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काव्य कोना
मानव और पशु

मानव और पशु

गौरी तिवारी   पशुओं पर दोष मढ़कर मानव बचता आया है, अपने मन का हर अँधियारा उनके सिर पर थोपता आया है। गधा बना आलस्य का प्रतीक, बैल कहा गया जड़ बुद्धि, लोमड़ियों पर छल

साहित्य
माँ की साड़ी

माँ की साड़ी

‍गौरी तिवारी    कई बार वस्त्र, एक विरासत या धरोहर की भांति अपने भीतर सुख-दुःख के पल तथा अनेक तरह की स्मृतियां संजोए होते हैं। यदि वह वस्त्र साड़ी है तो एक बेटी के लिए

काव्य कोना
जंजीरें

जंजीरें

’गौरी तिवारी    लोगों को पसंद आती है आसमान में उड़ती पतंग अपने मुताबिक खींच लें जिसकी उड़ान की बागडोर पर खराब लगते हैं सारे बंधनों को तोड़ बेखौफ उड़ते डेंडेलिया के फूल जो बढ़ते

धर्म-कर्म
बल, बुद्धि, विद्या के सागर हनुमान

बल, बुद्धि, विद्या के सागर हनुमान

अतुलित विद्या के सागर, अष्ट सिद्धि नवनिधियों के दाता हनुमान वनवासी आदिम कपीस जनजाति में पैदा हुए थे। इनके पिता का नाम केसरी और माता का नाम अंजना था। ये अपने माता पिता के छ

देश-दुनिया
ढुलमुल वांगचुक यानी थाली के बैंगन

ढुलमुल वांगचुक यानी थाली के बैंगन

सरकार ने बैठाया और सरकार ने ही उठाया   अनिल तिवारी    राहत और स्वागत की बात है कि पिछले 25 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक अपनी पत्नी गीतांजलि की मौजूदगी में

विश्लेषण
चन्द्रशेखर आजाद की जयंती पर विशेष

चन्द्रशेखर आजाद की जयंती पर विशेष

परम्परा एवं प्रगतिशीलता के समन्वय   चंद्रशेखर आजाद का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था, जो पारम्परिक रूढ़ियों से मुक्त नहीं था। यों भी उस समय के समाज में आज की तुलना में अधिक

विचार
प्रजातंत्र और जन भागीदारी

प्रजातंत्र और जन भागीदारी

अनिल तिवारी   भारतवर्ष अपने आजादी का अमृत काल के गौरव का आनंद लेते हुए 76वां गणतंत्र दिवस मनाने के करीब पहुंच चुका है। 26 जनवरी 1950 में गणतंत्र बना भारत तमाम उपलब्धियां हासिल कर

विश्लेषण
गांवों में भी बढ़ी फोटो एल्बम की जगह रील्स की मांग

गांवों में भी बढ़ी फोटो एल्बम की जगह रील्स की मांग

डिजिटल कंटेंट क्रिएशन   शिवनंदन लाल    ग्रामीण युवाओं के लिए डिजिटल कंटेंट क्रिएशन रोजगार और स्वरोजगार का एक बेहतरीन माध्यम बन रहा है। ग्रामीण युवा अपने स्मार्टफोन और इंटरनेट का उपयोग करके कृषि, बागवानी,

काव्य कोना
साक्ष्य (कविता)

साक्ष्य (कविता)

गौरी तिवारी    आँखें होती हैं साक्ष्य कभी इतिहास और भूगोल की कभी राजनीति और भ्रष्टाचार की कभी युद्ध और मानवता के पतन की कभी भुखमरी और निर्धनता की कभी क्रांति और संघर्ष की तो

विचार
घोषित इमरजेंसी बनाम अघोषित आपातकाल

घोषित इमरजेंसी बनाम अघोषित आपातकाल

  वरुण कुमार पांडे   कहते हैं इतिहास सब कुछ दर्ज करता है। निरंतर चल रही घटनाओं को साक्षी भाव से सहेज कर रखता है और समय आने पर आईने की तरह ब्लैक एंड व्हाइट