(विश्व प्रौद्योगिकी दिवस)
अनिल तिवारी
नांदिक दूसरा दर्जा पास कर कक्षा तीन में पहुंचे हैं और कुंज अब छठवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। आदर्श विद्यार्थी का लक्षण पूछने पर तोते की तरह सुनाते हैं “काग चेष्टा, बको ध्यानं, स्वान निद्रा तथैव च। अल्पाहारी, गृह त्यागी पंच लक्षणम विद्यार्थिन। लेकिन व्यवहार में ऐसा है नहीं। तकनीक का असर- कुअसर उनके भी बाल मन पर पड़ा है। खुद से मेहनत कर सोचने समझने और प्रश्नों का उत्तर तलाशने की बजाय गैजेट का सहारा लेने की ओर झुकाव है।इस बात की तस्दीक एक दिन नांदिक ने मुझसे की, उसने कहा, “कुंज भैया ने गूगल से देखकर सवाल का उत्तर निकाला है”।
यहां प्रश्न नकल का नहीं है, क्योंकि नकल भी अक्ल वाले ही कर पाते हैं। यहां सवाल तकनीक के बेजा इस्तेमाल का है। दरअसल तकनीक का विकास सहयोग और सार्थक के लिए समय बचाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। प्राचीन समय में यूनान के दार्शनिक अरस्तू ने दासों की व्यवस्था को जायज ठहराया था और कहा था कि दासों के कारण बुद्धिमान लोग श्रम से बचते हैं तथा उनका समय अनुसंधान के लिए उपयोग में आता हैं। बदलते समय के साथ अब दास प्रथा अमानवीय कृत्य है।
तकनीक का विकास भी मनुष्य के समय सहयोग के लिए ही है, लेकिन जब मनुष्य तकनीक पर निर्भर होता जाएगा, तकनीक का गुलाम बनता जाएगा, तो भविष्य में समाज यह सोचने के लिए बाध्य हो सकता है की क्या यह भी एक अमानवीय कृत्य है? डर यह भी है कि समय बचाने के नाम पर विकसित तकनीक कहीं प्राकृतिक समझ और नैसर्गिक मेधा को ही कुंद न कर दे?
इसमें कोई दो राय नहीं कि तकनीक और प्रौद्योगिकी के बल पर आज दुनिया विकास के चरम पर चढ़ने को तैयार खड़ी है। ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को खोजने के साथ-साथ दूसरे ग्रहों की यात्रा विज्ञान के बल पर बेधड़क हो रही है। लेकिन कहते हैं ना कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। तकनीक का एक पक्ष उजला है तो दूसरे से कुछ धुंधले की भी झलक मिल रही है। अभियांत्रिकी और तकनीक के बल पर प्रौद्योगिकी के विकास ने हमारे हाथ में ऐसे कई गैजेट्स दिए हैं, जो ना केवल हमारे जीवन को सरल बनाते हैं बल्कि हमारे कार्य करने की क्षमता, उत्पादकता और गति को भी बढ़ाते हैं।
आज के समय में कुछ गिनती के लोग ही ऐसे होगे जो स्मार्टफ़ोन, लैपटॉप, वाई-फाई, 5जी, 4जी, एसी, हीटर के बिना अपनी ज़िंदगी बिता रहे हो। आजकल तो कई घर में होम ऑटोमेशन और स्मार्ट होम बन गए हैं और इसी वजह से घर के वातावरण में कई प्रकार की रेडियो वेव्स और कई तरह की तरंगे व्याप्त होती हैं, जो हमारे शरीर के लिए बिलकुल भी अच्छी नहीं हैं।
हर चीज़ की तरह टेक्नोलॉजी के भी हमारे जीवन पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव हैं। टेक्नोलॉजी ने हमारे जीवन जीने के तरीके तक को बदल के रख दिया है। हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अपने काम को आसान और समय की बचत करने के लिए करते हैं।
कभी सोचा है कि आज से बीस साल पहले का जीवन टेक्नोलॉजी के बिना इतना सरल नहीं था जितना की आज है? आज आप अपने दोस्त से बोलिए कि इंटरनेट हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। वह पहले अपनी हंसी रोकेगा फिर आपकी बात को मजाक समझ कर यकीन भी नहीं करेगा और शायद कोई भी आपकी बात पर यकीन नहीं करेगा।
