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गौरी तिवारी ज्ञान का दीप लिए जब विज्ञान का युग आया, मानव ने अपनी प्रतिभा से नव इतिहास रचाया अनंत क्षितिज की हर दूरी को पल में लांघा, हथेली पर ही जैसे संपूर्ण जग
गौरी तिवारी ज्ञान का दीप लिए जब विज्ञान का युग आया, मानव ने अपनी प्रतिभा से नव इतिहास रचाया अनंत क्षितिज की हर दूरी को पल में लांघा, हथेली पर ही जैसे संपूर्ण जग
भारतीय संस्कृति की अनुपम झांकी आशीष कुमार सावन मास की शुरुआत होते ही हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक, गंगा गंगोत्री से लेकर रामेश्वरम तक सम्पूर्ण भारत शिवमय हो उठता है। सावन मास में
अनिल तिवारी 15 अगस्त, 1947 को मिली आज़ादी से अब तक भारत की चार पीढ़ियाँ तैयार हो गयी हैं। पहली पीढ़ी शारीरिक रूप से जर्जर और बूढ़ी हो चुकी है। दूसरी वृद्धावस्था की
गौरी तिवारी वह ऐसा न था, उसका मन निर्मल निर्झर था, वह निष्कपट और निर्भय था पर छल की धूल निरन्तर पड़ती रही, निर्मल निर्झर भी धीरे-धीरे दूषित हो गया। वह ऐसा न था,
गौरी तिवारी पशुओं पर दोष मढ़कर मानव बचता आया है, अपने मन का हर अँधियारा उनके सिर पर थोपता आया है। गधा बना आलस्य का प्रतीक, बैल कहा गया जड़ बुद्धि, लोमड़ियों पर छल
गौरी तिवारी कई बार वस्त्र, एक विरासत या धरोहर की भांति अपने भीतर सुख-दुःख के पल तथा अनेक तरह की स्मृतियां संजोए होते हैं। यदि वह वस्त्र साड़ी है तो एक बेटी के लिए
’गौरी तिवारी लोगों को पसंद आती है आसमान में उड़ती पतंग अपने मुताबिक खींच लें जिसकी उड़ान की बागडोर पर खराब लगते हैं सारे बंधनों को तोड़ बेखौफ उड़ते डेंडेलिया के फूल जो बढ़ते
अतुलित विद्या के सागर, अष्ट सिद्धि नवनिधियों के दाता हनुमान वनवासी आदिम कपीस जनजाति में पैदा हुए थे। इनके पिता का नाम केसरी और माता का नाम अंजना था। ये अपने माता पिता के छ
सरकार ने बैठाया और सरकार ने ही उठाया अनिल तिवारी राहत और स्वागत की बात है कि पिछले 25 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक अपनी पत्नी गीतांजलि की मौजूदगी में