पर्यटन को मिलेगी मजबूती

डॉ दिनेश प्रसाद मिश्र

 

विभिन्न सांस्कृतिक धरोहरों से ओतप्रोत भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति विश्व में अद्वितीय है। विश्व के सात आश्चर्यों में से एक ताजमहल भारत में ही है तो सर्दियों की सतरंगी संस्कृति की विभिन्न कलाकृतियों से सुसज्जित भारत के अध्यात्मिक दर्शन को इंगित करने वाले काशी, अयोध्या, मथुरा आदि मंदिरों की श्रृंखलाएं भी भारत की समृद्ध एवं ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं। हिमालय की पर्वतमालाओं के मध्य बसे राज्यों के इलाके बेहद समृद्ध पर्यावरणीय दृश्य में समाहित हैं तो समुद्र तटीय प्राकृतिक धरोहरों के स्थल भी अत्यंत रमणीय हैं।हर वर्ष लाखों की संख्या में देसी विदेशी पर्यटक विभिन्न ऋतु के मौसम जलवायु भौगोलिक क्षेत्र और ऐतिहासिक धरोहरों को देखने के लिए अतुल्य भारत के इन स्थलों का भ्रमण करते हैं। भारत में पर्यटन उद्योग का स्वरूप लगातार बढ़ रहा है। यूनेस्को द्वारा भारत के 36 सांस्कृतिक साथ प्राकृतिक और एक मिश्रित कुल मिलाकर 44 स्थलों को अब तक विश्व धरोहरों की सूची में शामिल किया गया है। आम बजट 2026-27 पेश करते हुएवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पुरातात्विक महत्व की 15 साइट्स को कल्चरल टूरिज्म डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित करने का ऐलान किया है।इसके साथ ही सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के स्थान समेत सभी अहम जगहों के बारे में जानकारी को डिजिटल स्वरूप देने के लिए “राष्ट्रीय गंतव्य डिजिटल ज्ञान ग्रिड” बनाने का भी प्रस्ताव रखा है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने पर्यावरण वन और जलवायु मंत्रालय के बजट में इस वर्ष 10.15% की बढ़ोतरी की घोषणा की है।वित्त वर्ष 2026 27 के लिए मंत्रालय का बजट पिछले साल के बजट के मुकाबले 346.64 करोड रुपए बढ़ाया गया है। पिछले वित्त वर्ष के लिए पर्यावरण मंत्रालय को 3412.82 करोड रुपए था जो इस साल बढ़कर 3759.46 करोड रुपए कर दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए भी बजट में वृद्धि करते हुए इसे 1307 करोड रुपए दिया गया है।
बजट में पुरातात्विक महत्व की जगहों को कल्चरल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में परिस्थितिकीय तौर पर टिकाऊ पर्वतीय मार्गों को विकसित करने और एक राष्ट्रीय अतिथि सत्कार संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हॉस्पिटैलिटी) बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। प्रस्ताव के मुताबिक आने वाले दिनों में लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, हस्तिनापुर, आदिचनल्लूर, सारनाथ, लेह पैलेस समेत पुरातात्विक महत्व के 15 स्थल कल्चरल टूरिज्म डेस्टिनेशन बनेंगे।
बजट 2026 27 में वित्त मंत्री ने सभी सेक्टर में विकास और योजनाओं को मूर्त रेप देने का प्रावधानकिया तो पर्यटन क्षेत्र को भी देश की समग्र अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले प्रमुख क्षेत्र में से एक के रूप में रेखांकित किया है।पर्यटन के क्षेत्र में नौकरियां और उद्यमिता के बड़े अवसर हैं और कई राज्यों की तो पर्यटन के क्षेत्र में बहुत अधिक भागीदारी भी है। यही कारण है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार बजट आवंटन बढ़ाया जाता रहा है। अगर पिछले 3 सालों का आंकड़ा देखें तो 2024 25 में इस क्षेत्र को 2219.7 करोड रुपए मिले थे जबकि अगले वर्ष 202526 में इसे बढ़ाकर 3412.82 करोड रुपए कर दिया गया था। इस बार इसमें 346.64 करोड़ की वृद्धि करते हुएकल 3759.46 करोड रुपए के आवंटन का प्रावधान किया गया है।
ज्ञात हो कि वर्ष 2014 में केंद्र में राजग की सरकार बनने के बाद तीर्थ यात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्धन ड्राईव लॉन्च कर पर्यटन मंत्रालय ने 2014-15 में ही प्रसाद स्कीम शुरू की थी। घरेलू पर्यटन का विकास काफी हद तक तीर्थ पर्यटन पर निर्भर है। इसीलिए बजट आवंटन में सभी धर्म के तीर्थ स्थलों के समग्र विकास को गंभीरता से लिया गया है। सरकार पूर्वोत्तर राज्यों में पहले से ही पर्यटन विकास के लिए विशेष पैकेज लाती रही है इस बजट में भीइसे आगे बढ़ने का प्रस्ताव किया गया है जो पूर्वोत्तर राज्यों की आधारभूत संरचना को मजबूत करेगा।इसके तहत पर्यटन के सभी पहलुओं को दृष्टिगत करते हुए एक जिला एक उत्पाद योजना की उत्पादों हस्तशिल्प और राज्यों के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्यों की राजधानी में यूनिटी मॉल की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाता रहा है।
