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Author: KALRAV

KALRAV

साहित्य
कविता

कविता

गौरी तिवारी   हां, मैं नहीं हूं बेघर पर मैंने देखा है सर्द रात में ठिठुरती जिंदा लाशों को देखा है मैंने मृत्यु से भयहीन आंखों को हां, मैं कह सकती हूं मैंने समझा है

देश-दुनिया
ईरान संकट के कारण भारत को संतुलित करनी होगी अपनी विदेश नीति

ईरान संकट के कारण भारत को संतुलित करनी होगी अपनी विदेश नीति

अनिल तिवारी --------   अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा घमासान जैसे-जैसे लंबा खींच रहा है एशियाई देशों में चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही है। घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों के दाम में सरकार द्वारा

देश-दुनिया
दर्द में जीने से अच्छा है सुकून से मरने का फैसला

दर्द में जीने से अच्छा है सुकून से मरने का फैसला

अनिल तिवारी -------------- जीवन-मरण के प्रसंग में किसी ने महात्मा विदुर से पूछा कि मनुष्य क्यों जन्म लेता है? उनका उत्तर था, मरने के लिए। प्रश्नकर्ता ने दोहराया कि जब जीवन का लक्ष्य मरना ही

साहित्य
एक खूबसूरत रिवाज़

एक खूबसूरत रिवाज़

अनिल तिवारी   "खूबसूरत रिवाज होता है प्रेम में, कभी न मिलने वालों की भी राहें देखी जाती है।" आजकल सामाजिक संचार माध्यम (सोशल मीडिया) के मंचों पर इन पंक्तियों को बार-बार दोहराया जा रहा

साहित्य
न बैठ यूं तू हार कर

न बैठ यूं तू हार कर

न बैठ यूं तू हार कर चल फिर से एक वार कर न रख तलवार को यूं म्यान में रख लक्ष्य को अपने ध्यान में बस तू चल दे तेरे निशान ज़मीं पे कुछ यूं

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दिल बहलाने के लिए अच्छा है क्रिकेट का ‘बीसम-बीस

दिल बहलाने के लिए अच्छा है क्रिकेट का ‘बीसम-बीस

अनिल तिवारी -------- देश में चारों तरफ भारतीय क्रिकेट टीम की जीत की वाह-वाही है। आठवीं बार विश्व कप जीतने का आनंद है। यहां वहां जहां-तहां हर जगह जश्न का जोर है। धूम-धड़ाका है। देश

साहित्य
‘एक और विभाजन’ की समीक्षा

‘एक और विभाजन’ की समीक्षा

साहित्य की परंपरा में कुछ कृतियां ऐसी होती हैं जो मात्र किसी कथा का विस्तार नहीं करती अभी तो समझ में छपी पीड़ा विडंबना और प्रश्नों को उजागर करती हैं। ऐसे ही विचार उत्तेजक कृति

विचार
जुर्म जिसकी माफी नहीं

जुर्म जिसकी माफी नहीं

गौरी तिवारी अक्सर हमारे साथ ऐसी घटनाएं घटित होती हैं जिनका महत्व एक सागर में मोती के समान होता है लेकिन फिर भी दिन के 24 घंटों में घटित 5 से 10 मिनट की घटना

विचार
बड़े बेआबरू होकर बिहार से निकले नीतीश कुमार

बड़े बेआबरू होकर बिहार से निकले नीतीश कुमार

अनिल तिवारी -------- नीतीश कुमार के क्रमिक राजनीतिक उत्थान और तेज़ गिरावट को समझाना इतना आसान नहीं है। कुछ वर्ष पहले तक नीतीश को प्रधानमंत्री पद के योग्य “पीएम मैटेरियल” के रूप में देखा जा

साहित्य
पितृ-प्रेम (लघुकथा)

पितृ-प्रेम (लघुकथा)

गौरी तिवारी चंदनिया छुप जाना रे, क्षण भर को लुक जाना रे निंदिया आँखों में आए, बिटिया मेरी सो जाए ले के गोद में सुलाऊँ, गाऊँ रात भर सुनाऊँ मैं लोरी-लोरी, हो, मैं लोरी-लोरी लोरी