ऑपरेशन सिंदूर के बाद 15% बढ़ा रक्षा का बजट

अनिल तिवारी

 

आम बजट सरकार द्वारा वर्ष भर किए जाने वाले आय-व्यय का लेखा-जोखा तो होता ही है भविष्य की रणनीति का संकेतक भी होता है। वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 15% वृद्धि के साथ हुए आवंटन से यह साफ संदेश मिलता है कि दो तरफा खतरों को देखते हुए सैन्य तैयारी और आधुनिकीकरण पर सरकार का फोकस आगे भी बना रहेगा। यह सीमाओं पर खासकर पाकिस्तान और चीन की ओर से खड़ी की जाने वाली नई चुनौतियों से निपटने की तैयारी को दिखाता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने नौ वें बजट में कोई लोक लुभावना वादे नहीं किए। यह जोखिम भरा परंतु सरकार के नजरिए से संतुलित बजट है। सरकार ने 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए समावेशी विकास पर जोर देना जारी रखा है। इसके लिए सुरक्षा पर खासा ध्यान दिया गया है और बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 7.85 लाख करोड रुपए आवंटित किए गए हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले रक्षा बजट में लगभग 15% की बढ़ोतरी हुई है। कैपिटल खर्च करीब 22% बड़ा है। कैपिटल खर्च का मतलब वह रकम जो सैन्य उपकरणों की खरीद, आधुनिकीकरण और इससे जुड़ी चीजों पर खर्च होती है। इस बार भी बजट का सबसे बड़ा हिस्सा रक्षा मंत्रालय को मिला है। रक्षा बजट सकल घरेलू उत्पाद का 1.99 प्रतिशत और कुल बजट का 14.67 प्रतिशत है। इस बार रक्षा का कुल बजट7.85 लाख करोड रुपए है जबकि पिछले साल यह 6.81 लाख करोड रुपए ही था। बजट में पेंशन के लिए 1.71 लाख करोड रुपए का प्रावधान है वही रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए 17250 करोड रुपए दिए गए हैं। तीनों सेनन के आधुनिकीकरण के लिए1.85 लाख करोड रुपए का प्रावधान किया गया है जो पिछले साल की तुलना में 24% अधिक है। बजट में हुई वृद्धि से हमारी सैन्य क्षमता और अधिक सशक्त होकर उभरेगी।
प्रधानमंत्री की अगुवाई में देश की तीनों सेनाओं को और अधिक सशक्त बनाने का काम पिछले कई सालों से निरंतर जारी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद विशेष रूप से स्वदेशी तकनीक से विकसित साजो सामान पर सरकार का जोर रहा है। हालांकि निजी उद्योगों को भी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के सहयोग से साइन उपकरणों के डिजाइन और विकास के लिए प्रोत्साहित किया गया है, और इसके सकारात्मक नतीजे भी देखने को मिले हैं। वर्तमान बजट इस पर ध्यान केंद्रित करता है और व्यापक परीक्षण व प्रमाण की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वदेशी स्वतंत्र निकाय की स्थापना आदि का भी प्रस्ताव करता है। हमारे रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जिओस्पेशियल सिस्टम और ड्रोन पर भी विशेष रूप से बोल दिये जाने की बात शामिल है।
रक्षा बजटके साथ-साथ देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की चौकसी को और मजबूत करने के लिए बजट में गृह मंत्रालय को भी 255233 करोड रुपए आवंटित किए गए हैं। यार रकम पिछले वर्ष की तुलना में 22023 करोड रुपए अधिक है। सरकार का मकसद आतंकी हमले पर रोक सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को रोकना और समय पर सटीक खुफिया जानकारी हासिल करना है।
गृह मंत्रालय के कुल बजट में से 173802 करोड रुपए पुलिस मद में दिए गए हैं इससे सीआरपीएफ बीएसएफ और आईटीबीपी जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को और अधिक मजबूत किया जाएगा।बजट में कहा गया है कि पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश और म्यांमार से लगती सीमाओं पर फेसिंग, एंटी ड्रोन सिस्टम और आधुनिक निगरानी उपकरण लगाए जाएंगे। नक्सलवाद खत्म करने में अहम भूमिका निभा रही सीआरपीएफ को 38517 करोड रुपए मिले हैं जबकि बीएसएफ को 29567 करोड रुपए दिए गए हैं।
बजट में गृह मंत्रालय का आवंटनबढ़ाकर देश की आंतरिक और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने पर अतिरिक्त जोड़ दिया गया है।घुसपैठ रोकने और ऑपरेशन सिंदूर के बाद संदिग्ध ड्रोन को गिराने के लिए बॉर्डर पर एंट्री ड्रोन सिस्टम लगाई जा रहे हैं जो मजबूत सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही उत्तर पूर्व के क्षेत्र के लिए भी बुनियादी ढांचे के विकास सड़कों और नए हवाई अड्डों के निर्माण पर ध्यान देने की बात कही गई है जो कि भारतीय रक्षा बलों को मजबूत करने में सहायक कदम साबित होगा। चीन के साथ गाहे-बगाहे हो रहीझारखंड को ध्यान में रखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी ढांचा और सुगम सड़कें समय की मांग है।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार भारत अमेरिका और चीन के बाद निरपेक्ष रूप से तीसरा सबसे बड़ा रक्षा सामग्री पर खर्च करने वाला देश है।फिर भी चीन और भारत के रक्षा खर्च में लगभग चार गुना का अंतर है।यदि भारत को चीन के विपरीत डटकर खड़ा होना है तो हमें भारतीय रक्षा पर और अधिक खर्च बढ़ाने की आवश्यकता है। रक्षा संबंधी स्थाई समिति ने भी अपनी सिफारिश में कहा था कि सशस्त्र बलों की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित करने के लिए रक्षा मंत्रालय को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का लगभग तीन प्रतिशत हिस्सा निश्चित रूप से आवंटित किया जाना चाहिए।
केंद्र की राजग सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। वर्ष 2017 में भारत का रक्षा बजट केवल 2.74 लाख करोड रुपए था। वित्त वर्ष 2026-27 में इसे लगभग तीन गुना बढ़ाया गया है। वर्षवार देखें तो वर्ष 2023-24 में रक्षा बजट 5.93 लाख करोड रुपए वर्ष 2024- 25 में 6.31 लाख करोड रुपए वर्ष 2025- 26 में 6.81 लाख करोड रुपए और अब वर्ष 2026- 27 के लिए 7.85 लाख करोड रुपए आवंटित किए गए हैं।
कुल मिलाकर रक्षा बजट के लिए और अधिक आवंटन की जरूरत है और आवंटन को बढ़ाने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के समग्र विस्तार की आवश्यकता है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के साथ ही देश 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य पर काम कर रहा है। भारत की कोशिश पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की है, ताकि देश शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सके। इसमें कोई दो राय नहीं कि तब भारत एशिया के साथ-साथ विश्व स्तर पर खुद को प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करने में पूर्णतया सक्षम होगा।

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