कलरव (अक्टूबर, 2006)
kalrav october 2006 मासिक पत्रिका कलरव का वर्ष 2006, अक्टूबर माह का अंक।
kalrav october 2006 मासिक पत्रिका कलरव का वर्ष 2006, अक्टूबर माह का अंक।
कलरव पत्रिका का सितंबर 2006 का अंक। https://drive.google.com/file/d/1ygI99xIAEZFlWuw5VLzcaWFnwtqUfsIJ/view?usp=drivesdk कलरव सितंबर 2006
वर्षा सिंह धर्म का इस्तेमाल स्त्री के खिलाफ एक हथियार की तरह हुआ। धर्म में स्त्री को एक सामान्य मनुष्य की तरह नहीं बरता गया बल्कि उसके इर्दगिर्द बंधनों के बेड़े खींचे गए। जन्म
(अंबेडकर जयंती पर विशेष) "पैरों में जूता भले ही ना हो लेकिन पास में किताब अवश्य होनी चाहिए।" स्तालिन ने एक बार कहा था, "भाषा एक माध्यम है, औजार है जिसके जरिए एक-दूसरे का
दिन-दिन बीतते हफ्ता बन गया, हफ्ता बन गया माह। गुजर गए बारह महीने, हो गया एक साल। मां को गुजरे हुए एक साल।। चिंता गुजरी आशा गुजरी, गुजर गया तेरा प्यार। गुजरे तेरे सुखभावों को,
मद्धिम पड़ गई चांदी की चमक गौरी तिवारी -------- महान संगीतकार नौशाद ने एक साक्षात्कार में कहा था कि गायिकी में अगर लता मंगेशकर सोना हैं तो आशा भोसले चांदी। दोनों की अपनी-अपनी अहमियत है।
(भेंट वार्ता) पूरी दुनिया में हिंदी बोलने वालों की संख्या सौ करोड़ से अधिक हो चुकी है। भारत की 61 क्षेत्रीय बोली-भाषाओं का पुट समेटे हिंदी देश की चौथाई आबादी से ज्यादा लोगों द्वारा नियमित
गौरी तिवारी रुद्र ने अपने घर की बालकनी से चौराहे पर मुड़ती एक नीले रंग की गाड़ी देखी, वह बहुत खुश हो गया और हो भी क्यों ना? आखिर इतने समय बाद जो मिल
खुदगर्ज़ राजनीति, जुमलोंमें तब्दील होती भाषा और उनका सामना करता आख्यान नित्यानंद तिवारी जिस घटना पर आखिरी कलाम नामक उपन्यास लिखा गया है, उस घटना के समय बीजेपी की सरकार थी। जिस समयः यानी 2003
"जिसके मुंह से सुनो, चारों तरफ यही हवा है, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा!, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा!, लोगों का यह दावा है।, महंगाई छेड़ रही है तान,, आम आदमी है परेशान।, रुपया गर्त