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साहित्य
पी.टी.एम (कहानी)

पी.टी.एम (कहानी)

गौरी तिवारी   कोई भी व्यक्ति दोषरहित या एकदम सही नहीं होता, उसमें कोई न कोई कमी अवश्य होती है, किंतु कमियों के बावजूद वह किसी एक क्षेत्र में उत्तम होता है। मुझे भी यह

देश-दुनिया
संतों, आई ज्ञान की आंधी

संतों, आई ज्ञान की आंधी

ढोंगी बाबाओं की जमात में एक और नाम अशोक खरात अनिल तिवारी ---------- हमारे देश में इन दिनों ज्ञान परंपरा का उत्सव चल रहा है। अच्छे-बुरे, राजा-प्रजा संत-असंत सभी अपनी-अपनी ज्ञान गंगा में गोता लगा

विचार
देवी और श्रृंखला की कड़ियां

देवी और श्रृंखला की कड़ियां

गौरी तिवारी     मैं एक स्त्री हूं हां, हां , मैं एक साधारण मनुष्य हूं मत कहे ये समाज सम्मानित कर देवी ना ही गिरा दे आसमान से कह कर दानवी क्योंकि मैं भी

धर्म-कर्म
भाव, कुभाव, अनख, आलसहूं

भाव, कुभाव, अनख, आलसहूं

अनिल तिवारी   ऋषि मार्कंडेय ने दुर्गा सप्तशती के पांचवें अध्याय में कहा है, 'या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता'। और अगली पंक्ति में नमस्तस्यै,नमस्तस्यै,नमस्तस्यै नमो नमः कहकर मां को बार-बार प्रणाम किया है। मां सभी

धर्म-कर्म
संवत्सरफल और समय की दिशा का संकेत

संवत्सरफल और समय की दिशा का संकेत

   ज्योतिषाचार्य अरुण कुमार मिश्र   मानव जीवन केवल वर्तमान घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि समय, प्रकृति और चेतना के गहरे संबंधों का परिणाम है। भारतीय ज्योतिष परंपरा में संवत्सरफल इसी गूढ़ संबंध का सूक्ष्म

देश-दुनिया
बंगाल में फिर चलेगा ममता का जादू?

बंगाल में फिर चलेगा ममता का जादू?

अल्पसंख्यकों के मोहल्ले से गुजरता है बंगाल की सत्ता का रास्ता  अनिल तिवारी   इन दिनों फिल्म धुरंधर 2 के खलनायक का डायलॉग 'दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर जाता है' दर्शकों के सिर चढ़कर

विचार
विकास और विडम्बना

विकास और विडम्बना

गौरी तिवारी   बदलाव एक धीमी प्रक्रिया है किन्तु हर बदलाव अपने साथ विकास लेकर आता है। विकास शब्द सुनते ही हमारे मन में एक उजली, प्रगतिशील और उन्नत दुनिया की छवि उभरती है। ऊँची-ऊँची

साहित्य
सड़क ने गाँव खाली कर दिए

सड़क ने गाँव खाली कर दिए

सड़क ने गाँव खाली कर दिए : विकास की राह पर छूटती मिट्टी की महक एक समय था जब अरुणोदय पक्षियों के कलरव से होता था, और शाम चूल्हे की आँच के साथ ढलती थीं।

साहित्य
बाल साहित्य

बाल साहित्य

प्रकृति का चमत्कार   अरे गुड़िया उठ भी जाओ, स्कूल नहीं जाना क्या? देर हो रही है।" माधव पिछले 15 मिनट से अपनी बेटी को जगाने की कोशिश कर रहा था। आज इस नई जगह

साहित्य
स्त्री

स्त्री

वह भोली थी जब तक गलतियां माफ करती गई वह बुरी हो गई जब स्वाभिमानी बन गई वह अच्छी थी जब तक सब सहती गई वह बदतमीज हो गई जब अपने हक के लिए बोल