न्यास का वेटिकन न्याय
अनिल तिवारी
बीते 12 दिसंबर 2021 को नागपुर की एक सभा में विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रविंद्र नारायण सिंह ने कहा था कि उनका और उनके मातृ संगठन का इरादा अयोध्या धाम को ‘वैटिकन सिटी’ की तर्ज पर विकसित करने का हैं। हालांकि तब तमाम संवेदनशील विशुद्ध भारतीयों को उनकी यह घोषणा नागवार गुजरी थी, लेकिन सरकारी भय के कारण किसी सनातनी ने ‘चूं’ तक नहीं किया था। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने आपत्ति दर्ज करते हुए इसे भारतीय परंपरा के विपरीत माना लेकिन वे भी सत्ता का रंग ढंग देख जल्दी ही खोल के भीतर समा गए। अब मर्यादा पुरुषोत्तम राम के मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर भाजपा की डबल इंजन सरकार ने जिस तरह सारा दारोमदार ट्रस्ट पर डाल किनारा कर लिया और ट्रस्ट ने अब तक जो कुछ भी किया उससे तो यही लग रहा है कि अयोध्या को वेटिकन बनाने का जो ब्लूप्रिंट विहिंप ने पेश किया था उसे अमली जामा पहनाया जाने लगा है।
पिछले एक महीने से देश दुनिया में शोर है कि अयोध्या मंदिर में चढ़ावा की चोरी हो रही है। चोरी का आरोप श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों चंपत बंसल, अनिल मिश्र और गोपाल राव सहित अन्य कर्मचारियों पर है। विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित तमाम लोग आरोपी चंपत बंसल को पाक साफ बताते हुए क्लीन चीट दे रहे हैं।
भारत में कानून का राज है।भारतीय न्याय संहिता में चोरी, डकैती,आर्थिक हेरा-फेरी, जुर्म है तथा इसकी जांच कर दोषी को सजा देने के स्थापित नियम प्रावधान है, जो भारत संघ के सभी राज्यों में समान रूप से लागू है।
लेकिन इस सनसनीखेज मामले में सारी कानूनी कार्यवाही अत्यंत अलग ढंग से की जा रही है। बताते हैं कि ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारी को चोरी का संज्ञान 5 जून को हो गया था। अगले दिन ट्रस्ट के महासचिव अनधिकृत रूप से पुलिस को साथ लेकर स्वयं ही कुछ आरोपियों के घर पर छापा मारने पहुंचे और 80 लाख रुपए बरामद किए जाने की बात सामने आई। प्रचलित कानून कहता है कि पुलिस की मौजूदगी में में हुई तलाशी और माल की बरामदगी के साथ ही आरोपियों के खिलाफ थाने में प्राथमिक की दर्ज कर बरामद रुपए को सरकारी माल-खाने में जमा करना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अलबत्ता 7 जून को ट्रस्ट के महासचिव बंसल ने मीडिया को बयान जारी कर कहा कि कोई उल्लेखनीय मामला प्रकाश में नहीं आया है, ट्रस्ट के ऑडिट का काम बदस्तूर चल रहा है।
चंपत बंसल के इस बयान के बाद चढ़ावा चोरी के खबर की आग पूरे देश दुनिया में फैलने लगी। विपक्षी दलों के साथ-साथ राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं ने भी उंगली उठाना शुरू कर दिया। बजरंग दल के अध्यक्ष विनय कटियार, संतोष दुबे आदि के साथ-साथ विपक्षी दलों ने भी मंदिर से बड़ी लूट की आशंका जाहिर की। भारत सरकार की ओर से नामित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र निर्माण समिति के अध्यक्ष पूर्व नौकरशाह नृपेंद्र मिश्र ने यह कहकर कि मंदिर में चोरी नहीं बल्कि डकैती हुई है उस आग में घी डालने का काम किया।
यत्र-तत्र-सर्वत्र ट्रस्ट की छिछालेदर होने लगी। बताते हैं कि जगहंसाई से बचने के लिए ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश की सरकार से जांच का अनुरोध किया, फिर मामले की जद में आ रहे हाई प्रोफाइल लोगों को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बिना प्राथमिकी के आनन-फानन में एक विशेष जांच दल की घोषणा की। जांच दल मुस्तैदी के साथ छानबीन कर अपनी अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। सूत्रों के मुताबिक अंतरिम रिपोर्ट लीक होकर ट्रस्ट के पदाधिकारी तक पहुंच गई। फिर ट्रस्ट के सदस्य की ओर से आठ आरोपियों के खिलाफ प्राथमिक की दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर उन सब की गिरफ्तारी हुई।
