घर में नहीं है दाने, अम्मा चली भुजाने
अनिल तिवारी ----------------- अपना महान भारत देश प्राकृतिक, नैसर्गिक और स्वाभाविक रूप से एक शुद्ध चित्त दार्शनिक देश भी है। यही कारण है कि हर भारतीय विभिन्न धार्मिक और दार्शनिक मान्यताओं पर खुले दिल से
अनिल तिवारी ----------------- अपना महान भारत देश प्राकृतिक, नैसर्गिक और स्वाभाविक रूप से एक शुद्ध चित्त दार्शनिक देश भी है। यही कारण है कि हर भारतीय विभिन्न धार्मिक और दार्शनिक मान्यताओं पर खुले दिल से
गौरी तिवारी जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, और इस देश के गांव ही वह जड़ें हैं जिनसे शहर विकसित होते हैं। यहां का एक बहुत
गौरी तिवारी पुराना जख्म अभी भरा भी नहीं था कि फिर किसी के चीखने की आवाज आती है, बेल्ट कि वह धारियां जब शरीर पर लगती है तो ममता अपनी पूरी कोशिश करती है
हकीकत कम, फसाना ज्यादा अनिल तिवारी असम विधानसभा चुनाव में मतदान की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है राजनीतिक दलों की गतिविधियां तो तेज हो ही गई है बयानों में तल्ख़ियां भी बढ़ती जा रही
अब यह मात्र कोई व्यथा नहीं, यह भीतर उठता प्रलय निनाद है मन रूपी ज्वालामुखी के गर्भ में सदियों से पलता हुआ यह प्रतिशोध अगाध है इस विश्व में रेखाएँ नहीं, जंजीरें खिंची हैं जहां
भूत की याद में भविष्य के इंतजार में वर्तमान को भूल मत वर्तमान को भूल मत समय ना कभी रुका है और ना कभी रुकेगा तू खुद पर हौसला रख तभी तो आगे बढ़ेगा समय
गौरी तिवारी जो विरह की वेदना से निकले वह अश्रु हूं मैं जो विरह के ताप से तपे वह क्रोध हूं मैं जो विरह के वेग से शांत हो जाए वह जल हूं मैं जो
गौरी तिवारी कोई भी व्यक्ति दोषरहित या एकदम सही नहीं होता, उसमें कोई न कोई कमी अवश्य होती है, किंतु कमियों के बावजूद वह किसी एक क्षेत्र में उत्तम होता है। मुझे भी यह
ढोंगी बाबाओं की जमात में एक और नाम अशोक खरात अनिल तिवारी ---------- हमारे देश में इन दिनों ज्ञान परंपरा का उत्सव चल रहा है। अच्छे-बुरे, राजा-प्रजा संत-असंत सभी अपनी-अपनी ज्ञान गंगा में गोता लगा
गौरी तिवारी मैं एक स्त्री हूं हां, हां , मैं एक साधारण मनुष्य हूं मत कहे ये समाज सम्मानित कर देवी ना ही गिरा दे आसमान से कह कर दानवी क्योंकि मैं भी