाने के लिए ले जाऊंगी, इससे वह बहुत ज्यादा खुश हो जाएगा।” तभी अचानक से बाहर रूद्र का एक दोस्त डमडम के लिए कुछ खाने का लेकर आता है, और वह खा लेता है। डमडम पूरी रात घर के अंदर नही आया, वह घर के बाहर ही सोए। अगले दिन सुबह मौसम बहुत अच्छा था, खूब अच्छी धूप भी हुई थी और डमडम भी मौसम का आनंद उठा रहा था। तभी वहां एक बड़ा सा कुत्ता आ जाता है और उसे देखकर उस पर भौंकने लगता है। कुत्ते को देखते ही डमडम बहुत डर जाता है और भागने की कोशिश करता है, लेकिन वह खा खाकर इतना मोटा हो जाता है कि भाग ही नहीं पाता, तभी गली का वह कुत्ता सामने आकर खड़ा हो जाता है और डमडम को देखकर अपने दांत किटकिटाने लगता है। वह उसपर हमला करने की कोशिश करने ही वाला होता है कि यह सब देखकर कुम्फू इशारे से रुद्र के पिता को वहां लेकर आ गया और उन्होंने उस कुत्ते को डरा कर वहां से भगा दिया। डमडम यह देखकर बहुत हैरान हो जाता है, शायद वह सोच रहा होगा कि जिससे वह दोस्ती नहीं कर रहा था, जिसका घर पर आना उसे पसंद नहीं आया और जिसके कारण उसने हड़ताल की उसी कुम्फू ने उनकी जान बचाई। उसे अपनी गलती का एहसास हो गया और उसने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर कुम्फू से दोस्ती कर ली। अब डमडम और कुम्फू दोनों अच्छे दोस्त बन गए और एक दूसरे के पीछे भागने वाला खेल खेलने लगे। यह देखकर रुद्र की मां कहती हैं “चलो अच्छा है, अब यह दोनों दोस्त बन गए।”
