(अंबेडकर जयंती पर विशेष) "पैरों में जूता भले ही ना हो लेकिन पास में किताब अवश्य होनी चाहिए।" स्तालिन ने एक बार कहा था, "भाषा एक माध्यम है, औजार है जिसके जरिए एक-दूसरे का
दिन-दिन बीतते हफ्ता बन गया, हफ्ता बन गया माह। गुजर गए बारह महीने, हो गया एक साल। मां को गुजरे हुए एक साल।। चिंता गुजरी आशा गुजरी, गुजर गया तेरा प्यार। गुजरे तेरे सुखभावों को,
मद्धिम पड़ गई चांदी की चमक गौरी तिवारी -------- महान संगीतकार नौशाद ने एक साक्षात्कार में कहा था कि गायिकी में अगर लता मंगेशकर सोना हैं तो आशा भोसले चांदी। दोनों की अपनी-अपनी अहमियत है।
(भेंट वार्ता) पूरी दुनिया में हिंदी बोलने वालों की संख्या सौ करोड़ से अधिक हो चुकी है। भारत की 61 क्षेत्रीय बोली-भाषाओं का पुट समेटे हिंदी देश की चौथाई आबादी से ज्यादा लोगों द्वारा नियमित
गौरी तिवारी रुद्र ने अपने घर की बालकनी से चौराहे पर मुड़ती एक नीले रंग की गाड़ी देखी, वह बहुत खुश हो गया और हो भी क्यों ना? आखिर इतने समय बाद जो मिल
खुदगर्ज़ राजनीति, जुमलोंमें तब्दील होती भाषा और उनका सामना करता आख्यान नित्यानंद तिवारी जिस घटना पर आखिरी कलाम नामक उपन्यास लिखा गया है, उस घटना के समय बीजेपी की सरकार थी। जिस समयः यानी 2003
"जिसके मुंह से सुनो, चारों तरफ यही हवा है, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा!, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा!, लोगों का यह दावा है।, महंगाई छेड़ रही है तान,, आम आदमी है परेशान।, रुपया गर्त
गार्गी तिवारी दिल्ली जैसे महानगर में बढ़ता हुआ टाइफाइड एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहा है। आधुनिक इमारतों, चौड़ी सड़कों, तेज़ रफ्तार जिंदगी के बीच यह बीमारी चुपचाप अपनी जड़ें मजबूत कर
साहित्य शब्द का यदि शाब्दिक अर्थ देखा जाए तो यह स+हित के योग से बनता है अर्थात हित के साथ, सबके हित के लिए। हिंदी साहित्य के विभिन्न आचार्यों ने साहित्य को लेकर अपने अपने
अनिल तिवारी ----------------- अपना महान भारत देश प्राकृतिक, नैसर्गिक और स्वाभाविक रूप से एक शुद्ध चित्त दार्शनिक देश भी है। यही कारण है कि हर भारतीय विभिन्न धार्मिक और दार्शनिक मान्यताओं पर खुले दिल से