यह इक्कीसवीं सदी है और इंटरनेट का इस्तेमाल सभी को करना आता है, और इसका लाभ लोग अपनी जीवन शैली को आसान बनाने के लिए करते हैं। हम टेक्नोलॉजी की मदद नई स्किल्स सीखने के लिए, मीलों दूर बैठे अपने दोस्त से बात करने के लिए, पैसे को आसानी से ट्रांसफर करने के लिए, शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नया सीखने के लिए, और अपनी जीवन शैली को बेहतर बनाने के लिए करते हैं।
प्रौद्योगिकी विकास का ही नतीजा है कि आज स्वास्थ्य सुविधाओं में बेमिसाल परिवर्तन आया है और गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज आज पलक झपकते ही हो जाता है।
दुनिया भर में किसी भी जगह आप बस बैठे-बैठे हजारों मिल दूर रह रहे किसी भी व्यक्ति से बात कर सकते हैं।
दुनिया में सबसे शक्तिशाली देशों में उन देशों का नाम शामिल है, जिनके पास सशस्त्र बल और एडवांस टेक्नोलॉजी है।
व्यवसाय चाहे छोटा हो या बड़ा, उसे चलाने के लिए टेक्नोलॉजी की मदद लेनी ही पड़ती है।
प्राचीन समय और आज के समय का विश्लेषण करने पर पता चलता है की तकनीक के बल पर मानव जाति ने अपार प्रगति की है। अगर हमें टेक्नोलॉजी का वरदान ना होता तो हम शायद अब भी कबीलों और जंगलों में निवास कर रहे होते।
टेक्नोलॉजी हमारे लिए एक आशीर्वाद है, पर जरूरत से ज्यादा किसी भी चीज को इस्तेमाल में लाना अपने साथ कई नुकसान को लेकर आता है। टेक्नोलॉजी ने हमारे जीवन को संभल तो दिया है लेकिन नकारात्मक रूप से भीतर तक प्रभावित किया है?
1.वर्तमान में टेक्नोलॉजी पर निर्भरता बढ़ी है। यह सिर्फ बड़ी ही नहीं है बल्कि धीरे-धीरे हाबी हो रही है।
किसी भी चीज की अधिकता सही नहीं है, चाहे वह अमृत ही क्यों न हो। तकनीकी पर पूरी तरह से निर्भर होना, एक बुरा संकेत है। आज आलम यह है कि हम अपने दिन की शुरुआत टेक्नोलॉजी से शुरू करते हैं और टेक्नोलॉजी पर खत्म करते हैं। हम अलग -अलग तरीके के गैजेट्स से घिरे हुए हैं।
फोन, लैपटॉप, केटल्स, वाटर हीटर, टोस्टर, कार,आदि। हम टेक्नोलॉजी पर इतने निर्भर हो गए हैं कि गैजेट्स के इस्तेमाल ने हमें आलसी बना दिया है। हम खुद से कुछ करना ही नही चाहते, क्योंकि हमारे काम को पूरा करने के लिए गैजेट्स मौजूद हैं।
टेक्नोलॉजी पर निर्भर होने की वजह से हमारा शरीर बीमारी का घर बन गया है। हम दिन-ब-दिन आलसी बनते जा रहे हैं और इसके साथ-साथ मोटापा, तनाव और स्ट्रेस जैसी अनेक बीमारियों से घिरते जा रहे हैं।
2-टेक्नोलॉजी ने ही हमें एक महत्वपूर्ण चीज दी है – सोशल मीडिया। लैपटॉप और फोन में अलग-अलग ऐप की मदद से लोग किसी भी अनजान व्यक्ति से बात कर सकते हैं। वर्चुअल दुनियां में दोस्त बनाने के कारण लोगों के बीच आज सामाजिक अलगाव बढ़ रहा है। आज हमारे लिए किसी अनजान व्यक्ति से बात करना तो आसान है, पर हम पड़ोस में रहने वाले लोगों से बात नहीं करना चाहते। सिर्फ चैटिंग ही नहीं, आज कल लोग वीडियो गेम्स खेलने में इतने व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें पता ही नहीं है कि दुनिया में क्या हो रहा है।
3.छात्रों पर इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव पढ़ रहा है।
