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दूषित पानी से भी बढ़ रही है लिवर की समस्या

अनिल तिवारी

 

अक्सर यह सुनने में आता है की लिवर सिरोसिस की बीमारी अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से होती है। बीती शाम (17 जून 2026 को) गौरी के मामा का फोन आया कि उनके बड़े भाई को लिवर सिरोसिस हो गया है और पटना के वेदांता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। पहले तो मुझे आश्चर्य हुआ, क्योंकि सिर्फ नाम से ही नहीं स्वभाव से भी ‘मस्त’ मामाजी कोई नशा नहीं करते। प्रारंभिक दिनों में कुश्ती लड़ते थे और साथ ही खाने-पीने में भी हमेशा से शुद्ध शाकाहारी पुष्टाहार को ही प्राथमिकता देते रहे हैं। मैं काफी देर तक सोचता रहा कि बहुधा शराब से होने वाली यह बीमारी उन तक कैसे पहुंची होगी?

हाल ही में हुए एक अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 साल में लिवर सिरोसिस के मरीजों की संख्या बढ़कर दो गुना से भी कुछ अधिक हो गई है। इन मरीजों में 43% लोग ऐसे हैं जिनको यह बीमारी शराब पीने के कारण हुई है।

लिवर हमारे शरीर के लिए महत्वपूर्ण अंगों में से एक है करीब डेढ़ किलो का यह अंग कई महत्वपूर्ण कार्य करता है जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते रहे हैं कि जीवन शैली और आहार से संबंधित गड़बड़ियों ने इस अंग की बीमारियों के जोखिम को काफी बढ़ा दिया है। बड़ी संख्या में युवा आबादी लीवर रोगों का शिकार हो रही है।

 

दुनिया भर में हर साल 14 अप्रैल का दिन लिवर डे के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष लिवर डे पर दिल्ली एम्स में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मैंने चिकित्सक से यह जानना चाहा कि जब यह बीमारी इतनी गंभीर रूप ले रही है तो इसके लिए पहले से ही इलाज और लोगों में जागरूकता क्यों नहीं होती? उन्होंने बताया की लीवर की बीमारी का एहसास आमतौर पर जल्दी नहीं हो पाता । क्योंकि इस बीमारी के लक्षण अत्यंत सामान्य तरह के होते हैं जैसे पेट में कभी हल्का दर्द हो जाना, भूख न लगना, थकान महसूस होना, त्वचा का धीरे-धीरे रुखा होना, आंखों के आसपास काले घेरे हो जाना, पेशाब का रंग बदलते रहना। यही वजह है कि इंसान को इस बात का अंदाजा नहीं हो पाता और वह धीरे-धीरे एक जटिल स्थिति में पहुंच जाता है। और जब इस बीमारी का पता चलता है तब तक उसके उत्तक रेशे में बदल जाते हैं। उन्होंने बताया कि सिरोसिस के साथ लीवर और आंत दोनों में रक्त और लसीका वाहिकाओं की विकृति होती है। लसीका वाहिकाएं रक्त वाहिकाओं के समानांतर चलती हैं जो अतिरिक्त अंतरालीय द्रव, प्रोटीन और प्रतिरक्षा कोशिकाओं को निकालती हैं और उन्हें वापस सिरा से बहने वाले रक्त में पहुंचाती है। सिरोसिस में आंतों की मेंसेटेरिक लसीका वाहिकाएं बढ़ जाती है, लेकिन फैली हुई और निष्क्रिय रहती है। जिसके कारण पेट में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। ऐसे में कम उम्र से ही अपने जोखिम कारकों को पहचानना और बचाव के लिए उपाय करते रहना अब आवश्यक हो गया है।

