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Author: KALRAV

KALRAV

साहित्य
पर्यावरण (कविता)

पर्यावरण (कविता)

गौरी तिवारी ममता के दामन में धरा ने हमें समाया है पेड़ पौधों और जल के सागर से हमारा ये जीवन सजाया है। ये ऋण है हमारी धरा का जो हमे चुकाना है स्वच्छ,शीतल वायु

साहित्य
अनुशासन

अनुशासन

गौरी तिवारी सुबह आठ बजे आरव भारी बस्ता पीठ पर लटकाए विद्यालय जाने के लिए बस पकड़ने जा रहा था। उसकी चाल में किसी 10 वर्ष के बालक जैसी स्फूर्ति नहीं, अपितु किसी वृद्ध मजदूर

देश-दुनिया
सुधरे नहीं, टूटते ही चले गए….

सुधरे नहीं, टूटते ही चले गए….

समाजवाद के 92 बरस  अनिल तिवारी ----------- देश भर में समाजवादी प्रधानमंत्री रहे चंद्रशेखर जी का जन्म शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। इस उपलक्ष में देश के कोने कोने में आए दिन कोई ना

विचार
नाम : आजाद, पिताः स्वाधीनता, माता : भारत माता

नाम : आजाद, पिताः स्वाधीनता, माता : भारत माता

अनिल तिवारी सन् 1919 में जनरल डायर ने अमृतसर (पंजाब) के जलियांवाला बाग में कहर ढाया और निहत्थे लोगों को गोलियों से भून डाला। 13 वर्ष की अवस्था में चन्द्रशेखर को पूरी तरह झकझोर कर

देश-दुनिया
अच्छे दिन का तो पता नहीं पर महंगे दिन आ गए

अच्छे दिन का तो पता नहीं पर महंगे दिन आ गए

अनिल तिवारी  महंगाई अपना पैर पसारने लगी है। खुदरा और थोक दोनों स्तर पर महंगाई रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर जा रही है। थोक महंगाई 3.8 से उठकर अब 8.6 का आंकड़ा छू चुकी है। जैसे-तैसे

ज्ञान-विज्ञान
हमारी पृथ्वी पर जीवन कैसे आया? सुलझती गुत्थी

हमारी पृथ्वी पर जीवन कैसे आया? सुलझती गुत्थी

निर्मल कुमार शर्मा ‌हमारी पृथ्वी पर जीवन कैसे आया? 'यह बहुत ही गूढ़ प्रश्न है और उसका उत्तर पाना उतना ही जटिल भी है। प्रश्न है कि क्या पृथ्वी पर जीवन के लिए जरूरी तत्व

साहित्य
एक कली (कविता)

एक कली (कविता)

गौरी तिवारी एक कली थी जन्मी फाल्गुन में मुख पर तेज, अधरों पर मुस्कान लिए, दुखों की थी घोर घटा, उन कष्टों में, आई सम्पन्नता, घर में खुशियाँ जहान ‎लिए। पर घर की चौखट ने

विचार
धर्म से गिरे, विज्ञान में अटके

धर्म से गिरे, विज्ञान में अटके

अनिल तिवारी धर्म। एक शब्द है, पर मामूली मत समझिएगा इस शब्द को। इस शब्द ने सदियों से मनुष्य के जीवन को दिशा दी है और उसकी गतिविधिओं को नियंत्रित किया है। इस शब्द की

साहित्य
मायाजाल  (कहानी)

मायाजाल (कहानी)

गौरी तिवारी अचानक दोपहर में लाउडस्पीकर के शोर के कारण घर की खिड़कियों में कम्पन होने लगा, मानो भूकंप आया हो और खिड़कियां आपस में ज़ोर-जोर से टकराने लगी। तभी सीमा बालकनी में जाकर जाकर

धर्म-कर्म
धर्मचारिणी, तपोधना शबरी

धर्मचारिणी, तपोधना शबरी

 डा. जयशंकर शेरपुरवासी शबरी का जन्म भीलों की उपजाति शाबर समुदाय में श्रीराम से बहुत पहले हुआ था। इनका असली और मूल नाम श्रमणा था। शाबर समुदाय में उत्पन्न होने के कारण इनको शबरी के