चूंकि सभी अपराधी मोटे तौर पर चंपत बंसल, अनिल मिश्र और गोपाल राव के भरोसेमंद लोग थे इसलिए इनके विरुद्ध जनाक्रोश आगे भी तारी रहा। इन तीनों को न्यास से हटाए जाने की मांग तेज होने लगी। विश्व हिंदू परिषद ने पहले एसआईटी जांच का हवाला दिया और कहा कि इस बारे में कोई भी निर्णय ट्रस्ट की बैठक में लिया जाएगा। जांच दल की फाइनल रिपोर्ट आने के पहले ही ट्रस्ट की बैठक हुई। बैठक में चंपत बंसल और अनिल मिश्र के इस्तीफे पर मुहर लगी, आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को बाहर कर दिया गया। कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का नया महासचिव चुने जाने तक के लिए कार्यकारी महासचिव घोषित किया गया। भविष्य में देखरेख के लिए एक सीईओ नियुक्त किए जाने की भी अनुशंसा बैठक में हुई।
कुल मिलाकर ट्रस्ट की बैठक में हू ब हू वही सब हुआ जिसकी चर्चा बहुत पहले से मीडिया और आम लोगों के बीच सरेआम थी। मसलन ट्रस्ट द्वारा चंपत बंसल की महानता की भूरि भूरि प्रशंसा की गई। चोरी में शामिल बड़े किरदारों को बाहर लाने की वजाय पकड़े गए छोटे अपराधियों के मत्थे मढकर पूरे प्रकरण को रफा दफा करने की कवायद की गई। चढ़ावा चोरी के मामले में ट्रस्ट पर उंगली उठी। ट्रस्ट ने खुद ही छापामारी कर माल बरामद किया। ट्रस्ट ने एसआईटी जांच की मांग की। ट्रस्ट ने जांच रिपोर्ट लीक की और उसी के आधार पर ट्रस्ट ने ही प्राथमिक की दर्ज कराई। ट्रस्ट ने बैठक बुलाई। ट्रस्ट ने दो ट्रस्टियों का इस्तीफा स्वीकार किया। और सबसे अंत में ट्रस्ट ने मुख्य आरोपी चंपत बंसल को कर्मठ, निष्कलंक, पाक साफ बताते हुए चढ़ावा चोरी पुराण का पहला अध्याय समाप्त किया। अथ द्वितीयो अध्याय का पन्ना 22 जुलाई को पलटने का निर्णय हुआ है।
बैठक के बाद न्यास के कोषाध्यक्ष ने सीमित प्रेस कॉन्फ्रेंस कर निर्णय की जानकारी दी और विशेष रूप से हिदायत दी की चंपत बंसल पर जो भी आरोप लगे हैं सब मनगढ़ंत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बंसल जी से किसी ने इस्तीफा नहीं मांगा। न्यास के अधिकांश सदस्य उनका इस्तीफा स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन न्यास के वरिष्ठ सदस्य पराशरन की परामर्श के बाद भारी मन से न्यास में उनका इस्तीफा स्वीकार किया है। प्रचलित जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के पहले ही निर्णायक अंदाज में उन्होंने क्लीन चीट दे दी। बिल्कुल वेटिकन की तरह अयोध्या के लिए बनाए जा रहे नए-नए कायदा कानून के अंदाज में।
कुछ सवाल
1- श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास का गठन उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर भारत सरकार द्वारा किया गया है? क्या सरकार ने न्यास गठन में उचित प्रतिनिधित्व, समता का अवसर जैसे संविधान सम्मत उद्देश्यों का पालन किया गया है?
यदि न्यास का गठन धार्मिक आधार पर हुआ है तो क्या हिंदू धर्म के चारों शंकराचार्य,सभी प्रमुख अखाड़ों , संप्रदायों का प्रतिनिधित्व या उनकी सहमति है?
2- नए और भव्य राम मंदिर का निर्माण सरकार द्वारा अधिग्रहित 67.7 एकड़ जमीन पर किया गया है जिसका पैसा सरकारी खजाने से जमा किया गया है। क्या भारत की जनता सूचना के अधिकार के तहत जानकारी हासिल कर सकेगी?
3- भव्य राम मंदिर निर्माण के साथ ही जमीन घोटाले के आरोप लगने लगे थे। इसे लेकर उत्तर प्रदेश की सरकार ने एक जांच दल गठित किया था, उसकी रिपोर्ट कब सार्वजनिक होगी?
