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Author: KALRAV

KALRAV

साहित्य
स्वतंत्रता संग्राम (कविता)

स्वतंत्रता संग्राम (कविता)

गौरी तिवारी यह कथा है हिंदुस्तान की स्वाधीनता संग्राम की शहीदों का लहू है मिट्टी में यहां की ये गाथा है वीरों वीरांगनाओं की   जहां राज्य हथियाने डलहौजी ने षड्यंत्र रचाया था वह मंगल

Uncategorized
हानि-लाभ से आगे बढ़ मेल- मिलाप का त्यौहार है ‘होली’

हानि-लाभ से आगे बढ़ मेल- मिलाप का त्यौहार है ‘होली’

अनिल तिवारी ------- प्रसिद्ध चिंतक आइजनहावर ने अपने दिल की इच्छा व्यक्त की थी 'हमारी यह दुनिया भय और घृणा का भयानक समुदाय बनने से बचे और यहां विश्वास, सम्मान और सह अस्तित्व कायम हो'

साहित्य
मैं सोच रहा हूं अगर तीसरा युद्ध हुआ तो (कविता)

मैं सोच रहा हूं अगर तीसरा युद्ध हुआ तो (कविता)

गोपालदास नीरज  अमर उजाला (काव्य डेस्क) मैं सोच रहा हूँ अगर तीसरा युद्ध हुआ तो, इस नई सुबह की नई फसल का क्या होगा। मैं सोच रहा हूँ गर जमीं पर उगा खून, इस रंग

देश-दुनिया
शांति वार्ता की नौटंकी के बीच युद्ध की दुंदुभी से पश्चिम एशिया  हलकान

शांति वार्ता की नौटंकी के बीच युद्ध की दुंदुभी से पश्चिम एशिया हलकान

युद्ध के लंबा खींचने के आसार ------ अनिल तिवारी ----- ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए ओमान की मध्यस्थता में शांति वार्ता चल रही थी। इसराइल के साथ साझेदारी को मजबूत करने

साहित्य
नैक का चक्कर (कहानी)

नैक का चक्कर (कहानी)

डॉ॰ अनिल कुमार सिंह प्राध्यापक,हिंदी विभाग आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय, दिल्ली विश्विद्यालय     रोहतक से जींद वाली सड़क पर गोहाना से लगभग दो-तीन किलोमीटर आगे बाई ओर एक पतली सी सड़क निकलती है। यह

साहित्य
दिनकर : मुक्ति का लोक गायक

दिनकर : मुक्ति का लोक गायक

पिछली सदी बड़ी प्रतिभाओं के जन्म और कर्म की सदी थी, यह उनकी जयंतियों, पिंडदानों एवं कर्मकांडों की सदी है। वह गदरचियों के प्रतिकार का दौर था, यह विदोरचियों के प्रचार का दौर है, वह

साहित्य
हर घर में तिरंगा हो

हर घर में तिरंगा हो

~ डॉ. अशोक कुमार पाण्डेय दंत चिकित्सा विभाग, राम मनोहर लोहिया अस्पताल, दिल्ली   सब में ज्ञान की गंगा हो कोई भूखा ना नंगा हो इंसान लोगों से जंग न हो ना कहीं कोई दंगा

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होली का वह दिन

होली का वह दिन

गौरी तिवारी   कई बार ऐसा लगता है मानो, खुले नीले अंबर के नीचे रहने के बावजूद आपका दम घुट रहा है, उन्मुक्त होने के बावजूद ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो बेड़ियों ने आपको

साहित्य
हिंदी साहित्य में नदी

हिंदी साहित्य में नदी

नदी एवं साहित्य में यह बुनियादी फर्क है कि नदी एक ही दिशा में अनंतकाल तक बहती रहती है, जबकि प्रत्येक मौलिक साहित्य एक नई दिशा लेकर आता है। वह तमाम तरह की सामाजिक जड़ताओं

साहित्य
सिनेमा के आईने में मुस्लिम समाज

सिनेमा के आईने में मुस्लिम समाज

सच एक ऐसा शब्द है, जिसे बोलने का इस देश में दावा तो हर आदमी करता है. मगर यह बोला बहुत कम ही जाता है। यह एक अदभूत संयोग है कि हमारी मूक फिल्मों की