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Author: KALRAV

KALRAV

काव्य कोना
कुर्सी की राजनीति

कुर्सी की राजनीति

गौरी तिवारी   कुर्सी के लोभ में राजनीति अक्सर व्यापार बन जाती है स्वार्थ की विषैली धारा लोकतंत्र के निर्झर में घुल जाती है सेवा की पावन चौखट पर सत्ता का व्यापार सजा, जनविश्वासों के

विश्लेषण
इंदिरा गांधी का 1975 का आपातकालः भारतीय राजनीतिक इतिहास का ‘क्रूर कालखंड’ या ‘स्वर्णकाल’?

इंदिरा गांधी का 1975 का आपातकालः भारतीय राजनीतिक इतिहास का ‘क्रूर कालखंड’ या ‘स्वर्णकाल’?

नथून शाह गोंड   वर्तमान की नरेंद्र मोदी सरकार ने वर्ष 2014 के बाद से देश में कई नई परंपराओं की शुरुआत की है, जिनमें से एक है - 'संविधान हत्या दिवस'। वर्ष 2024 में

उत्तर प्रदेश हलचल
चढ़ावा चोरी की चर्चा के बीच समय पूर्व चुनाव की अटकलें!

चढ़ावा चोरी की चर्चा के बीच समय पूर्व चुनाव की अटकलें!

अनिल तिवारी   उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव समय से पहले कराए जाने की अटकलें जोरों पर है! हालांकि अयोध्या राम मंदिर से चढ़ावा चोरी के मामले उजागर होने के बाद आए ठीठकाव से

साहित्य
खतरनाक संक्रमण (बाल कहानी)

खतरनाक संक्रमण (बाल कहानी)

गौरी तिवारी    शहर के एक छोटे निजी चिकित्सालय में उस दिन असामान्य भीड़ थी, किसी को बुखार था, कोई खाँसी से परेशान था, कोई पेट दर्द से कराह रहा था। उन्हीं मरीजों के बीच

काव्य कोना
निराश आँखें (कविता)

निराश आँखें (कविता)

गौरी तिवारी    भूख ज्वालामुखी का लावा बन, दरिद्र के जीवन को तपाती है सूनी थाली की मौन व्यथा हर संध्या आँसू गाती है नन्हीं आँखें जब रोटी ढूँढ़ें, माँ अश्रुपूर्ण नेत्र झुका लेती खाली

साहित्य
गलती का अहसास (बाल कहानी)

गलती का अहसास (बाल कहानी)

गौरी तिवारी    रोहन सातवीं कक्षा का विद्यार्थी था। उसका स्वभाव अत्यंत चंचल तथा मिलनसार था, उसमें एक अच्छी बात थी कि वह हमेशा दूसरों की मदद करना चाहता था। लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमी

काव्य कोना
प्रकृति

प्रकृति

गौरी तिवारी    भोर क्षितिज की दहलीज़ पर चुपके से दीप जलाती है, नींद भरे वन के आँगन में धीरे-धीरे गीत सुनाती है। किरणें नन्हीं बालिकाएँ बन ओस-मोती चुनती जातीं, सूनी पगडंडी के पर स्वर्णिम

साहित्य
मॉडर्न बेड़ियाँ (कहानी)

मॉडर्न बेड़ियाँ (कहानी)

गौरी तिवारी    संध्या का अंधेरा धीरे-धीरे घर की खिड़कियों पर उतर रहा था। बैठक में रखे टेलीविज़न की रोशनी कमरे में गंभीरता बिखेर रही थी। सोफ़े पर बैठे विनोद समाचार चैनल पर प्रसारित एक

देश-दुनिया
आपातकाल की 51वी बरसी

आपातकाल की 51वी बरसी

लोकतंत्र यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति का अधिकार    अनिल तिवारी    जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित राष्ट्रीय आपातकाल की 51वीं बरसी भारतीय लोकतंत्र के लिए एक

विचार
संस्कृत साहित्य में प्राण वध

संस्कृत साहित्य में प्राण वध

रोमन अंग्रेजी में लिखें तो भगत और भारत में एक अक्षर का अंतर है, लेकिन गरीबों मजलूमों के वाजिब हक के लिए आवाज उठाने वालों के लिए शासन सत्ता के गुरुर, भाषा, जंगल न्याय और