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साहित्य
धूमिल हुए सपने

धूमिल हुए सपने

गौरी तिवारी   कभी-कभी बरसात प्रेम, शांति तथा सकारात्मकता की जगह काले बादलों की नकारात्मकता और उदासी लेकर आती है। उस दिन भी शाम का समय था, सूरज अस्त होने की ओर बढ़ चला था।

विचार
प्रिंट ने दी गद्य को शक्ति

प्रिंट ने दी गद्य को शक्ति

गौरी तिवारी   भाषा को बोलचाल के दायरे से बाहर निकालकर स्थायित्व देने, ज्ञान को संचित करने और उसे जन-जन तक पहुँचाने का श्रेय मुद्रण कला (प्रिंट) को जाता है।भारत जैसे बहुभाषी देश में, जहाँ

काव्य कोना
चेतना

चेतना

गौरी तिवारी   यदि दूसरों के कष्ट को अपना समझना तानाशाही और लोकतंत्र के मध्य अंतर समझना बिना बोले लाठी और पैलेटगन की मार झेलना सत्य के पथ पर अडिग अविचल रहना कहलाया जाए बड़ी

काव्य कोना
हे कृष्ण एक बार फिर लौटो

हे कृष्ण एक बार फिर लौटो

गौरी तिवारी   दीन, दुःखी, निर्बलों, विकलों की आस, गोकुल के ग्वाले, तुम कहाँ हो? अधरों पर रखकर मौन मुरली, मुरलीधर क्यों आज खड़े तुम मौन उदास हो? धरती के झंझावातों से थककर क्या तुम

विचार
गुरु : एक मार्गदर्शक

गुरु : एक मार्गदर्शक

गौरी तिवारी   गुरु वह मार्गदर्शक होते हैं, जो अंधकार से प्रकाश की ओर, मोह से मोक्ष की ओर और अज्ञान से आत्मबोध की ओर लेकर जाते हैं। वह सिर्फ किताबी ज्ञान देने वाले व्यक्ति

विचार
शिक्षक दिवस पर विशेष

शिक्षक दिवस पर विशेष

बाजार ने बदल दिया गुरुओं का स्वरूप अनिल तिवारी   गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि गढ़ि काढ़े खोट। अंदर हाथ सहार दे, बाहर-बाहर चोट। आज शिक्षक दिवस है। हमारे देश में हर साल 5

धर्म-कर्म
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष

कृष्ण एक ऐसे भगवान हैं, जिन्होंने जीवन को स्वीकार किया। कृष्ण को किसी एक परिभाषा में नहीं बाँध सकते। संसार में अनेक महापुरुष हुए, अवतार हुए पर कृष्ण जैसा कोई नहीं हुआ। कृष्ण सब कुछ

धर्म-कर्म
बलदाऊ से पुत्र की दीर्घायु मांगती माताएं

बलदाऊ से पुत्र की दीर्घायु मांगती माताएं

पं. आर.एस. द्विवेदी   पौराणिक मान्यता है कि भादों के कृष्णपक्ष की अष्टमी को भगवान कृष्ण प्रकट हुए थे। इससे दो दिन पहले ही उनके बड़े भाई बलदाऊ अर्थात् बलरामजी का जन्म हुआ था। उनके

विश्लेषण
उत्तराखण्ड में 279 ग्लैशियर बने खतरा

उत्तराखण्ड में 279 ग्लैशियर बने खतरा

अशोक त्रिपाठी   नेपाल में तिब्बत से आई महाविनाशकारी बाढ़ की विभीषिका का सही आकलन अब तक नहीं हो पाया है लेकिन प्रकृति के साथ हमने जो छेड़छाड़ की है, उसका नतीजा बहुत गंभीर नजर