गलती का अहसास (बाल कहानी)
गौरी तिवारी रोहन सातवीं कक्षा का विद्यार्थी था। उसका स्वभाव अत्यंत चंचल तथा मिलनसार था, उसमें एक अच्छी बात थी कि वह हमेशा दूसरों की मदद करना चाहता था। लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमी
गौरी तिवारी रोहन सातवीं कक्षा का विद्यार्थी था। उसका स्वभाव अत्यंत चंचल तथा मिलनसार था, उसमें एक अच्छी बात थी कि वह हमेशा दूसरों की मदद करना चाहता था। लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमी
गौरी तिवारी भोर क्षितिज की दहलीज़ पर चुपके से दीप जलाती है, नींद भरे वन के आँगन में धीरे-धीरे गीत सुनाती है। किरणें नन्हीं बालिकाएँ बन ओस-मोती चुनती जातीं, सूनी पगडंडी के पर स्वर्णिम
गौरी तिवारी संध्या का अंधेरा धीरे-धीरे घर की खिड़कियों पर उतर रहा था। बैठक में रखे टेलीविज़न की रोशनी कमरे में गंभीरता बिखेर रही थी। सोफ़े पर बैठे विनोद समाचार चैनल पर प्रसारित एक
लोकतंत्र यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति का अधिकार अनिल तिवारी जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित राष्ट्रीय आपातकाल की 51वीं बरसी भारतीय लोकतंत्र के लिए एक
रोमन अंग्रेजी में लिखें तो भगत और भारत में एक अक्षर का अंतर है, लेकिन गरीबों मजलूमों के वाजिब हक के लिए आवाज उठाने वालों के लिए शासन सत्ता के गुरुर, भाषा, जंगल न्याय और
नोबेल पुरस्कार पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का मानना है कि भारतीयों में आम चर्चा और तर्कशील बहस की लंबी परंपरा रही है। लेकिन आज यह परंपरा अन्य पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण को लेकर पैदा
अनिल तिवारी राम नाम की लूट के लिए भारी-भरकम बजट से संवारे सजाए जा रहे अयोध्या मंदिर में राम के नाम पर लूट किए जाने की दुखद खबरें इन दिनों सुर्खियों में है। उत्तर
गौरी तिवारी इन बेनाम गलियों में, घूमे वह किसी बंजारे-सा, तपती ग्रीष्म की किरणों में, भटके वह किसी प्यासे-सा। है खोज उसे उस मार्ग की, जहाँ सत्य उसे साकार मिले, इस क्षणभंगुर जगत के
योगस्य चित्त वृत्ति निरोध [caption id="attachment_5730" align="alignleft" width="55"] डॉ दिनेश प्रसाद मिश्र[/caption] मनुष्य का जीवन केवल बाहरी उपलब्धियों, प्रतियोगिताओं और भौतिक सुखों तक सीमित नहीं। जीवन का उद्देश्य अपने भीतर छिपी शक्ति,
गौरी तिवारी एक ओर स्वतंत्र, स्वच्छ, सुंदर और विकासशील भारत है और वहीं दूसरी ओर उसी भारत में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आज भी निर्धनता की बेड़ियों में कैद हैं, बुनियादी आवश्यकताओं