4-आरोप है कि एक जमीन 2 करोड़ रुपए के मूल्य पर बेची गई, विक्रय पत्र पर जिन दो गवाहों के हस्ताक्षर हैं, वहीं जमीन 10 मिनट के बाद जब राम जन्मभूमि ट्रस्ट को 18 करोड़ में बेची गई उस पर भी उन्ही दोनों गवाहों के हस्ताक्षर हैं। क्या बिना दाखिल खारिज के एक जमीन 10 मिनट के अंदर दूसरे को बेची जा सकती है? क्या ऐसी कोई दूसरी नजीर देश के राजस्व विभाग में कहीं मौजूद है?
5-हालिया घटना के प्रकाश में आने के बाद न्यास प्राथमिकी दर्ज कराने की बजाय खुद ही पुलिस लेकर छापामारी करने पहुंच गया। जो पुलिस दल छापामारी करने गया था उनकी तैनाती कहां थी, बिना किसी प्राथमिक के वे किसके आदेश पर गए थे और गए थे तो क्या उनकी रवानगी पुलिस डायरी में प्रस्तुत है? उनकी आमद कब हुई इसका कोई उल्लेख है?
6-उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित जांच दल की रिपोर्ट कैसे लीक हुई, लीक रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट ने प्राथमिकी दर्ज कराई। जांच दल ने यह प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज कराई?
7-जांच की अंतिम रिपोर्ट अभी प्रतीक्षित है। बोर्ड की बैठक में नौ पन्नों की अंतरिम रिपोर्ट आधिकारिक रूप से कैसे दिखाई बताई गई?
8-न्यास के कोषाध्यक्ष ने बार-बार अपनी व्यस्तता का हवाला दिया है। उनके पास मंदिर के हिसाब किताब का समय नहीं है। वह अपना काम आउटसोर्सिंग के जरिए करते रहे हैं। इतने बड़े प्रकल्प के लिए आखिर उन्हीं को क्यों रखा गया है जबकि उनके पास कोई वित्तीय विशेषज्ञता भी नहीं है?
इस तरह के ढेर सारे सवाल उठे हैं। विश्व हिंदू परिषद के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिष्ठा पर भी बट्टा लगा है।विपक्षी पार्टियां केंद्र और राज्य की सरकार को दोषी ठहराते हुए जवाब मांग रही हैं। आमजन चढ़ावा चोरी की घटना से स्तब्ध है। अपने अपने स्वार्थ के हिसाब से लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं। कुछ ऐसे भी नामचीन लोग निकल कर आए हैं जो अपने चंदे चढ़ावे का हिसाब मांग रहे हैं। एक कोई पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह है जो अपने खानदान की पूरी कमाई से रामचरितमानस बनवाकर चढ़ा आए थे। अब उसे खोज रहे हैं। ट्रस्ट ने जब प्रदर्शित किया तब से चुप हैं।
भारत में धर्म की अद्भुत महता है। हमारे यहां दान का अलग प्रावधान है और कानूनी विधान भी है। व्यवहार और कानून दोनों की नजर में एक बार जो चीज दान कर दी गई, फिर घूम कर उसकी तहकीकात नहीं की जाती। हमारे देश में जितने भी धार्मिक मंदिर बने हैं उनमें राजे राजवाड़े से लेकर आम जनता के दान शामिल हैं। आज तक कभी किसी ने अपने दिए हुए दान की तहकीकात नहीं की। भारत की आम जनता श्रद्धा से अयोध्या जाती है तथा अपनी शक्ति और सामर्थ्य के हिसाब से जो कुछ भी बन पड़ता है, अपने राघव राजा राम की सेवा में अर्पित करती है। भारत की आम जनता को दान का हिसाब नहीं चाहिए। भारत का लोक मन जो दे दिया सो दे दिया वाला है।
लेकिन मंदिर में जिस डकैती का संकेत मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ने किया है वह लज्जा जनक है। कलंक है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम की मर्यादा को तार-तार करने वाला है। अयोध्या को पोप नगरी (वेटिकन सिटी) की तर्ज पर विकसित करने वालों का पाप पकड़ गया है, उन्हें वेटिकन की तरह नए कानून से डील करने की वजाय भारतीय न्याय संहिता मे स्थापित कानून के हिसाब से सजा स्वीकार कर प्रायश्चित करना चाहिए। घट घट व्यापी राम सब देख रहे हैं। राम के दास बाबा तुलसी ने तो सैकड़ो साल पहले ही देख लिया था और रामचरितमानस के बालकांड में ही ऐसे लोगों के लिए लिख दिया था,
वंचक भगत कहाइ राम के। किंकर कंचन कोह काम के।।
