अशोक त्रिपाठी
15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि देश में सशस्त्र नक्सलवाद तो अंतिम सांसें ले रहा है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ सोच रखने वाले कुछ लोग देश में हिंसा, अशांति और अराजकता फैलाने के मौके तलाश रहे हैं। पीएम मोदी ने अपने भाषण में जोर दिया था कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें समाज से अलग-थलग किया जाना चाहिए, जबकि भटके हुए युवाओंको मुख्यधारा में वापस लाने के प्रयास होने चाहिए। इस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सीजेपी के सह-संयोजक और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने पीएम मोदी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि केवल सरकार से सवाल पूछने वाले शिक्षित युवाओं को ‘नक्सली’ बताना गलत है। यह सरासर अहंकार है। इसी प्रकार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि उन्हें दिमागी नक्सली होने पर गर्व है। भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने इस पर पलटवार किया और कहा 24 घंटे में ही दिमागी नक्सली सामने आ गये हैं। हालांकि सुधांशु का यह तीर काक्रोच जनता पार्टी 1⁄4सीजेपी1⁄2 के सह-संयोजक सौरव दास पर भी प्रहार करता है लेकिन सीजेपी से टकराने से भाजपा तो दूर संघ भी बचना चाहता है। पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर दिमागी नक्सली की बात यूं ही नहीं कह दी है। इसीलिए इसके निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। सीजेपी के बाद कांग्रेस ने भी तुरंत प्रतिक्रिया दे दी है।
पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि प्रधानमंत्री को शिक्षित युवाओं को इस तरह ‘नक्सली’ नहीं कहना चाहिए। दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, प्रधानमंत्री जी, ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों से अब काम नहीं चलेगा। आप पढ़े-लिखे युवाओं को सिर्फ इसलिए नक्सली कैसे ठहरा सकते हैं क्योंकि वे आपकी सरकार से सवाल पूछते हैं? उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसे नाम देना सरकार का अहंकार और उनकी समस्याओं को हल करने में उसकी पूरी तरह से विफलता को दर्शाता है। दास ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, घंटियां बज चुकी हैं और जागृति का दौर आ गया है। स्वतंत्रता दिवस पर एक अन्य संदेश में सौरव दास ने दावा किया कि देश शायद 12 साल बाद इस दिन को ‘सच्चे अर्थों में’ मना रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों के भीतर का डर टूट चुका है। दास के मुताबिक, जिस पीढ़ी से चुप रहने के लिए कहा गया था, उसे अब अपनी आवाज मिल गई है। उन्होंने दावा किया कि जिस पीढ़ी से कहा गया था कि कुछ भी नहीं बदलेगा, उसने अब बदलाव की उम्मीद करना शुरू कर दिया है। उन्होंने इसे ‘जागृति का युग’ और ‘शांतिपूर्ण विरोध का युग’ बताया। दास ने कहा कि आने वाले समय में लोग पुराने, भ्रष्ट, अक्षम और अहंकारी लोगों को सत्ता से बाहर कर देंगे।
सौरव दास ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही कि देश के हर जिले में एक‘जंतर-मंतर’जन्म ले रहा है। उनके मुताबिक, यह उन लोगों के लिए उम्मीद की जगह है जो खुद को निराश महसूस करते हैं और उन लोगों के लिए ताकत का केंद्र है जिन्हें लगता है कि उनके पास कोई शक्ति नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग जेन-जी और युवाओं को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। दास ने कहा कि युवाओं को‘तुम्हारी जेन-जी बनाम हमारी जेन-जी’के रूप में बांटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब लोग बंटने से इनकार कर देते हैं तो उनकी ताकत सबसे ज्यादा होती है। सत्ता वाले डर फैलाएंगे, लेकिन युवा साहस फैलाएंगे। उन्होंने दावा किया कि अब लोगों के मन से डर निकल चुका है और वे पीछे नहीं हटेंगे।
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने 16 अगस्त को लोकसभा में नीट परीक्षा और छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े सवालों को खारिज किए जाने पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। सीजेपी नेता ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का हनन बताते हुए कहा कि संसद में पूछे गए सवाल पूरी तरह से संवैधानिक और जायज थे। सौरव दास ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के इशारे पर जनप्रतिनिधियों द्वारा पूछे गए तीन महत्वपूर्ण प्रश्नों को संसद में उठाने से रोक दिया गया। सीजेपी नेता के मुताबिक, तमिलनाडु के नमक्कल से डीएमके लोकसभा सांसद माथेस्वरन वीएस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय से तीन अहम मुद्दों पर जवाब मांगा था। इनमें नीट-यूजी 2026 की आवेदन फीस वापस करने और परीक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों में बढ़ रहे अविश्वास पर स्पष्टीकरण, जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान छात्रों को पीने के पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने के आरोप तथा पेपर लीक, शिक्षा सुधार, छात्रों के हितों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के साथ सरकार के व्यवहार से जुड़े सवाल शामिल थे।
यहां पर ध्यान देने की बात यह भी है कि नालसर लॉ यूनिवर्सिटी पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपना आदेश वापस ले लिया है। इसके बाद सीजेपी ने युवाओं की जीत बताया। बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने फैसला बदलने पर सफाई दी है। नालसर लॉ यूनिवर्सिटी को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के फैसले और फिर उस पर यूटर्न ने नया बवाल खड़ा कर दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बीसीआई के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोलने के संकेत दिए। नालसर लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत के शामिल होने के विरोध पर बार काउंसिल आफ इंडिया ने सख्ती दिखाई थी। अपने आदेश में कहा था कि नालसर हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों के बतौर वकील नामांकन न हो। यूनिवर्सिटी से 3 दिन में रिपोर्ट ,मांगी। साथ ही विरोध अभियान के आयोजकों की भी सूची मांगी। रिपोर्ट मिलने के बाद 19 अगस्त को आगे की कार्रवाई की बात कही। बीसीआई ने कहा कि न्यायपालिका के सर्वोच्च पद का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी के बाद भारी विवाद खड़ा हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी ने इसका विरोध किया और मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी। इस बीच बीसीआई ने अपना फैसला वापस ले लिया। इसके बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, युवाओं की एक और बड़ी जीत! लेकिन जवाबदेही की लड़ाई जारी रहेगी।
मनन मिश्रा ने कहा, यंग लॉयर्स के हितों की रक्षा करना बार काउंसिल का काम है। जो आदेश आया, आनन-फानन में रोका गया। जुडिशरी और स्टूडेंट्स में कोई क्लैश न हो, इंटर्नशिप में दिक्कत नहीं हो, उसमें कोई बाधा नहीं पहुंचे- यही मंशा है। पूरे विवाद पर मनन मिश्रा ने कहा है कि जरूरत होगी तो मैं सीजेपी के नेताओं से बात करूंगा. जो बातें हैं, उसको मैं एक्सप्लेन करूंगा। इस प्रकार सीजेपी के कदम आगे बढ़ रहे हैं और आंख-कान भी पूरी तरह खुले हैं।