वेस्टलैंड बेहतरीन पारिस्थितिकी तंत्र के दो तक हैं जो जैव विविधता को बढ़ाते हैं बजट में स्थिति की तंत्र और पर्यावरण को दुरुस्त करने की पहल भी प्रशंसनीय है। बुनियादी ढांचे पर विकास के लिए पर्याप्त रस का आवंटन हुआ है इसमें विशेष रूप से रेलवे को अब तक का सर्वाधिक 2 लाख 78000 करोड रुपए दिए गए हैं। इस बजट में रेलवे की बड़ी घोषणा अहमदाबाद मुंबई बुलेट ट्रेन हाई स्पीड कॉरिडोर की तरह अन्य साथ हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने की की गई है। इसमें से एक हाई स्पीड कॉरिडोर दिल्ली से प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र बनारस को भी कनेक्ट करेगा। इस कॉरिडोर के बनने के बाद दिल्ली से बनारस के बीच का सफर का समय घटकर मात्र 3 घंटे 50 मिनट का हो जाएगा। इससे काशी जाने वाले लोगों को सुविधा और सहूलियत बढ़ेगी। यात्रियों के सुरक्षा के लिए भी ध्यान रखा गया है। रेलवे के बजट में सुरक्षा के लिए 1लाख 20 हजार करोड रुपए आवंटित किए गए हैं जिसमें कवच लगाना अहम हैं।इसके साथ ही पुराने रेलवे ट्रैक की जगह नए ट्रैक बिछाना सिग्नल सिस्टम को और अधिक आधुनिक और एडवांस बनाने की भी बात कही गई है। इन सब गतिविधियों से देश के पर्यटन को मजबूती मिलेगी।
विकास के दृष्टिकोण से भी पर्यटन का क्षेत्र काफी उर्वर है। इस क्षेत्र में रोजगार की भी अपार संभावनाएं हैं जिनके लिए और भी अच्छे काम किए जाने की आवश्यकता है। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े होटल इंडस्ट्रीज को भी बजट से काफी उम्मीदें थी हालांकि उन्हें कोई बड़ी राहत नहीं मिली है लेकिन सरकार ने जीएसटी की दरों को तर्कसंगत बनाकर उन्हें पहले ही रत दिया है। देश में पर्यटन बोर्ड बनाने की काफी दिनों से मांग चल रही है। पर्यटन इकाइयों को चलाने के लिए विभिन्न तरह के अनुज्ञा शुल्कों में कमी और छूट की मांग भी उठाई जाती रही है।पिछले बजट में दी गई छूट बड़े होटलों तक सिमट कर रह गई थी। उसका लाभ छोटे होटलों को नहीं मिल सका था। उम्मीद थी कि इस बजट में छोटे होटलों को भी फायदा पहुंचेगा।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि पर्यटन के मामलों में विभिन्न एनओसी और क्लीयरेंस के लिए अगर सिंगल विंडो सिस्टम लागू होता तो यह उपलब्धि होती। वीजा से लेकर यात्रा ठहरने और घूमने आज के क्लेरेंस एक साथ मिल जाए तो पर्यटन को और गति मिल सकती है। विश्व पटेल पर देखें तो कई देशों में पर्यटन का उनके सकल घरेलू उत्पाद में बड़ा योगदान है।फ्रांस, स्पेन, अमेरिका, इटली, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, चीन, जापान नेपाल, म्यामार जैसे देश पर्यटन उद्योग के रूप में स्थापित हैं।इसमें कोई दो राय नहीं कि अन्य उद्योगों की तुलना में पर्यटन क्षेत्र में कम विनियोग से ज्यादा रोजगार सृजन होता है। विदेशी मुद्रा की आमदनी के साथ-साथ श्रम को बेहतर रोजगार मिलता है। कई देशों ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ईवीजा के साथ बीजा आनअराइवल की सुविधा दी हुई है। भारत में ई वीजा की शुरुआत हो चुकी है लेकिन अभी कुछ देशों को ही ईवीजा अराइवल की सुविधा है। सैलानियों को आकर्षित करने के लिए ऐसी सुविधाएं दी जानी चाहिए।
पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र का विश्व पर्यटन संगठन सदस्य देशों को उत्साहित करता है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित होने पर विदेशी पर्यटकों का आकर्षण बढ़ता है। बजट में लोथल धोलावीरा राखीगढ़ी हस्तिनापुर सारनाथ जैसे प्राचीन और पुरातात्विक महत्व के स्थान को विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई गई है। इससे पर्यटन को गति मिलेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होंगे।

Read Previous

अद्भुत, अलौकिक, अद्वितीय द्वारका

Read Next

अच्छे दिन आयेंगे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular