पिछले 20 वर्षों से लगातार प्रकाशित हो रही ‘कलरव’ पत्रिका ने यह साबित कर दिया है कि लघु पत्रिकाओं का भविष्य स्वर्णिम और उज्ज्वल है। डिजिटल क्रांति और सोशल मीडिया के इस दौर में भले ही बड़े-बड़े मुख्यधारा की पत्रिकाएं और समाचार पत्र संकट से जूझ रहे हों, लेकिन शब्दों और विचारों से समृद्ध कलरव जैसी लघु पत्रिकाएं अपनी खास विशेषताओं के कारण आज भी प्रासंगिक हैं और भविष्य में भी बनी रहेंगी।
उक्त बातें देश के नामचीन कवि वरिष्ठ साहित्यकार प्रो अशोक चक्रधर ने कही। मौका था कलरव हिंदी मासिक पत्रिका के 20 वर्ष पूरे होने पर दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित समारोह का।
इस अवसर पर आयोजित प्रिंट का कालजयी स्वरूप विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो चक्रधर ने अपने वक्तव्य में पंचम वेद यानी भरतमुनि के नाट्यशास्त्र की बात करते हुए भाषा, साहित्य और मुद्रित शब्द की शक्ति पर विचार रखा तथा प्रिंट के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने अपने विशिष्ट विनोदपूर्ण और सहज वक्तव्य-शैली में यह स्पष्ट किया कि मुद्रित शब्द केवल सूचना का वाहक नहीं होता, बल्कि वह विचार को स्थायित्व प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें डिजिटल माध्यमों को अपना शत्रु नहीं समझना चाहिए, बल्कि प्रिंट और डिजिटल दोनों ने मिश्रित सहयोग से ही प्रिंट का स्वरूप कालजयी बनेगा।
कार्यक्रम में विशिष्टअतिथि के रूप में वैश्विक हिंदी परिवार के संरक्षक, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के अधीन केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष रहे श्री अनिल शर्मा जोशी, लंबे समय से आर्थिक पत्रकारिता से जुड़े चर्चित व्यंग्यकार प्रो. आलोक पुराणिक , भारतीय इतिहास, पुरातत्त्व और संस्कृति के प्रतिष्ठित अध्येता एवं शिक्षाविद् प्रो. ईश्वरशरण विश्वकर्मा , आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ प्रो अश्विनी महाजन, वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी ने हिस्सा लिया।
दीप प्रज्वलन से शुभारंभ हुए कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र तिवारी और दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा गौरी तिवारी ने किया। गौरी ने राष्ट्रीय संगोष्ठी में उपस्थित आदरणीय जनों का स्वागत किया तथा प्रिंट की प्रासंगिकता और महत्व पर बात करते हुए संगोष्ठी की पृष्ठभूमि रखी।
सम्मानित अतिथियों का पुष्प गुच्छ,अंग वस्त्रम तथा स्मृति चिन्ह से औपचारिक स्वागत के बाद कलरव पत्रिका के संपादक श्री अनिल तिवारी जी ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कलरव की 20 वर्षों की यात्रा पर बात की।
कलरव पत्रिका के प्रबंध संपादक विक्रम उपाध्याय ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि कलरव की यात्रा सिर्फ एक पत्रिका के प्रकाशन की यात्रा नहीं अपितु मुद्रित माध्यम से विचार और विमर्श को निरंतर जन-जन तक ले जाने का आंदोलन है। उन्होंने बदलते संचार के माध्यमों के बीच प्रिंट की बरकरार विशिष्ट पहचान और महत्व पर विस्तार से बात की।
देश के वरिष्ठ पत्रकार तथा कलरव के सहयोगी श्री अरविंद सिंह ने जगदीश गुप्त की कविता “सच हम नहीं, सच तुम नहीं, सच है सतत संघर्ष ही। संघर्ष से हटकर जिये तो, क्या जिये हम या कि तुम।” को उद्धृत करते हुए कहा कि बीते वर्षों में कई छोटी-बड़ी बाधाओं के बावजूद कलरव पत्रिका की निरंतरता पत्रिका के संघर्ष और समर्पण का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब बड़े-बड़े अखबार और पत्रिकाएं बंद हो रही हैं कलरव का नियमित प्रकाशन कलरव कुटुंब की जिजीविषा की मिसाल है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जिस समर्पण के साथ कलरव ने बीते वर्षों में संघर्ष किया है आने वाले दिनों में जन-जन को वैचारिक खुराक पहचाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।”
वैश्विक हिंदी परिवार के संरक्षक अनिल शर्मा जोशी ने पत्रिका के निरंतर प्रकाशन पर कलरव कुटुंब को बधाई दी तथा कहा कि सीमित संसाधनों के साथ पत्रिका का वजूद बनाए रखना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि आजकल सोशल मीडिया पर जिस तरह से सूचनाओं की बाढ़ आई है उससे लोगों का भरोसा कम हो रहा है। लोगों का भरोसा आज भी प्रिंट पर ही है। श्री जोशी ने 60 -70 के दशक में चले लघु पत्रिका आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी जरूरत पड़ी है छोटी पत्रिकाओं ने आगे बढ़कर समाज में सार्थक विमर्श खड़ा करने का काम किया है।
प्रो. आलोक पुराणिक ने समकालीन अर्थव्यवस्था, बाजार और बदलते संचार माध्यमों के संदर्भ में प्रिंट की भूमिका पर विचार किया। उन्होंने वर्तमान समय को बाजार की शक्तियों से प्रभावित समय के रूप में देखते हुए इस बात पर चर्चा की कि बदलती आर्थिक परिस्थितियाँ मीडिया और पाठकीय संस्कृति को किस प्रकार प्रभावित कर रही हैं। इतिहासविद और शिक्षाविद् प्रो ईश्वर शरण विश्वकर्मा जी ने भी अपने प्रभावशाली वक्तव्य से आयोजन को विशेष अर्थ प्रदान किया।
इस दौरान कलरव पत्रिका के विशेषांक तथा कलरव प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक (ज्योतिष: जीवन पथ का विज्ञान, लेखक- ज्योतिषाचार्य अरुण कुमार मिश्रा तथा भारतीय नारी, लेखक डॉ चंद्रभान शर्मा) का लोकार्पण हुआ।
इस मौके पर कलरव के उन सहयोगियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने वर्षों से कलरव को योगदान दिया है। कलरव के नन्हें सहयोगी नांदिक ने भारत के संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया जबकि कुंज ने पुष्प की अभिलाषा कविता के माध्यम से देशभक्ति की सीख भी दी।
अंत में कलरव टीम के संस्थापक वरिष्ठ पत्रकार राम शिरोमणि शुक्ल ने कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों तथा सहभागियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। सुश्री शिवानी की सुमधुर आवाज़ में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


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