Breaking News :

nothing found

सितारों से जहान और भी है आगे….

अनिल तिवारी

 

अपना 200 वां अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैच खेल रहे लियोनेल मेसी ने अल्जीरिया के खिलाफ तीन गोल दाग कर दुनिया को दिखा दिया की टाइगर अभी भी जिंदा है। मेसी ने मैच के 17वें मिनट, 60वें मिनट तथा 76 वें मैं तीन गोल कर अल्जीरिया को तीन सुनने से हराया। विश्व कप में सबसे ज्यादा 16 गोल करने का रिकॉर्ड जर्मनी के क्लोजा के नाम है। मासी ने उसे रिकॉर्ड की बराबरी की तथा इसके साथ ही मेसी फुटबॉल वर्ल्ड कप में हैट्रिक लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बने।

लियोनेल मेस्सी 39 साल के हैं और अपना छठा विश्वकप खेल रहे हैं। बहुत सम्भव है कि इस विश्वकप के बाद वे अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल से संन्यास ले लें। हर लिहाज़ से यह उनका लास्ट-डैंस है , स्वैन-सॉन्ग है।

मेस्सी ने 16 जून 2006 को अपना पहला विश्वकप गोल किया था। ठीक 20 साल बाद उन्होंने इसी तारीख़ को अपना 16वाँ विश्वकप गोल करते हुए मिरोस्लाव क्लोज़ा के विश्व कीर्तिमान की बराबरी कर ली। उन्होंने अपनी पहली विश्वकप हैट्रिक भी जमाई।

मैं फुटबॉल के महान खिलाड़ी (हैंड आफ गाड ) माराडोना के युग से लगातार विश्व कप का एक सजग दर्शक रहा हूं। सिलाची रोनाल्डिन्हो नेमार के रोमांचक अनगिनत मातु को रिप्ले करके देखता रहा हूं।मुझे जून 2006 का वह मैच भली तरह से याद है। वह मेरे लिए कोई बहुत पुरानी बात नहीं है। हालांकि तब यह दुनिया बहुत अलग थी, हमारा जीवन बहुत भिन्न था। मेस्सी तब भी खेलते थे, मेस्सी आज भी खेल रहे हैं।

2006 के उस विश्वकप का सबसे बड़ा सितारा जिनेदिन जिदान थे, जो अकल्पनीय प्रदर्शन करते हुए फ्रांस को फ़ाइनल तक ले गए थे। हम और हमारे अभिन्न मित्र रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष इंदु प्रकाश सिंह उस रात दोनों लोग टीवी से चिपके हुए थे। मैदान पर जिदान के पैरों की जादूगरी के सब कायल थे। दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि प्रतिद्वंदी टीम के एक खिलाड़ी द्वारा की गई नस्ली टिप्पणी को जिदान बर्दाश्त नहीं कर पाए। उत्तेजना से जन्मी प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप उन्हें लाल कार्ड देखना पड़ा और भारी मन से वे मैदान से बाहर निकले।
बीती रात जब अर्जेन्तीना ने अल्जीरिया के सा​थ विश्वकप मैच खेला तो जिदान के बेटे लुका अल्जीरियाई टीम के गोलची थे। मेस्सी ने उन्हें छकाते हुए तीन बार गोल चौकी में सेंध लगाई। वे उनके पिता के विरुद्ध भी खेले हैं और अब पुत्र के विरुद्ध खेल रहे हैं। मेस्सी का खेल देखकर कोई नहीं कह सकता कि वे अपने कॅरियर की सन्ध्यावेला में हैं। वही चुस्ती, वही फुर्ती।

लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि मेस्सी की इस विस्मयकारी दीर्घजीविता का रहस्य क्या है?
इसका रहस्य यह है कि उनके खेल की शैली दत्तचित्त और शांतचित्त है। वे बरसों के रियाज़ी की तरह सधा हुआ खेल खेलते हैं। उनके खेल में कोई जल्दबाज़ी नहीं है, कोई आवेग नहीं है। वे कुछ साबित नहीं करना चाहते। जहाँ मेस्सी से प्रतिद्वंद्विता करने वाले, उनसे कहीं कमतर खिलाड़ी गोलों की झड़ी लगाते हैं और उन आँकड़ों को सामने रखकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने की कोशिश करते हैं, तब मेस्सी चुपचाप खेल की लय के साथ निबद्ध हो जाते हैं। व्यक्तिगत कीर्तिमानों की वो अधिक चिंता नहीं करते, इसके बावजूद तमाम कीर्तिमान उनका पीछा करते चले आते हैं।

