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ज्ञान-विज्ञान
स्वास्थ्य में आड़े आता अंधविश्वास और रूढ़िवाद

स्वास्थ्य में आड़े आता अंधविश्वास और रूढ़िवाद

शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के अभाव में अक्सर लोग कई प्रकार की बीमारियों का शिकार हो जाया करते हैं। इतना ही नहीं, कई बार यह भी देखने में आता है कि बिना

देश-दुनिया
कैसे बहाल हो परीक्षाओं पर छात्रों का भरोसा?

कैसे बहाल हो परीक्षाओं पर छात्रों का भरोसा?

अनिल तिवारी देर आए, दुरुस्त आए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार परीक्षा प्रणाली की गड़बड़ियों के लिए खुद को जिम्मेवार बताते हुए दोषी लोगों पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि

देश-दुनिया
खतरनाक है गर्मी की आपदा

खतरनाक है गर्मी की आपदा

डॉ दिनेश प्रसाद मिश्रा ------------ प्रसिद्ध प्रकृतिवादी इतिहासकार डेविड एटनबरो ने कुछ समय पहले एक सेमिनार के दौरान अपने हालिया शोध के आधार पर चेतावनी दी थी, "भीषण गर्मी केवल असुविधा नहीं है, यह मानव

साहित्य
ज़िन्दगी (कविता)

ज़िन्दगी (कविता)

गौरी तिवारी  क्यों व्यर्थ अतीत की स्मृतियों में बंधे रहना वर्तमान के मधुर क्षणों को संजोना तो सीखो आखिर जिंदगी एक ही तो है। जीवन ओस-बिंदु सा क्षणिक है इसे हर्ष के आलोक से भरना

साहित्य
आगा खान महल के बहाने हिंदी की बातें

आगा खान महल के बहाने हिंदी की बातें

गौरी तिवारी ------------------- आज मुझे अपनी बड़ी बुआ (शोभा तिवारी) के साथ आगाखान महल देखने का अवसर प्राप्त हुआ। मूला नदी के किनारे स्थित पुणे के कल्याणी नगर-यरवड़ा क्षेत्र में सुल्तान मुहम्मद शाह आगाखान तृतीय

देश-दुनिया
कस-बल ढीले पड़े तो साथ आये चीन और अमेरिका

कस-बल ढीले पड़े तो साथ आये चीन और अमेरिका

वैश्विक चुनौतियों के मद्देनजर भारत को चाहिए नई तरकीब अनिल तिवारी ------------ कूटनीति में जब बात की तासीर बदलने लगे तो माना जाता है कि परदे के पीछे कोई नया जाल बुना जा रहा है।

साहित्य
‘लपूझन्ना’: अंधेरे दौर में चमकते सितारों की कथा

‘लपूझन्ना’: अंधेरे दौर में चमकते सितारों की कथा

हिमांशु जयहिंद बहुत लंबे समय से 'लपूझन्ना' मेरी पुस्तकों के रैक में पड़ी रही। इस मई माह की गर्मी में जब कहीं बाहर जाने का मन नहीं करता तब घर बैठकर खाली समय में उसे

साहित्य
पर्यावरण (कविता)

पर्यावरण (कविता)

गौरी तिवारी ममता के दामन में धरा ने हमें समाया है पेड़ पौधों और जल के सागर से हमारा ये जीवन सजाया है। ये ऋण है हमारी धरा का जो हमे चुकाना है स्वच्छ,शीतल वायु

साहित्य
अनुशासन

अनुशासन

गौरी तिवारी सुबह आठ बजे आरव भारी बस्ता पीठ पर लटकाए विद्यालय जाने के लिए बस पकड़ने जा रहा था। उसकी चाल में किसी 10 वर्ष के बालक जैसी स्फूर्ति नहीं, अपितु किसी वृद्ध मजदूर

देश-दुनिया
सुधरे नहीं, टूटते ही चले गए….

सुधरे नहीं, टूटते ही चले गए….

समाजवाद के 92 बरस  अनिल तिवारी ----------- देश भर में समाजवादी प्रधानमंत्री रहे चंद्रशेखर जी का जन्म शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। इस उपलक्ष में देश के कोने कोने में आए दिन कोई ना