कुर्सी की राजनीति
गौरी तिवारी कुर्सी के लोभ में राजनीति अक्सर व्यापार बन जाती है स्वार्थ की विषैली धारा लोकतंत्र के निर्झर में घुल जाती है सेवा की पावन चौखट पर सत्ता का व्यापार सजा, जनविश्वासों के
गौरी तिवारी कुर्सी के लोभ में राजनीति अक्सर व्यापार बन जाती है स्वार्थ की विषैली धारा लोकतंत्र के निर्झर में घुल जाती है सेवा की पावन चौखट पर सत्ता का व्यापार सजा, जनविश्वासों के
नथून शाह गोंड वर्तमान की नरेंद्र मोदी सरकार ने वर्ष 2014 के बाद से देश में कई नई परंपराओं की शुरुआत की है, जिनमें से एक है - 'संविधान हत्या दिवस'। वर्ष 2024 में
अनिल तिवारी उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव समय से पहले कराए जाने की अटकलें जोरों पर है! हालांकि अयोध्या राम मंदिर से चढ़ावा चोरी के मामले उजागर होने के बाद आए ठीठकाव से
गौरी तिवारी शहर के एक छोटे निजी चिकित्सालय में उस दिन असामान्य भीड़ थी, किसी को बुखार था, कोई खाँसी से परेशान था, कोई पेट दर्द से कराह रहा था। उन्हीं मरीजों के बीच
गौरी तिवारी भूख ज्वालामुखी का लावा बन, दरिद्र के जीवन को तपाती है सूनी थाली की मौन व्यथा हर संध्या आँसू गाती है नन्हीं आँखें जब रोटी ढूँढ़ें, माँ अश्रुपूर्ण नेत्र झुका लेती खाली