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साहित्य
लघुकथा

लघुकथा

ईश्वर और उतरन   "मैडम जी भइया का कोई पुराना बैग हो तो मुझे दे दीजिएगा, मेरी पूजा का बैग फट गया है।" कालू झाडू लगाते-लगाते मैंने बोला- "ठीक है कालू, पलंग के बॉक्स में

साहित्य
महावीर प्रसाद द्विवेदी और नवजागरण

महावीर प्रसाद द्विवेदी और नवजागरण

गौरी तिवारी आज भी हिंदी साहित्य के विद्वान तथा प्रमुख आचार्य, महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की रचनाओं को पढ़ते ही उन रचनाओं की प्रासंगिकता भली भांति सिद्ध होती है। हिंदी साहित्य के इतिहास में 'द्विवेदी

विचार
शोषण के लिए धर्म, लोक परलोक, स्वर्ग-नरक की काल्पनिक बातें

शोषण के लिए धर्म, लोक परलोक, स्वर्ग-नरक की काल्पनिक बातें

आलोक जयहिंद   भारत की लगभग 80 प्रतिशत धर्मभीरु जनता इसी बात में बुरी तरह उलझी हुई है कि, 'ऊपरवाला किस्मत लिखता है, वो सब देखता है, वो हमारे पाप-पुण्य का हिसाब रखता है, जीवन-मरण

देश-दुनिया
जरुरी नागरिक चेतना के लिए कब होगा बदलाव

जरुरी नागरिक चेतना के लिए कब होगा बदलाव

अनिल तिवारी -------- अमूमन चुनावी नतीजों के बाद खोया-पाया के आधार पर हारे हुए राजनीतिक दल हार के कारणों पर गौर करते हुए आगे के लिए खुद को दुरुस्त करते हैं तो जीतने वाले जनता

विचार
भारतीय राजनीतिक आकाश के सूरज हैं गांधी

भारतीय राजनीतिक आकाश के सूरज हैं गांधी

अनिल तिवारी   आज भारतीय समाज के कुछ लोग इस गीत, "दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल" को लेकर गांधी पर निशाना साधते हैं। क्या गांधी

साहित्य
आत्मरक्षा (लघुकथा)

आत्मरक्षा (लघुकथा)

गौरी तिवारी  बेटी मेरी तुझे लोरी सुनाऊँ लोरी में कहानी मैं अपनी बतलाऊँ कहानी में दुनिया की रीत से मिलवाऊँ आ बेटी तुझे अपनी गोद में सुलाऊँ सावित्री अपनी सहमी हुई 12 वर्षीय बेटी नैना

देश-दुनिया
यह तो होना ही था !

यह तो होना ही था !

अनिल तिवारी ---------- कह सकते हैं कि पश्चिम बंगाल पर जनादेश तो कबके लिखे हुए थे, इसकी घोषणा भर आज (4 मई 2026) हुई है। खालिस ध्रुवीकरण की बिसात पर लड़े गए पश्चिम बंगाल के

साहित्य
मेरा संसार (कविता)

मेरा संसार (कविता)

गौरी तिवारी    तुम वह मधुर गीत हो  मेरे अंतर्मन की भावनाओं की  तुम वह पहली मंज़िल हो  मेरे इस कठिन जीवन सफर की  तुम वह शब्दों से परे भाव हो  मेरे हर प्रिय काव्य

साहित्य
कलरव, सितम्बर 2007

कलरव, सितम्बर 2007

कलरव सितम्बर 2007   मासिक पत्रिका कलरव, वर्ष 2007 के सितम्बर माह का अंक।

साहित्य
मानवता परमो धर्मः (लघुकथा)

मानवता परमो धर्मः (लघुकथा)

गौरी तिवारी शाम में ही काले बादलों ने आकाश को रजनी की चादर ओढ़ा दी, आखिर इतनी तेज़ बारिश जो हो रही थी। कम होने की जगह लगातार तेज़ होती जा रही थी। एक ओर