गौरी तिवारी
यदि दूसरों के कष्ट को अपना समझना
तानाशाही और लोकतंत्र के मध्य अंतर समझना
बिना बोले लाठी और पैलेटगन की मार झेलना
सत्य के पथ पर अडिग अविचल रहना
कहलाया जाए बड़ी निर्ममता से दहशतगर्दी तो
कहीं भली है यह दहशतगर्दी जिंदा लाश बने रहने से
यदि गरीब और निर्बल होने के कारण
व्यवस्था द्वारा बार-बार अनसुना कर दिया जाना
न्याय की गुहार लगाने पर पुलिस की फटकार पाना
अपने ही अधिकारों के लिए दर-दर भटकना
रोटी, शिक्षा और पानी जैसी
बुनियादी आवश्यकताओं को भी फरमाइश कह दिया जाना
ठहरा दिया जाए बड़ी धृष्टता से दिमागी नक्सलवाद
तो कहीं भला है यह दिमागी नक्सल्पन
अन्याय को देखकर भी सोये हुए अचेतन मन से
भला है यह प्रतिशोध अधिकारों के छिन जाने पर भी व्याप्त उस मौन से
यदि तुम्हारी क्रांति के गर्जन से सत्ता की कुर्सी हिल जाए
तुम्हारे एक प्रश्न से सत्ताधारी घबरा जाए
निर्बलों के एकजुट होने के विचार से
अहंकारी अजेय शासक भयभीत हो जाए
और तुम्हें ठहरा दिया जाए समाज में व्याप्त अराजक तत्व
घोषित कर दिया जाए तुम्हे आतंकी
तब भी तुम प्रश्न करते रहना
तब भी तुम विद्रोह करते रहना।
