गौरी तिवारी
क्यों व्यर्थ अतीत की स्मृतियों में बंधे रहना
वर्तमान के मधुर क्षणों को संजोना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।
जीवन ओस-बिंदु सा क्षणिक है
इसे हर्ष के आलोक से भरना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।
क्यों मोह के क्षणभंगुर आकर्षण को प्रेम समझ बैठना
ईश्वर की पवित्र भक्ति में लीन होना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।
क्यों एक पराजय को जीवन का अंत समझना
संघर्षों की धधकती ज्वाला में कुंदन बनना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।
विपत्तियाँ सिर्फ साहस की परीक्षाएं हैं,
अविचलित होकर आगे बढ़ना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।
क्यों दूसरों के दोषों का लेखा-जोखा करते रहना
स्वयं के अंतर्मन का अवलोकन करना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।
जगत का परिवर्तन सरल नहीं
पहले अपने विचारों को पावन करना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।
क्यों क्षणिक वैभव के अहंकार में डूबे रहना
मानवता के दीप को प्रज्वलित करना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।
क्यों निराशा के अंधकार में जीवन को व्यर्थ गँवाना
आशा के नवदीप जलाना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।
रात्रि चाहे कितनी भी गहन हो
प्रभात का स्वागत करना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।
क्यों भाग्य को कोसकर कर्म-पथ से विमुख होना
अपने श्रम से इतिहास रचना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।
क्यों मात्र स्वयं तक सीमित होकर जीना
परहित में अपना अस्तित्व खोजना तो सीखो
आखिर जिंदगी एक ही तो है।

One Comment
Excellant poem. Keep it up. God bless you Gauri.
Vidyanand Acharya