अनिल तिवारी
फीफा विश्व कप 2026 का असली जंग कल यानी 10 जुलाई से शुरू होगा। विश्व कप में कुल 48 टीमों ने हिस्सा लिया। प्री क्वार्टर मुकाबले पूरा होते ही 40 टीमों का मौजूदा सफर समाप्त हो गया। मोरक्को-फ्रांस, अर्जेंटीना- स्विट्जरलैंड, स्पेन-बेल्जियम, नार्वे-इंग्लैंड की टीमें क्वार्टर फाइनल में पहुंची है।
ग्रुप स्टेज तथा प्री क्वार्टर के प्रदर्शन के बाद यदि खिताब के सबसे प्रबल दावेदार की घोषणा करनी है तो सबसे पहला नाम स्पेन का लिया जा रहा है। इस टीम के का सबसे चर्चित चेहरा है 18 साल के लेमिन यमाल। उन्हें 16 गोल करने के लिए स्पेन के सबसे बड़े टूर्नामेंट ला लिगा का प्लेयर ऑफ द सीजन चुना गया। रोडरी और पेडरी जैसे भरोसेमंद मिडफील्डर के कारण यमाल की रफ्तार और टीम की ताकत करिश्मा करने में सक्षम है।
दूसरा नाम फ्रांस का ही आएगा। वर्ष 2018 का वर्ल्ड कप जीत चुकी फ्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एंबापे पूरी तरह से फॉर्म में है। मौजूदा विश्व कप में बातें 7 गोल और दो असिस्ट कर चुके हैं। पिछले विश्व कप में एंबापे ने गोल की हैट्रिक बनाई थी। इस बार ग्रुप स्टेज में सेनेगल के खिलाफ पहले हाफ में फ्रांस ने अपने लंबे रुतबे के अनुरूप नहीं खेला लेकिन उसके बाद का प्रदर्शन उतना ही मजबूत रहा जितना कागजों पर नजर आता है।
इसके बाद नंबर है इंग्लैंड का जिसके कप्तान हेरी केन जबरदस्त लय में है। केन 2025 26 के सीजन में 51 मैचों में 61 गोल कर चुके हैं। इस वर्ल्ड कप में केन अब तक छह गोल किया हैं।
टीम की क्षमता के हिसाब से पिछली विजेता अर्जेंटीना चौथी दावेदार है, लेकिन करिश्माई मेसी सब कुछ उलट-पुलट कर देने की क्षमता रखते हैं। अकेले के कंधे पर टीम को यहां से वहां पहुंचने की दक्षता उनमें है। इसीलिए अधिकांश प्रशंसकों का यह मानना है की एक बार फिर मेसी 2022 का इतिहास दोहरा सकते हैं।
यदि बेस्ट खिलाड़ी की घोषणा करनी हो तो फिर यहां सबसे पहला नाम लियोनेल मेसी का होगा। हालांकि मेसी ने इस वर्ल्ड कप में कई बार पेनल्टी मिस की लेकिन उनके अभी तक इस एडिशन में किए गए सर्वाधिक आठ गोल बताते हैं कि 39 साल की उम्र में भी वह किसी भी 19 साल के खिलाड़ी से ज्यादा फुर्तीले, चालक और परफेक्ट है। लेकिन फुटबॉल का एक प्रसिद्ध कथन है की गेंद हमेशा गोल होती है। इसका मतलब साफ है कि मैच शुरू होने से पहले कोई भी नतीजा नहीं होता।
पिछली बार की वर्ल्ड चैंपियन अर्जेंटीना नॉकआउट राउंड में पहुंची तो इसमें सबसे अधिक योगदान मेसी का रहा। हालांकि ग्रुप स्टेज में उसके प्रदर्शन को देखकर कुछ लोगों के मन में संदेश जरूर पैदा हुआ कि क्या वह पिछली बार की कामयाबी इस बार भी दोहरा पाएंगे? लेकिन प्री क्वार्टर मुकाबले में अर्जेंटीना ने जिस तरह मैच के अंतिम 10 मिनट में कम बैक किया उसे देखकर सबको भरोसा होने लगा है कि सिर्फ मेसी के दम पर खिताबी जीत को दोहरा पाना नामुमकिन नहीं होगा। अटलांटा स्टेडियम में राउंड ऑफ 16 के मुकाबले में इजिप्ट के खिलाफ 2-0 से पिछड़ने के बाद मौजूदा चैंपियन टीम पर टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा बढ़ रहा था लेकिन अर्जेंटीना ने आखिरी पलों में गजब की वापसी करते हुए मैच को तीन दो से जीत लिया। मेसी ने इस मैच में एक गोल किया और राउंड ऑफ 16 के बाद सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में एंबापे को पीछे छोड़ते हुए पहले नंबर पर आ गए। फीफा के गोल्डन बूट नियमों के अनुसार गोल ही मुख्य पैमाना होता है और अगर खिलाड़ियों के गोल बराबर रहते हैं तो असिस्ट को पहले टाइ ब्रेकर माना जाता है। अगर इसके बाद भी खिलाड़ी बराबरी पर रहते हैं तो सबसे कम मिनट खेलने वाले खिलाड़ी को प्राथमिकता दी जाती है। मेसी के नाम वर्ल्ड कप में 21 गोल हो गए हैं जिससे टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा 21गोल करने वाले खिलाड़ी के तौर पर उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है। स्मरण रहे कि इजिप्ट के खिलाफ पेनल्टी चुकने के बाद विश्व कप इतिहास में (शूटआउट को छोड़कर) सबसे ज्यादा पेनल्टी मिस करने वाले खिलाड़ी का एक अनचाहा रिकार्ड भी मेसी के नाम दर्ज हो गया है।
हालांकि प्री क्वार्टर के बाद क्वार्टर राउंड में ज्यादा मजबूत विपक्षी सामने होंगे जो मेसी के लिए अलग रणनीति के साथ मैदान पर उतरेंगे। वह मेसी की कड़ी निगरानी करेंगे। ऐसे में टीम की जीत सुनिश्चित करने के लिए अन्य प्लेयर्स को भी अधिक जिम्मेदारी उठानी होगी।
मुकाबले के क्वार्टर राउंड में पहुंचने का मतलब यह है कि गोल्डन बूट टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले प्लेयर को मिलने वाला अवार्ड की रेस जितनी तेज रफ्तार के साथ शुरू हुई थी उसकी रफ्तार अब बिल्कुल धीमी पड़ जाएगी। अब टीमें अधिक रक्षात्मक हो जाएगी। खिलाड़ियों पर थकान भी हावी होने लगती है और अतिरिक्त समय खेलने की आशंका के कारण वह जरूरत से ज्यादा जोखिम लेने से बचने लगते हैं। यहां एक छोटी गलती ही टूर्नामेंट से बाहर कर सकती है।
इस वर्ल्ड कप में इस बार दो अलग-अलग कहानी एक साथ चल रही है। एक तरफ मेसी, एंबापे, केन और यमाल जैसे सुपरस्टार अपने नाम के अनुरूप प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अफ्रीकी टीमों का करिश्माई खेल है।
लेकिन जैसा कहा गया है कि फुटबॉल गोल है। यानी यह अनिश्चितताओं का खेल है और कुछ भी कहने से पहले आखिरी सीटी के बजने का इंतजार करना चाहिए।