आज पैकेट बंद खाना और बोतल बंद पानी की वजह से देश में हर 10 में से करीब तीन लोग लीवर की समस्या से ग्रस्त हैं। मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों के रास्ते आने वाली बीमारियां भी लिवर को खराब कर रही हैं। एक अन्य अध्ययन में बताया गया है कि 43.5 प्रतिशत लोगों में शराब के कारण, 12% लोगो में हेपेटाइटिस बी वायरस के कारण, 6% लोगों में हेपेटाइटिस सी वायरस के कारण तथा 15% लोगों में गलत आहार की वजह से फैटी लीवर की समस्या होती है जो दूषित पानी पीने के कारण सिरोसिस तक पहुंच जाती है।

देश में दूषित पानी की समस्या है। एक बड़ी आबादी के लिए स्वच्छ पीने योग्य पानी आज भी दुर्लभ है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सैकड़ो गांव जो गंगा नदी के किनारे बसे हैं आर्सेनिक युक्त पानी पीने के लिए अभिशप्त है। देश की संसद में भी कई बार बलिया जिले के आर्सेनिक संकट का मुद्दा उठता रहा है, लेकिन अब तक वहां कोई समाधान नहीं निकला है। गरीब लोग जहां है जैसे है के आधार पर दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं वही जो समर्थ है, वह बोतल बंद पानी पर शिफ्ट हो गए हैं। लोग या तो बोतल खरीद कर पानी पी रहे हैं अथवा आर.ओ के पानी का सेवन कर रहे हैं। गुणवत्ता के आधार पर यह दोनों ही अत्यंत खतरनाक है।

टीवी और सोशल मीडिया के जरिए लगातार फैल रहे कारोबार के तहत पानी सेवन के तरह-तरह के अजीबो गरीब नुस्खे भी गांवों तक पहुंच रहे हैं। तमाम तरह के बाबा लोग भी चिकित्सकीय राय दे रहे हैं। कोई बाबा कहता है की सुबह उठते ही दो गिलास गर्म पानी पीजिए, कोई कहता है हल्का गुनगुना कीजिए, कोई नींबू के साथ पानी पीने की राय दे रहा है तो कोई काली मिर्च और लौंग के साथ, आदि आदि।

पानी को लेकर रहीम और कबीर की समझ से हम सभी उत्तर पट्टी के लोग बचपन से ही परिचित हैं। रहीम दास जी कहते हैं कि ‘रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सुन’और कबीर दास जी का कथन है कि ‘रुखा सुखा खाई के ठंडा पानी पी’।

गांव के अनाज और समाज दोनों बदल गए हैं। अब मोटे अनाज का चलन कम हो गया है, महीन अनाजों में रासायनिक मिलावट बढ़ गई है। शुद्ध स्वच्छ और शीतल जल का त्याग कर लोग गर्म अथवा बोतल बंद या आर ओ के पानी का सेवन कर रहे हैं।

शहरों में भी डिब्बा बंद खाना और बोतल बंद पानी की धूम है। कहा गया है कि जल ही जीवन है लेकिन जिस पानी में पानी के आवश्यक गुण तत्व न हो उसे पीना कहीं से भी लाभदायक नहीं है। क्योंकि गुणहीन पानी को भी पचाने का काम शरीर की किडनी को करना पड़ता है। रही सही कसर तरह-तरह के बाबाओ की राय पर गर्म पानी से निकल रही है। समझ में नहीं आता कि लोग कितने भोले हैं। आजकल सुबह आंख खुलते ही अदहन (चावल बनाने के लिए गर्म किया जाने वाला पानी) पीने की राय देने वाला बाबा वही है जो कभी लोगों को नाखून रगड़कर बाल काले करने का नुस्खा दिया करता था। हमने रेल में, बस में, ऑफिसो में, घरों में तमाम ऐसे भोले लोगों को देखा है जो बैठे-बैठे घंटों अपने नाखून रगड़ते रहते थे कि उनके झड़े हुए बाल उग आएंगे और सफेद हुए बाल काले हो जाएंगे।

चिकित्सकों के अनुसार देश में बढ़ रही लिवर सिरोसिस की समस्या के पीछे शराब के अधिक सेवन, हेपेटाइटिस बी और सी, उल्टा सीधा आहार के साथ-साथ दूषित प्रदूषित गुणहीन पानी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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