टीचर ने ऑनलाइन क्लास में एक चैप्टर खत्म कर दिया और गृह कार्य भी दे दिया। टीचर ने कह दिया कि कोई भी गृह कार्य नकल करके नहीं करेगा, सबको खुद से मेहनत करके काम को पूरा करना है। लेकिन छात्र इस बात को नहीं मानते हैं क्योंकि उनके पास तो इंटरनेट है।
उनके पास तो विकल्प है कि वह इंटरनेट की मदद से चुन सकते हैं कि वह कौन से साइट से अपना गृहकार्य अपनी कॉपी पर उतारेंगे। इससे यह देखने को मिला है कि छात्र महत्वपूर्ण ज्ञान लेने से वंचित रह जाते हैं। वह किसी भी चीज को कॉपी करना पसंद करते हैं, और बाकी समय वह गेम्स और चैटिंग में बिता देते हैं।
4.तकनीक के आने से बेरोजगारी की दर में लगातार वृद्धि हो रही है। पहले जिस काम को करने के लिए मानव की जरूरत पड़ती थी, आज वह सारे काम रोबोट्स कर रहे हैं। लोग मशीन को इस्तेमाल में लाना पसंद कर रहे हैं, क्योंकि यह उनका समय और खर्च दोनों बचाती है। नौकरियों की संख्या कम होने की वजह से बेरोजगारी में इज़ाफा हो रहा है।
5- टेक्नोलॉजी की लत से लोगों की दिनचर्या बदल रही है।
लोग अपना समय मनोरंजन को ज्यादा दे रहे हैं। वीडियो गेम्स, नेटफ्लिक्स, स्मार्टफोन, लैपटॉप और भी कई गैजेट को ज्यादा इस्तेमाल में लाने की वजह से हमें टेक्नोलॉजी की लत लग गई है। हम टेक्नोलॉजी के आदी हो गए हैं और इसके बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते।
6-यूं तो टेक्नोलॉजी हमारे समय को बचाने का काम करती है लेकिन लोग अपने कंप्यूटर्स पर घंटों बिताते हैं और मूवीज देखना, टेक्सटिंग, वीडियो गेम्स आदि काम करते हैं। इन सब में वह इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने जरूरी काम को करना भूल जाते हैं।7-जब मशीनें नहीं हुआ करती थीं तब हम सब स्वयं के मस्तिष्क का उपयोग करके किसी भी काम को किया करते थे लेकिन आज हम आसान से आसान काम को टेक्नोलॉजी की मदद से करते हैं तो भला स्वयं के मस्तिष्क का उपयोग कैसे ही संभव हो पाएगा।
भले ही मशीन ने हमारे काम को आसान बनाया है और ये हमें बहुत अच्छा लग रहा है लेकिन अपनी बुद्धि का प्रयोग करना भी बेहद ज़रूरी है। अगर हमनें इसी तरह हर काम को करने के लिए मशीन की मदद ली तो यह धीरे-धीरे हमारी रचनात्मकता को नष्ट कर देगा।
8-साइबर बुलिंग, हैकिंग, ट्रॉलिंग, स्टॉकिंग इत्यादि डिजिटल अपराध का एक स्वरूप है, जिसे टेक्नोलॉजी की आड़ में अंजाम दिया जाता है। प्रौद्योगिकी के बढ़ते स्वरूप के साथ ही ऐसे अपराधों में भी बढ़ोतरी हुई है।
सिर्फ इतना ही नहीं टेक्नोलॉजी की वजह से दुर्घटनाएं, गोपनीयता और असुरक्षा, टेक्नोलॉजी की लत, खराब पॉश्चर, याद्दाशत कम होना, आदि नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। अब समय आ गया है कि हम टेक्नोनॉलोजी का उतना ही इस्तेमाल करें जितनी हमें जरूरत है।
कुल मिलाकर हम सब टेक्नोलॉजी के मालिक है और टेक्नोलॉजी हमारी गुलाम है लेकिन दुख की बात ये है कि टेक्नोलॉजी पर हम इतने अधिक आश्रित हो गए हैं कि टेक्नोलॉजी हमें कंट्रोल करने लगी है।
हम जीते जागते इंसान हैं, कोई रोबोट नहीं इसीलिए टेक्नोलॉजी की उतनी ही मदद लें, जितनी ज़रूरत हो। अगर मालिक नौकर के गुलाम बन जायेंगे तो पूरी व्यवस्था की गड़बड़ा जाएगी इसीलिए टेक्नोलॉजी से बस काम भर की ही मदद लें।
