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Author: KALRAV

KALRAV

विचार
जुर्म जिसकी माफी नहीं

जुर्म जिसकी माफी नहीं

गौरी तिवारी अक्सर हमारे साथ ऐसी घटनाएं घटित होती हैं जिनका महत्व एक सागर में मोती के समान होता है लेकिन फिर भी दिन के 24 घंटों में घटित 5 से 10 मिनट की घटना

विचार
बड़े बेआबरू होकर बिहार से निकले नीतीश कुमार

बड़े बेआबरू होकर बिहार से निकले नीतीश कुमार

अनिल तिवारी -------- नीतीश कुमार के क्रमिक राजनीतिक उत्थान और तेज़ गिरावट को समझाना इतना आसान नहीं है। कुछ वर्ष पहले तक नीतीश को प्रधानमंत्री पद के योग्य “पीएम मैटेरियल” के रूप में देखा जा

साहित्य
पितृ-प्रेम (लघुकथा)

पितृ-प्रेम (लघुकथा)

गौरी तिवारी चंदनिया छुप जाना रे, क्षण भर को लुक जाना रे निंदिया आँखों में आए, बिटिया मेरी सो जाए ले के गोद में सुलाऊँ, गाऊँ रात भर सुनाऊँ मैं लोरी-लोरी, हो, मैं लोरी-लोरी लोरी

साहित्य
स्वतंत्रता संग्राम (कविता)

स्वतंत्रता संग्राम (कविता)

गौरी तिवारी यह कथा है हिंदुस्तान की स्वाधीनता संग्राम की शहीदों का लहू है मिट्टी में यहां की ये गाथा है वीरों वीरांगनाओं की   जहां राज्य हथियाने डलहौजी ने षड्यंत्र रचाया था वह मंगल

Uncategorized
हानि-लाभ से आगे बढ़ मेल- मिलाप का त्यौहार है ‘होली’

हानि-लाभ से आगे बढ़ मेल- मिलाप का त्यौहार है ‘होली’

अनिल तिवारी ------- प्रसिद्ध चिंतक आइजनहावर ने अपने दिल की इच्छा व्यक्त की थी 'हमारी यह दुनिया भय और घृणा का भयानक समुदाय बनने से बचे और यहां विश्वास, सम्मान और सह अस्तित्व कायम हो'

साहित्य
मैं सोच रहा हूं अगर तीसरा युद्ध हुआ तो (कविता)

मैं सोच रहा हूं अगर तीसरा युद्ध हुआ तो (कविता)

गोपालदास नीरज  अमर उजाला (काव्य डेस्क) मैं सोच रहा हूँ अगर तीसरा युद्ध हुआ तो, इस नई सुबह की नई फसल का क्या होगा। मैं सोच रहा हूँ गर जमीं पर उगा खून, इस रंग

देश-दुनिया
शांति वार्ता की नौटंकी के बीच युद्ध की दुंदुभी से पश्चिम एशिया  हलकान

शांति वार्ता की नौटंकी के बीच युद्ध की दुंदुभी से पश्चिम एशिया हलकान

युद्ध के लंबा खींचने के आसार ------ अनिल तिवारी ----- ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए ओमान की मध्यस्थता में शांति वार्ता चल रही थी। इसराइल के साथ साझेदारी को मजबूत करने

साहित्य
ऐसा क्यों होता है

ऐसा क्यों होता है

कविता (गौरी तिवारी)   ऐसा क्यों होता है हर सपना पूरा होने से पहले ही टूट कर बिखर जाता है   ऐसा क्यों होता है हर सच वास्तविक होने से पहले ही एक दिन सबसे

साहित्य
नैक का चक्कर (कहानी)

नैक का चक्कर (कहानी)

डॉ॰ अनिल कुमार सिंह प्राध्यापक,हिंदी विभाग आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय, दिल्ली विश्विद्यालय     रोहतक से जींद वाली सड़क पर गोहाना से लगभग दो-तीन किलोमीटर आगे बाई ओर एक पतली सी सड़क निकलती है। यह

साहित्य
दिनकर : मुक्ति का लोक गायक

दिनकर : मुक्ति का लोक गायक

पिछली सदी बड़ी प्रतिभाओं के जन्म और कर्म की सदी थी, यह उनकी जयंतियों, पिंडदानों एवं कर्मकांडों की सदी है। वह गदरचियों के प्रतिकार का दौर था, यह विदोरचियों के प्रचार का दौर है, वह