Sunday , 18 October 2026

काव्य कोना

काव्य कोना

मुसाफ़िर

गौरी तिवारी   इन बेनाम गलियों में, घूमे वह किसी बंजारे-सा, तपती ग्रीष्म की किरणों में, भटके वह किसी प्यासे-सा। है खोज उसे...

काव्य कोना

कलम की ताकत

गौरी तिवारी    आओ मिलकर क्रांति लाएँ, कलम से राष्ट्र का भाग्य रचाएँ। ज्ञान के नव दीप जलाकर, तम की घटाओं को दूर...

काव्य कोना

पुस्तकालय

गौरी तिवारी    छायी थी अंधियारी थी मिथ्या की, जब आडंबर ने था अपना पैर पसारा, तब पुस्तकालय ने किया ज्ञानदीप से सारा...

काव्य कोना

ग़ज़ल

हक मुझे सिर्फ मेरा हक चाहिए, इश्क-विश्क तुम रख सकते हो। राहें इतनी भी कांटे भरी नहीं मेरी, तुम चाहो तो साथ भी...