मेस्सी इस खेल के प्राकृत-संगीत में डूबे हुए संन्यासी की तरह हैं और चीज़ें मानों अपने आप उनके इर्द-गिर्द रूपायित होती रहती हैं। उनके पास दूसरे खिलाड़ियों की तुलना में अधिक समय मालूम होता है। वे इत्मीनान से खेलते हैं। उन्हें मानो अपने प्रतिद्वंद्वियों के मूव का पूर्वाभास हो जाता है। वे एक हॉरिज़ॉन्टल-स्पेस में गति करने के बावजूद जाने कैसे आई-व्यू की विहंगम दृष्टि से खेल के समीकरणों और परिप्रेक्ष्यों को समझ लेते हैं। शतरंज के खेल में जिस तरह आगे की चाल दिमाग में बुनी जाती है, मेसी मैच के पहले मिनट में ही आखिरी मिनट तक का गुणा गणित कर लेते हैं। और एक रिदम के साथ आहिस्ता आहिस्ता उसे पर अमल करते रहते हैं। उन्हें खेलते हुए देखना एक अच्छी संगीत-रचना को सुनने की तरह है।

अभी कुछ दिन पहले ही मेसी ने एक टीवी साक्षात्कार में इस बात की तस्दीक की थी कि वर्ष 2026 का विश्व कप शायद उनका अंतिम मैच हो। इस मैच के बाद वे संन्यास ले सकते हैं। मेसी के प्रशंसक दुनिया भर में यत्र तत्र सर्वत्र फैले हुए हैं। फीफा वर्ल्ड कप के पहले वह भारत दौरे पर भी आए थे। कुछ लोग कहते हैं की उम्र सिर्फ गणित का एक अंक है। 16 -17- 18 साल के युवा खिलाड़ियों को पछाड़कर 39 साल के मेसी ने इसे साबित भी किया है। लेकिन शाश्वत और नैसर्गिक सच्चाई यही है की मेसी ने अपनी अल्हड़पन की उम्र पार कर ली है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल की दुनिया में ग्रीक गार्डन (43 वर्ष) रोनाल्डो (41 वर्ष) गुईलेर्मो ओचोवा (40 वर्ष) लुका मॉड्रिक (40 वर्ष) मैन्युअल नेवुर (40 वर्ष) के बाद पके हुए उम्र के खिलाड़ियों में मेस्सी की ही गिनती है।
पकी हुई उम्र में, पुरानी शराब जैसा यह मादक खिलाड़ी अब जब अपना अंतिम विश्वकप खेलने उतरा है तो हम अपने इस सौभाग्य पर केवल अनुग्रह ही अनुभव कर सकते हैं। हम भाग्यशाली हैं कि हमने इतने वर्षों तक मेस्सी को खेलते देखा है और अब भी देख रहे हैं। कहानी ख़त्म होने वाली है, पर अभी हुई नहीं है। हम एक महाकाव्य के समाप्त होने से ठीक पूर्व की वेला में हैं।

बीती रात मेस्सी ने तीन गोल किए। लेकिन उनका पहला गोल देखिये। मियामी में उनके सा​थ खेलने वाले, उनके सबसे क़रीबी दोस्त रोद्रीगो दी-पॉल ने बेशक एक बेजोड़ डिफेन्स-स्पिल्टिंग पास दिया था, लेकिन मेस्सी ने गेंद को जैसे रिसीव करके दो सेंटर बैक के बीच में से गोल को पिरोया, वह दर्शनीय था। मेस्सी गेंद से नाराज़ नहीं होते, उस पर ज़ोरदार प्रहार नहीं करते, उसे बस हलके स्पर्श से दिशा दे देते हैं और गेंद जैसे ग़ुब्बारे की तरह उड़ती हुई गोलपोस्ट के टॉप-कॉर्नर को सहला देती है।

मेस्सी ने इस तरह के सैकड़ों गोल किए हैं, लेकिन हर बार इनका जादू पहली बार की तरह चलता है। यह हर रोज़ सूर्य के उगने की तरह है, जिसका तिलिस्म इतनी सहस्राब्दियों में भी दोहराव से क्षीण नहीं हुआ है। मेस्सी ने यवनिका उठा दी है। विश्वकप सही मायनों में बीती रात शुरू हुआ है! हमारी आँखों के सामने महान-सौन्दर्य की सम्भावनाएँ सितारों के आँचल की तरह अब झिलमिलाने लगी हैं! आप भी फिक्रमंद मत होइए कि आगे मैदान पर मेस्सी शायद नहीं होंगे आप फक्र कीजिए की मेसी को खेलते हुए देख पा रहे हैं।

Read Previous

कलम की ताकत

Read Next

दूषित पानी से भी बढ़ रही है लिवर की समस्या

One Comment

  • Excellent

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular