गौरी तिवारी
आओ मिलकर क्रांति लाएँ,
कलम से राष्ट्र का भाग्य रचाएँ।
ज्ञान के नव दीप जलाकर,
तम की घटाओं को दूर भगाएँ,
जन-जन के सुप्त विवेक को
सत्य-सुधा का पान कराएँ।
आओ मिलकर क्रांति लाएँ,
कलम से राष्ट्र का भाग्य रचाएँ।
लेखन सिर्फ एक शब्द नहीं है,
यह युग का जीवंत साक्ष्य है,
यह इतिहासों का साक्षी भी,
भविष्य का प्रथम विहान है।
मानवता के उच्च शिखर पर
विचारों का ध्वज फहराएँ।
आओ मिलकर क्रांति लाएँ,
कलम से राष्ट्र का भाग्य रचाएँ।
पत्रकारिता, बन एक पावन धारा
जनमन की अभिव्यक्ति बने,
वंचितों के अधरों की भाषा,
पीड़ितों की संवेदना बने।
सत्ता के सम्मुख सत्य रखे,
न्याय का पथ आलोकित पाए।
आओ मिलकर क्रांति लाएँ,
कलम से राष्ट्र का भाग्य रचाएँ।
जब मिथ्या के घन घिर आएँ,
जब धूमिल नैतिक मूल्य पड़ जाएँ,
तब निर्भीक कलम की ज्वाला से
नव युग का सूर्य उदित हो जाए
आओ मिलकर क्रांति लाएँ,
कलम से राष्ट्र का भाग्य रचाएँ।
एक लेखक युग का प्रहरी होता,
होता वह चेतन स्वप्नों का रचनाकार,
हर अक्षर में धड़कता है
जनगण का मौन हृदय
आओ परिवर्तन के स्वप्न को
लेखनी द्वारा मुमकिन बनाएं
आओ मिलकर क्रांति लाएँ
कलम से राष्ट्र का भाग्य रचाएँ।
