’गौरी तिवारी
लोगों को पसंद आती है
आसमान में उड़ती पतंग
अपने मुताबिक खींच लें
जिसकी उड़ान की बागडोर
पर खराब लगते हैं
सारे बंधनों को तोड़
बेखौफ उड़ते डेंडेलिया के फूल
जो बढ़ते हैं नई शुरुआत की ओर
लोगों को पसंद आती है
पिंजरे में कैद चिड़िया
जो भूल चुकी है अब
अपने पंखों को उड़ान देना
अपने हृदय की पीड़ा जताना
जीती है मजबूरन कैद होकर
मिलता है परोसा हुआ खाना
पर खराब लगते हैं
अनंत क्षितिज में उड़ते तोते
एक दिन जो पिंजरे से हो गए फुर्र
दे दिया जिसने मालिक के रचे भाग्य को धोखा
जिन्हें नहीं मिलता परोसा खाना
पर मिलती है स्वतंत्रता और उड़ान
लोगों को अच्छी लगती हैं
साज श्रृंगार करती स्त्रियां
जो हों अच्छी वधू पत्नी और मां
बनी रहे मूक, बधिर, दृष्टिहीन
जिन्हें बना दें अधिष्ठात्री देवी
उपाधि दें गृहस्वामिनी की
पर लोगों को खराब लगती हैं
स्त्रियां जिनके हाथ से आती है
रसोईघर के मसालों की गंध
जिनके चेहरे पर पड़ जाती हैं वर्षों की थकावट की झुर्रियां
जो दें अपने ही गृह के लिए सुझाव या लें कोई निर्णय
लोगों को अच्छी लगती हैं
कामकाजी सशक्त स्त्रियां
जो चलें घर और नौकरी दोनों साथ लेकर
हो सुंदर सुशील बुद्धिमती और कामकाजी
सूर्य के पहले उठकर निपटाए
घर के कभी न समाप्त होने वाले कार्य
जाती हो काम पर और दे घरखर्च का एक भाग
पर आए शाम को जल्दी घर
बनाए रात का खाना, दे सबको चाय
पर खराब लगती हैं स्त्रियां जो
खड़ी होती हैं अन्याय के विरुद्ध
नहीं आती किसी के शासन में
जो नहीं होती सुशील या शांत
बोलती हैं गलत को गलत
नहीं मानती बेतुकी रूढ़ियों को
जाती हैं काम पर बिना निपटाए घर के कार्य
स्वाभिमान ही है जिनका श्रृंगार

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दिव्य प्रस्तुती