हिमांशु जयहिंद बहुत लंबे समय से ‘लपूझन्ना’ मेरी पुस्तकों के रैक में पड़ी रही। इस मई माह की गर्मी में जब कहीं बाहर...
गौरी तिवारी ममता के दामन में धरा ने हमें समाया है पेड़ पौधों और जल के सागर से हमारा ये जीवन सजाया है।...
गौरी तिवारी सुबह आठ बजे आरव भारी बस्ता पीठ पर लटकाए विद्यालय जाने के लिए बस पकड़ने जा रहा था। उसकी चाल में...
गौरी तिवारी एक कली थी जन्मी फाल्गुन में मुख पर तेज, अधरों पर मुस्कान लिए, दुखों की थी घोर घटा, उन कष्टों में,...
गौरी तिवारी अचानक दोपहर में लाउडस्पीकर के शोर के कारण घर की खिड़कियों में कम्पन होने लगा, मानो भूकंप आया हो और खिड़कियां...
गौरी तिवारी ऐसा क्यों होता है हर सपना पूरा होने से पहले ही टूट कर बिखर जाता है ऐसा क्यों होता है हर...
ईश्वर और उतरन “मैडम जी भइया का कोई पुराना बैग हो तो मुझे दे दीजिएगा, मेरी पूजा का बैग फट गया है।”...
गौरी तिवारी आज भी हिंदी साहित्य के विद्वान तथा प्रमुख आचार्य, महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की रचनाओं को पढ़ते ही उन रचनाओं की...
गौरी तिवारी बेटी मेरी तुझे लोरी सुनाऊँ लोरी में कहानी मैं अपनी बतलाऊँ कहानी में दुनिया की रीत से मिलवाऊँ आ बेटी तुझे...
गौरी तिवारी तुम वह मधुर गीत हो मेरे अंतर्मन की भावनाओं की तुम वह पहली मंज़िल हो मेरे इस कठिन जीवन सफर...