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आत्मरक्षा (लघुकथा)

गौरी तिवारी 

बेटी मेरी तुझे लोरी सुनाऊँ

लोरी में कहानी मैं अपनी बतलाऊँ

कहानी में दुनिया की रीत से मिलवाऊँ

आ बेटी तुझे अपनी गोद में सुलाऊँ

सावित्री अपनी सहमी हुई 12 वर्षीय बेटी नैना का सिर अपनी गोद में रखकर उसे सुलाने का प्रयास कर ही रही थी कि लोरी गाते गाते उसकी आँखों से आँसुओं की धारा छलक उठी, और उसी धारा का एक मोती नैना पर जा गिरा। वह अचानक से उठी और कहने लगी, ” मां आप रोइए मत प्लीज़, ताला तो ठीक से लगा दिया था ना आपने दूसरे कमरे में?

तभी सावित्री कहती है “हाँ, पर ऐसे तुम्हारे पापा को कमरे में बंद करना मुझे ठीक नहीं लग रहा, कहीं उन्हें कुछ हो गया तो?”

~ ” खोलो दरवाजा!!! मैं कहता हूँ खोलो… नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा!!!!

गुस्से में दरवाजा पीटने की आवाज़ सुनकर नैना ने कहा “और उनके बाहर आते ही अगर आपको कुछ हो गया तो??, आप चिंता मत कीजिये सुबह होते ही हम घर छोड़ कर चले जाएंगे और पापा के कमरे का ताला भी खोल देंगे।।। ”

इतना सब होने के बाद सावित्री अभी भी एक सदमे में है,, कैसे तरह वर्षों से महेश के इतने अत्याचार झेलने के बावजूद उसने अभी भी उसके खिलाफ पुलिस कम्प्लेंट नहीं करवाई।।।

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