गौरी तिवारी
तुम वह मधुर गीत हो
मेरे अंतर्मन की भावनाओं की
तुम वह पहली मंज़िल हो
मेरे इस कठिन जीवन सफर की
तुम वह शब्दों से परे भाव हो
मेरे हर प्रिय काव्य की
तुम वह दिव्य हिम्मत हो
मेरे हर मुश्किल से लड़ने की
तुम वह जीवंत धड़कन हो
मेरे इस निर्जीव हृदय की
तुम वह अद्भुत कारण हो
मेरे जड़मय जीवन में चेतना की
मुझ में तुम हो, तुम में मैं हूं
तुम में ही सीमित मेरा जग सारा।
