दिन-दिन बीतते हफ्ता बन गया, हफ्ता बन गया माह।
गुजर गए बारह महीने, हो गया एक साल।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
चिंता गुजरी आशा गुजरी, गुजर गया तेरा प्यार।
गुजरे तेरे सुखभावों को, मां कैसे रखूं संभाल।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
फोन की घंटी बजते ही, मां लेती थी उठाय।
सांस धौंकनी सी चलती थी, फिर भी लेती थी बतियाय।
आशीषों की झड़ी लगाती, रहो सदा खुशहाल।
मां को गुजरे हो गए एक साल।।
आगे कहती दीदी का भी, फोन आया था आज।
भैया का न मिला समाचार, क्या हुई थी तुमसे बात।
सुनो अभी भैया से बतियाकर, हमको भी बतलाना हाल ।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
सबका सोचती, सबको पूछती, रखती सबको याद।
कौन कहां है? करता क्या है? कब आएगा मेरे पास ?
घर पर सब कैसे हैं तेरे, सब ठीक है ना तेरे ससुराल।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
सब की उलझन सुलझाती, सबको थी बताती उपाय।
बांधे रखती सबको सभी से, रिश्तों की थी फूलदान।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
कैसी हो मां, पूछने पर कहती, मैं तो बिल्कुल ठीक हूं।
बायां हाथ नहीं उठता है, पैरों से थोड़ी दीक हूं।
सारे कष्ट बता कर कहती, चिंता मत करना, मैं नीक हूं।
तेरा यही जीवटपन मां, कभी गिरने ना दिया स्वाभिमान।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
घर आने की खबर सुनकर, बैठ जाती थी बाहर।
आई नहीं अभी तक सबसे, पूछती रहती रह-रहकर।
आते ही कहने लगती थी, जाओ जल्दी कर लो जलपान।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
याद आते हैं बचपन के वह दिन, कैसे दिन भर खटती थी।
काम चाहे कितना हो मुश्किल, पीछे कभी ना हटती थी।
मर्दों वाले काम भी मां कर देती थी बिन घबराय।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
कुटिया- पिसीया चौका- चूल्हा, राशन-पानी हाट- बाजार।
अंगना-दुअरा साफ-सफाई, आवे जब परब-त्यौहार।
बिन अलसाए, बिन झुझलाए करती रही वह सालों साल।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
सत्तू पिसते फूटहा बीनते , खुदी दरते दाल।
बरसातों में होरहा का, बनाती थी भूजा झाल।
बचे खुचे अनाजों से भी बढ़िया बनाती थी पकवान।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
बड़े भाई को सूखी सब्जी, छोटे को रसदार ।
बाबा की होती फीकी सब्जी, औरों की मसालेदार।
सबके पसंद की रसोई बनाती रखती सबका ख्याल।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
सास-बहू, देवरानी-जेठानी, का ना रखती भान।
अपने को न बड़ा समझती, ना अपने करने का अभिमान।
सबको खुश रखने की खातिर खुद हो जाती थी बेहाल।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
बड़ी बुआ के मान से डरती, छोटी बुआ के गुस्से से।
रिश्ते नाते सबसे निभाती, दे-दे कर अपने हिस्से से।
मां तूने हर रिश्ते को, आखिर तक रखा संभाल।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
हमने तुमको देखा है मां, गैरों को भी खिलाते हुए।
ईयाजी हो या चाचीजी, सिर में तेल मिलाते हुए।
टोले मोहल्ले के देवर ननदों से भी रखती प्रेम व्यवहार।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
पिताजी थे संत सरीखे, कहते हैं सब लोग।
हमने भी देखा था उनको, ना लालच ना लोभ।
वेतन मिलता सब भेज देते, तुमको था चलाना परिवार।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
राशन पानी दूध दवाई उसी में था गोइंठा काठी।
हम बच्चों की फीस उसी में, उसी में थी किताब और कॉपी।
उंगली पर मां खर्च जोड़ती कैसे निकलेगा यह माह।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
सब्जी ना होती थी घर में, कैसा जुगाड़ लगाती थी।
नेनुआ कोहड़ा के पत्तों का, चटक साग बनाती थी।
संसाधन की कमी थी फिर भी खुश रहती थी वह हर हाल।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
कपड़े लत्ते साज श्रृंगार की थी मां शौकीन।
साबुन तेल और क्रीम पाउडर लगाती थी हर दिन।
अंत समय तक करती रही मां अपने तन की देखभाल।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
मिर्ची से दोस्ती थी मां की, चाहे हरी हो या हो लाल।
बनी हुई सब्जी और दाल में, लेती थी ऊपर से डाल।
मां की थाली का स्वाद अलग था, हम सब खाते मां के साथ।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
मां अक्सर पीड़ा में रहती, पांव से लाचार।
फिर भी ना लेना चाहती, किसी का कोई उपकार।
कुर्सी पर बैठे-बैठे ही कर लेती अपना सब काम।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
मां अपने बच्चों से ज्यादा, अपने बच्चों के बच्चों को मानती थी।
माई माई करते थे सब, माई ना कभी भूलाती थी।
तेरे जाने से मां हम सब हुए अनाथ।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
मां तेरे जाने का दुख बहुत है, कैसे व्यक्त करें एहसास।
खाली-खाली जीवन लगता, मन रहता है सदा उदास।
अक्सर मन में भाव उठता, फोन लगाकर पूछूं मां का हाल।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
लेकिन दूसरे पहलू से सोचूं तो, मिलती सत्य की राहत है।
मां तूने कभी तिरस्कार न झेला, अंत तक बनी रही तेरी चाहत है।
मां तू बड़़भागी थी, तेरी ममता पर कभी ना उठा सवाल।
मां को गुजरे हुए एक साल।।
मां की प्रथम पुण्यतिथि पर, मां को अश्रुपूरित प्रणाम।
यादों में तू बसी रहो मां, दिन- दुपहरिया, सुबहो-शाम ।
तेरे आशीर्वादों से मां, हम बच्चे रहे खुशहाल।
मां को गुजरे, हुए एक साल।।।।


2 Comments
🙏🏻🙏🏻❤️❤️
बहुत ही पीडादायक हैं आपकी यादें
आज गंगा जी मे डुबकी लगाने से पहले चर्चा हुई थी
सादर नमन